आपातकाल की तैयारी के लिए अपने घर में हरे शाक एवं औषधीय वनस्पतियों की बागवानी करें !
भीषण आपातकाल की तैयारी के लिए प्रत्येक जन अपने घर के समीप हरे शाक एवं औषधीय वनस्पतियों की प्राकृतिक पद्धति से बागवानी करे ।
भीषण आपातकाल की तैयारी के लिए प्रत्येक जन अपने घर के समीप हरे शाक एवं औषधीय वनस्पतियों की प्राकृतिक पद्धति से बागवानी करे ।
‘केवल पानी देने का समय हो गया; इसलिए पेड-पौधों को प्रतिदिन पानी डाल दिया, ऐसा न करते हुए पेड-पौधों एवं मिट्टी का निरीक्षण कर आवश्यकता होने पर ही पानी दें ।
अनेक बार सभी को, विशेषरूप से नए बागकर्मियों को कुछ प्रश्न हमेशा होते हैं कि किन भाजी-तरकारियों को कितनी धूप लगती है ? तरकारी को बोने से लेकर उसे काटने तक, इस संपूर्ण जीवनचक्र में उसे धूप की कितनी आवश्यकता होती है एवं हमारे पास जो उपलब्ध धूप है, फिर वह सीधे धूप हो अथवा सूर्यप्रकाश, हम कौन-कौनसी शाक-तरकारी लगा सकते हैं ?’ इन प्रश्नों के उत्तर इस लेख में हैं ।
पुरातन भारतीय कृषि परंपरा प्रकृति के लिए अनुकूल थी । स्थानीय परिस्थिति के अनुरूप देशी बीजों का उपयोग करना, मिट्टी की उर्वरता टिकाए रखना एवं खेत के जीवाणु, कीटक एवं फसलों की जैवविविधता (बायोडायवर्सिटी) की ठोस नींव पर यह व्यवस्था खडी थी ।
शकरकंद की बेल काटकर और भी रोपण कर सकते थे ।
हाट (बाजार से) लाया गया पालक अथवा पुदीना, कई बार उनमें कुछ जडसहित होते हैं जिसे मिट्टी में खोंसने पर उनसे नए पौधे आते हैं । अदरक, प्याज, आलू, शकरकंद, सूरन, अरबी जिनमें अंकुर आ गए, उनसे नया रोपण करना सहज संभव है ।’
हाथ-पैरों पर फुंसिया आना, ज्वर एवं ज्वर जाने के पश्चात मुंह में वेदनादायक छाले आना, इन लक्षणों के संक्रमक रोग को आधुनिक वैद्यकीयशास्त्र में ‘हैंड, फुट एवं माऊथ’ रोग कहते हैं । इस रोग पर आयुर्वेद में प्राथमिक उपचार यहां दे रहे हैं ।
‘बद्धकोष्ठता के लिए ‘गंधर्व हरीतकी वटी’ की २ से ४ गोलियां रात में सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ लें । इसके साथ ही भूख न लगना, भोजन न कर पाना, अपचन होना, पेट में वायु (गैस) होना, ऐसे लक्षण होने पर ‘लशुनादी वटी’ की १ – २ गोलियां दोनों बार के भोजन के १५ मिनट पहले चुभलाकर खाएं ।
प्रस्तुत औषधियों के साथ शासन द्वारा प्राधिकृत की हुई वैद्यकीय चिकित्सा एवं औषधियां लेना टालें नहीं । अन्य सर्व उपाययोजनाओं का पालन करें, इसके साथ ही स्थल, काल एवं प्रकृति के अनुसार चिकित्सा में परिवर्तन हो सकता है । इसलिए योग्य वैद्यों की सलाह लें ।
छोटे लडके-लडकियों के गले में धागा बांधकर उसे छाती के स्तर तक आए एवं शरीर को स्पर्श हो, इसप्रकार वेखंड का टुकडा मजबूती से बांध कर रखें ।