सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है । सूर्य नमस्कार को एक संपूर्ण व्यायाम माना जाता है । जानिए, सूर्य नमस्कार का लाभ एवं वह कैसे करें ।

हाथ-पैर धोना तथा कुल्ला करनेके संदर्भमें आचार

शौच एवं लघुशंका जैसी कृति करते समय पैरके संपर्कमें आई रज-तमात्मक तरंगोंका पैर धोनेसे जलमें विसर्जन होता है तथा देह शुद्ध हो जाता है । हाथ-पैर धोना तथा कुल्ला करनेके संदर्भमें आचारके संदर्भमें देखते है…

झाडू लगाते समय पूर्व दिशाकी ओर कूडा क्‍यों ना ढकेलें ?

पूर्व दिशाकी ओरसे देवताओंकी सगुण तरंगोंका पृथ्वीपर आगमन होता है । कूडा रज-तमात्मक होता है, इसलिए पश्चिमसे पूर्वकी ओर कूडा ढकेलते समय कूडा और धूलका प्रवाह पूर्व दिशामें होता है ।

नींदसे जागनेपर भूमिवंदना क्‍यों करते है ?

रात्रिकालमें तमोगुण प्रबल होता है । ‘भूमिसे प्रार्थना कर ‘समुद्रवसने देवी…’ श्लोक कहकर भूमिपर पैर रखनेसे, रात्रिकालमें देहमें आवेशित कष्टदायक स्पंदन भूमिमें विसर्जित हो जाते हैं ।

मस्तकपर तिलक धारण करनेका कारण क्‍या है ?

यहांपर हम जानेंगे तिलक धारण करनेके संदर्भमें आचार, संध्याके संदर्भमें आचार, तुलसीको जल देना और नमस्कार करनेका महत्त्व और देवतापूजन के संदर्भ में आचार |

शौचविधि करनेसे पूर्व, जनेऊ दाहिने कानपर क्‍यों लपेटें ?

हाथ-पैर धोकर, कुल्ला करनेके उपरांत जनेऊ कानसे हटाएं । इसका आधारभूत शास्त्रीय कारण यह है कि, शरीरके नाभिप्रदेशसे ऊपरका भाग धार्मिक क्रियाओंके लिए पवित्र है, जबकि उससे नीचेका भाग अपवित्र माना गया है ।

दिन में क्यों नहीं सोना चाहिए ?

दिन और रात, इन दो मुख्य कालों में से रात के समय साधना करने में हमारी शक्ति का अधिक व्यय होता है; क्योंकि इस काल में वातावरण में अनिष्ट शक्तियों का संचार बढ जाता है । इसलिए यह काल साधना के लिए प्रतिकूल रहता है ।