वर्षा ऋतु में सर्दी, खांसी, ज्वर एवं कोरोना में उपयुक्त घरेलु औषधियां

औषधि अपने मन से न लेते हुए वैद्यों के मार्गदर्शनानुसार ही लेनी चाहिए; परंतु कई बार वैद्यों के पास तुरंत ही जाने की स्थिति नहीं रहती । कई बार थोडी-बहुत औषधि लेने पर वैद्यों के पास जाने की आवश्यकता ही नहीं पडती । इसलिए ‘प्राथमिक उपचार’ के रूप में यहां कुछ आयुर्वेद की औषधियां दी हैं ।

चिकनगुनिया : लक्षण एवं उपचार !

‘चिकनगुनिया’ इस व्याधि का स्वरूप भले ही भयंकर है, तब भी यह प्राणघातक व्याधि नहीं है । वह ठीक हो जाती है और जोडों में वेदना भी ठीक हो सकती है । केवल योग्य समय पर वैद्य के पास जाना ओर उनसे पर्याप्त समय तक उपचार लेने की आवश्यकता है ।’

खुलकर बात करना एक महान औषधि है !

पूर्वाग्रह, राग, भय के समान मूलभूत स्वभावदोषों के कारण अधिकांश लोगों के लिए खुलकर बात करना असहज रहता है । कुछ लोगों के मन में अनेक वर्षाें के प्रसंग तथा उस संबंधी भावनाएं रहती हैं । यदि मन में किसी भी प्रकार के विचार संगठित हुए, तो उसका परिणाम देह पर होता है तथा विभिन्न शारीरिक कष्ट आरंभ होते हैं ।

आनेवाले आपातकाल में तर जाने के लिए पूर्वतैयारी के विषय में बतानेवाले एकमेवाद्वितीय परात्पर गुरु डॉ. आठवले !

‘वर्तमान में देश एवं धर्म के दृष्टिकोण से आपातकाल चल रहा है । प्राकृतिक आपत्तियां सतत आना, देशद्रोही एवं धर्मद्रोही की प्रबलता बढना, राजकीय अस्थिरता निर्माण करनेवाली घटनाएं होना, समाज, राष्ट्र एवं धर्म के हित के शुभ कार्य में विघ्न आना इत्यादि आपातकाल के भौतिक लक्षण हैं । ऐसे काल में सामान्य नागरिकों का दैनंदिन जीवन संघर्षशील होता है !

आटा, धान्य एवं मसाले खराब न होने हेतु रखी जानेवाली सावधानी

रसोईघर में रखा हुआ आटा, अनाज एवं मसालों के भी खराब होने की संभावना होती है । कुछ समय उपरांत रखा हुआ आटा, अनाज एवं मसालों के भी खराब होने की संभावना होती है । कई बार आटे में पडनेवाले कीडे हमारे लिए कष्टदायी हो सकते हैं । इसलिए वर्षा में आनेवाले कीडे हमारे लिए कष्टदायक भी हो सकते हैं । इसलिए वर्षा में आटा एवं दालों को कीडों से बचाने के लिए कुछ सरल युक्तियां यहां दे रहे हैं ।

आयुर्वेद : रोगों का मूल एवं उस पर दैवीय चिकित्सा

कोई भी रोग, यह शरीर के वात, पित्त एवं कफ की मात्रा में परिवर्तन होने से होता है । आयुर्वेद के अनुसार कर्करोग से हृदयरोग तक एवं पक्षाघात से लेकर मधुमेह तक सर्व रोगों का मूल यही है । शरीर के त्रिदोषों में से किसी भी दोष की मात्रा बढने अथवा अल्प होने अथवा उनके गुणों में परिवर्तन होने से वे दूषित हो जाते हैं । फिर यही कण शरीर में रोग उत्पन्न करते हैं ।

आम्लपित्त : आजकल की बडी समस्या एवं उस पर उपाय !

आम्लपित्त के कष्ट के पीछे के कारणों का तज्ञों की सहायता से शोध लेकर उनपर कायमस्वरूपी उपचार करना अत्यावश्यक है । इसके लिए जीवनशैली में परिवर्तन करने की तैयारी होनी चाहिए ।

‘तीव्र आपातकाल में केवल साधना ही मनुष्य को बचा सकेगी’, इस विषय में परात्पर गुरु डॉक्टर आठवले द्वारा समय-समय पर किया महत्त्वपूर्ण मार्गदर्शन !

परात्पर गुरु डॉ. आठवले ने आपातकाल में जीवनावश्यक वस्तएं एवं औषधियों के बिना दयनीय अवस्था न हो, इसलिए स्थूल से पूर्वतैयारी करने के विषय में जागृति की । इसके साथ ही आपातकाल का सामना करने के लिए साधकों की आध्यात्मिक स्तर पर तैयारी भी करवा ले रहे हैं । अब कोरोना महामारी के काल में ही बाह्य परिस्थिति इतनी प्रतिकूल हो गई है, तो भावी भीषण आपातकाल में क्या स्थिति होगी ?

बाबा वंगा की भविष्यवाणी : सायबेरिया में प्राणघातक विषाणु की खोज होगी !

अन्य एक भविष्यवाणी में उन्होंने कहा था, वर्ष २०२२ में ‘ओमुआमुआ’ नामक एक लघुग्रह परग्रहवासियों द्वारा (‘एलियन्स’द्वारा) पृथ्वी ग्रह पर जीवन की खोज के लिए भेजा जाएगा । तदुपरांत ये ‘एलियन्स’ पृथ्वी के लोगों पर आक्रमण कर सकते हैं ।

आयुर्वेद : कौन से रोगों पर कौनसे आसन उपयुक्त ?

‘बुढापे में जोडों में वेदना, कमर में वेदना, पीठ में वेदना इत्यादि बीमारियां होने पर आधुनिक वैद्य (डॉक्टर) व्यायाम, योगासन इत्यादि करने के लिए कहते हैं । यहां ध्यान देनेवाली महत्त्वपूर्ण बात यह है कि बीमारी होने पर व्यायाम करने की अपेक्षा बीमारी हो ही नहीं; इसलिए व्यायाम करना अधिक लाभदायक होता है ।’