नैसर्गिक आपत्तियों में संगठितरूप से आपत्कालीन सहायता कैसे करें ?

    १. आपत्तियों का सखोल अध्ययन करना आवश्यक १ अ. आपत्कालीन घटना का स्वरूप और व्याप्ति समझकर लेना आपदाग्रस्त लोगों को सहायता करने की दृष्टि से सर्वप्रथम घटना का स्वरूप और उसकी व्याप्ति जानकर लें, उदा. भूकंप होने पर वह कितनी तीव्रता का है ?, कितने गांव जलप्रलय (बाढ) की चपेट में हैं ? … Read more

भारतीयों ‘अग्निहोत्र का महत्त्व ध्यान में रख प्रतिदिन ‘अग्निहोत्र’ करें !

‘कोरोना विषाणु का जगभर संसर्ग होने से समस्या निर्माण हो गई है । इस विषाणु का संसर्ग टालने के लिए हमें बार-बार हाथ धोना, सोशल डिस्टन्सिंग (सामाजिक अंतर) जैसे नियम पालने चाहिए । ऐसा कहते हैं कि अपनी भारतीय परंपरा में अग्निहोत्र करने से वातावरण की शुद्धि होती है । इस विषाणु का संसर्ग अभी … Read more

बहुगुणी भीमसेनी आयुर्वेदीय कपूर !

‘पुदिना के फूल, अजवायन के फूल एवं भीमसेनी कपूर, तीनों को सम मात्रा में एकत्र करने पर कुछ समय पश्चात उसका तेल में रूपांतर होता है । इस तेल को ‘अमृतधारा तेल’ कहते हैं । यह तेल गठिया पर अत्यंत उपयुक्त है ।’

बाबा वेंगा की वर्ष २०२२ के लिए भविष्यवाणी !

वैश्विक तापमान बढने का परिणाम भारत पर भी होने वाला है । इस कारण देश के अनेक भागोें का तापमान लगभग ५० अंश सेल्सियस के आसपास पहुंचेगा ।

हिन्‍दू राष्‍ट्र की स्‍थापना वर्ष २०२५ तक होगी ! – परात्‍पर गुरु डॉ. आठवलेजी

पूर्वानुमान से संतों ने बताया हुआ आपातकाल भले ही आगे गया हो, तब भी उसका आरंभ कभी भी हो सकता है । कोरोना जैसी महामारी के माध्यम से हमने इसका अनुभव लिया ही है । तीसरे विश्वयुद्ध का आरंभ कभी भी हो सकता है । इसलिए साधक आपातकाल की तैयारी जारी रखें ।

नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करने के पश्चात राजकीय स्तर पर बहुत उतार-चढाव होने से वहां की जनता ने अनुभव की भयावह आपातकालीन स्थिति !

२०.९.२०१५ को नए संविधान के अनुसार नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र्र घोषित किया गया । नया संविधान स्वीकारने के पश्चात राजकीय स्तर पर बहुत उतार-चढाव हुए और अब भी हो रहे हैं । अनाज और औषधियों से लेकर औद्योगिक साहित्य तक नेपाल भारत पर ही निर्भर है ।

नि:शुल्क; परंतु बहुमूल्य आयुर्वेदीय औषधियां : सेमल के फूल एवं मक्के के भुट्टे के केश (बाल)

पुणे के श्री. अरविंद जोशी नामक एक सद्गृहस्थ हैं जो विविध भारतीय उपचारपद्धतियों का अभ्यास करनेवाले हैं । उन्होंने अपनी शोध वृत्ति से इन फूलों का औषधीय गुणधर्म ढूंढा और अनेकों को उससे लाभ हुआ । उनके पास इसके अनेक उदाहरण हैं । उनका एक लेख पढकर मैंने भी कुछ रोगियों को ये फूल दिए, तो ध्यान में आया कि उन्हें भी बहुत लाभ हुआ है ।

सनातन का ‘घर-घर रोपण’ अभियान

आजकल बाजार में मिलनेवाले हरी सब्जियां, फल इत्यादि पर हानिकारक रसायनों के फव्वारे किए जाते हैं । ऐसी सब्जियां एवं फल खाने से प्रतिदिन विषैले पदार्थ हमारे पेट में जाते हैं । इससे रोग होते हैं । साधना के लिए शरीर स्वस्थ रखना आवश्यक है ।

भगवान की कृपादृष्टि रहे एवं अपने सर्व ओर सुरक्षाकवच निर्माण हो, इस हेतु प्रतिदिन की जानेवाली कुछ कृतियां !

देवपूजा के कारण अपनी सात्त्विकता बढती है, अपने मन में भक्तिभाव का केंद्र निर्माण होता है, हम पर देवताओं की कृपादृष्टि होती है एवं घर में वातावरण सात्त्विक एवं प्रसन्न बनता है । जो भगवान को प्रतिदिन भक्तिभाव से पूजता है, वह भगवान को प्रिय होता है ।