सदैव निरोगी रहने के लिए नारियल के तेल का उपयोग करें !

नारियल का तेल यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ रखे, तो दूसरी किसी भी औषधि की आवश्यकता ही नहीं पडेगी । केवल एक बात ध्यान रखनी है कि यह तेल काेल्हू में पिरोया गया और बिना गरम किए हो । सूखे हुए नारियल कोल्हू में पिरोए गए हों और उस पर कोई भी रासायनिक प्रक्रिया न की गई हो,

पंचकर्म : आयुर्वेद की महत्त्वपूर्ण चिकित्सा !

आयुर्वेद का प्रमुख उद्देश्य निरोगी मनुष्य के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी मनुष्य को रोगमुक्त करना है । पंचकर्म इसे साध्य करने का एक साधन है । रोगों से मुक्ति और निरोगी, दीर्घायुष्य देनेवाले यह एक आयुर्वेद की स्वतंत्र और विशेष चिकित्सापद्धति है ।

ज्वर (बुखार) में उपयुक्त आयुर्वेद की कुछ औषधियां

ज्वर आने की संभावना होने पर अथवा जब ज्वर हो, तब २ – ३ दिन एक-एक गोली का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ दिन में २ – ३ बार लें । ३ वर्ष की कम आयु के बच्चों को एक चौथाई और ३ से १२ वर्ष की आयुवाले बच्चों को आधी, इस मात्रा में औषधि लें ।

आयुर्वेद की कुछ सुवर्णयुक्त औषधियां

आयुर्वेद की औषधियों में ‘सुवर्णयुक्त औषधियों (सुवर्णकल्प) की  उत्तम ‘रसायन’ में गणना होती है । ‘सुवर्ण’ अर्थात ‘सोने’ । सुवर्णयुक्त आयुर्वेद की औषधियों में साेने की भस्म होती है । इसलिए इस औषधि का मूल्य अधिक होता है ।

श्वसनसंस्था के विकारों में उपयुक्त आयुर्वेद की कुछ औषधियां

आयुर्वेद में राजयक्ष्मा (तपेदिक अर्थात टीबी) जैसी गंभीर बीमारियों में श्वसनसंस्था का दूषित कफ बाहर निकालना, शरीर की अग्नि का दीपन करना (पचनशक्ति सुधारना) और समस्त शरीर को बल देने के लिए इस औषधि का उपयोग होता है ।

हृदय एवं श्वसनसंस्था को बल देनेवाली आयुर्वेद की कुछ प्रसिद्ध औषधियां

श्वसनसंस्था और हृदय को बल देने के लिए इस औषधि का अच्छा उपयोग होता है । दम घुटने समान होना, बारंबार घबराहट होना, छाती तेजी से धडकना जैसे हृदय से संबंधित विशिष्ट लक्षणों में इस औषधि का उपयोग होता है ।

अधिक वर्षावाले प्रदेशों में निरोगी रहने के लिए दिनभर में केवल २ बार आहार लें !

वर्षा ऋतु में दिन में केवल २ बार आहार लेने की आदत डालने से एक बार लिया हुआ अन्न पूर्णरूप से पचने के पश्चात ही दूसरा अन्न जठर में आता है । इससे अन्नपचन ठीक होता है । शरीर को अतिरिक्त २ बार अन्न पचाने का श्रम नहीं होते । इसलिए बची हुई शक्ति अब बदले हुए वातावरण के अनुकूल बनने के लिए उपयोग में आती है ।

शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य की देखभाल ऐसे करें !

शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक स्वास्थ्य अर्थात सुखसंवेदना अनुभव करने की अवस्था अर्थात स्वास्थ्य ।

सर्दियों के विकारों पर सरल उपचार

‘सर्दियों में ठंडी एवं शुष्कता बढ जाती है । उनका योग्य प्रतिकार न करने से विविध विकार होते हैं । इनमें से बहुतांश विकार तेल का उचित उपयोग एवं गर्म सिकाई करने से नियंत्रण में आते हैं ।

शरीर में कमजोरी का इलाज : आयुर्वेद के प्राथमिक उपचार

कई बार कुछ लोगों को बहुत थकान लगती है। शरीर में कमजोरी का इलाज करने हेतू आगे दिए क्रम से प्राथमिक उपचार करें ।