चालिस के उपरांत घुटनों में वेदना न हो, इसलिए घुटनों पर नियमित तेल लगाएं !

‘चालीस वर्ष की आयु होने के पश्चात आरोग्य की विविध समस्याएं होने लगती हैं । इनमें अनेक लोगों को सतानेवाली समस्या है घुटनों में वेदना । घुटनों में वेदना न हो अथवा वह सुसह्य हो, इसलिए चालीस के उपरांत प्रत्येक को ही प्रतिदिन दिन में कम से कम एक बार घुटनों में तेल लगाना चाहिए … Read more

सोंठ डालकर उबाले हुए पानी में खमीर उठने पर उसका उपयोग न करें !

वर्षाकाल में, सर्दियों के दिनों में, इसके साथ ही वसंत ऋतु में (सर्दियों एवं गर्मियों के बीच के काल में) सोंठ का पानी पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है । सोंठ का पानी बनाने के लिए लोटे भर पानी में एक पाव चम्मच सोंठ की चूर्ण डालकर पानी उबालें और छान लें । प्यास लगने … Read more

तीखा न खाने पर भी कुछ लोगों को पित्त का कष्ट क्यों होता है ?

‘अपने जठर में पाचक स्राव का रिसाव होता रहता है । इस पाचक स्राव के अन्ननलिका में आने पर, पित्त का कष्ट होता है । खट्टा, नमकीन, तीखा और तैलीय पदार्थ खाने से पित्त बढता है; परंतु ऐसा कुछ न खाते हुए भी कुछ लोगों को गले में और छाती में जलन होती है, अर्थात … Read more

साधना अच्छी होने के लिए आयुर्वेद के अनुसार अभ्यास करने की आवश्यकता

मनुष्यजन्म बहुत पुण्य से मिलता है । साधना कर ईश्वरप्राप्ति करने में ही मनुष्यजन्म की सार्थकता है । शरीर निरोगी होगा, तो साधना करना सरल हो जाता है ।

शरीर निरोगी रखने के लिए केवल इतना ही करें !

आजकल अनेक लोग चलना, यह व्यायाम स्वरूप करते हैं; परंतु कुछ का चलना आराम से होता है । अनेक लोग चलते समय एक-दूसरे से बात करते हुए चलते हैं । इससे व्यायाम का लाभ नहीं होता ।

वर्षा ऋतु में बीच में ही वर्षा रुक जाती है और धूप निकल आती है, तब सावधानी रखें !

‘कई बार वर्षा ऋतु में सतत होनेवाली वर्षा रुक जाती है और धूप निकल आती है । कुछ दिन वर्षा नहीं होती और सतत धूप रहती है, तब इससे शरीर में…

बार-बार चाय पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने से उसे छोडें !

‘दूध युक्त चाय पीने से पित्त बढता है । अल्पाहार के साथ हम चाय पीते हैं । अल्पाहार के पदार्थाें में नमक होता है ।