अंदरूनी चोट एवं मोच पर होमियोपैथी औषधियों की जानकारी

गिरना, टकराना, दुर्घटना के कारण शरीर को अंदरूनी चोट लग सकती है । बाह्य घटकों के कारण जानबूझकर अथवा अनजाने में शरीर के जीवित भाग को हुई हानि को ‘दुर्घटना’, कहते हैं । दुर्घटना की व्याप्ति के अनुसार विश्राम लेना, दुर्घटनाग्रस्त भाग पर ३-४ बार, हर बार १० मिनट तक बर्फ लगाना इत्यादि उपचार करें ।

माहवारी से संबंधित शिकायतों पर (Ailments related to menses) होमियोपैथी औषधियों की जानकारी

मासिक धर्म से संबंधित विविध प्रकार की शिकायतों का स्त्रियों को सामना करना पडता है । इसमें से कुछ प्रमुख शिकायतों के उपचारों के संदर्भ में जानकारी आगे दी गई है । कौन से विशेष लक्षण होने कौन-सी औषधि लें, वह औषधि के नाम के आगे दिया है ।

घटनापूर्व चिंता (Anticipatory anxiety) पर होमियोपैथी औषधियों की जानकारी_Pending_Review

घटनापूर्व चिंता, अर्थात भविष्य की चिंता करना, कुछ गलत होगा अथवा जो कार्य हाथ में लिया है उसे सफलतापूर्वक पूर्णत्व को नहीं ले जा पाएंगे, इसकी चिंता लगना । किसी भी कठिन निर्णय, कृति अथवा परिस्थिति का प्रत्यक्ष सामना करने से पूर्व ही लगनेवाली चिंता को घटनापूर्व चिंता कहते हैं ।

चिंता अथवा डर (Anxiety/Fear/Panic) पर होमियोपैथी औषधियों की जानकारी

चिंता और भय, ये सामान्य मानवी भावनाएं हैं; परंतु जब जीवन की सामान्य परिस्थिति में भी निरंतर और अत्यधिक चिंता अथवा भय निर्माण होता हो और उससे धडकनें बढना, पसीना आना, श्वासोच्छ्वास की गति बढ जाना इत्यादि लक्षण दिखाई देें, तो उसपर उपचार लेना आवश्यक होता है ।

सिरदर्द पर (Headache) होमियोपैथी औषधियों की जानकारी

डोकेदुखीची विविध कारणे, तिची लक्षणे आणि तिच्यावर उपलब्ध असलेल्या विविध औषधांची माहिती या लेखात देण्यात आली आहे

नियमितरूप से प्राणायाम, व्यायाम एवं योगासन कर शरीर की प्रतिकार क्षमता बढाएं !

उसके बिना हमारा घर नहीं चल सकता । व्यावहारिकदृष्टि से जैसे यह आवश्यक है, वैसे ही अपनी देह चलाने के लिए उसमें योग्य मात्रा में प्राणशक्ति (चेतनाशक्ति) प्रवाहित होना

और उसका नियमन होना अत्यंत आवश्यक है । उसके लिए संतुलित आहार का सेवन, योग्य दिनचर्या का पालन और नियमित व्यायाम करना आवश्यक होता है । इससे चेतनाशक्ति कार्यरत रहने में सहायता होती है ।

शरीर को मर्दन करने की शास्त्रीय दृष्टि से योग्य पद्धति एवं मर्दन के लाभ !

शरीर की क्षमता से अधिक परिश्रम करने पर, एकाएक आपातकालीन कृति करनी पड जाए अथवा कृति अनुचित पद्धति से की जाए तो अपने स्नायु थक जाते हैं अथवा उनमें अकडन उत्पन्न हो जाती है । ऐसे समय पर उनमें अशुद्ध द्रव्य निर्माण होते हैं । वे शरीर की वाहिनियों में पूर्णरूप से अवशोषित नहीं होते अथवा धीरे-धीरे अवशोषित होते हैं । इससे स्नायुओं में वेदना होने लगती है ।

कंधों का दर्द होने पर किए जानेवाले कुछ महत्त्वपूर्ण व्यायामप्रकार

आपातकाल में वैद्य अथवा औषधि मिलने की निश्चती न होने से बीमारी टालने के लिए अथवा नियंत्रण में रखने के लिए अभी से हम सभी ये व्यायामप्रकार करना प्रारंभ करेंगे ।

सदैव निरोगी रहने के लिए नारियल के तेल का उपयोग करें !

नारियल का तेल यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ रखे, तो दूसरी किसी भी औषधि की आवश्यकता ही नहीं पडेगी । केवल एक बात ध्यान रखनी है कि यह तेल काेल्हू में पिरोया गया और बिना गरम किए हो । सूखे हुए नारियल कोल्हू में पिरोए गए हों और उस पर कोई भी रासायनिक प्रक्रिया न की गई हो,

पंचकर्म : आयुर्वेद की महत्त्वपूर्ण चिकित्सा !

आयुर्वेद का प्रमुख उद्देश्य निरोगी मनुष्य के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी मनुष्य को रोगमुक्त करना है । पंचकर्म इसे साध्य करने का एक साधन है । रोगों से मुक्ति और निरोगी, दीर्घायुष्य देनेवाले यह एक आयुर्वेद की स्वतंत्र और विशेष चिकित्सापद्धति है ।