मनुष्यजीवन का कारण क्या है ?
मनुष्य का पुनः-पुनः जन्म होने के विविध कारण है । इसके दो प्रमुख कारण हैं – पहला कारण है प्रारब्ध अर्थात पिछले जन्म में किए अच्छे-बुरे कर्मों को भुगतना और सामान्य जीवनयापन करना ।
मनुष्य का पुनः-पुनः जन्म होने के विविध कारण है । इसके दो प्रमुख कारण हैं – पहला कारण है प्रारब्ध अर्थात पिछले जन्म में किए अच्छे-बुरे कर्मों को भुगतना और सामान्य जीवनयापन करना ।
अध्यात्म, यह शब्द अधि + आत्मन् अर्थात आत्मा को समझने का जो शास्त्र है, उसे अध्यात्म कहते हैं । यह एकमात्र शास्त्र ऐसा है जो मनुष्य को किसी भी स्थिति में आनंद में कैसे रहें, यह सिखाता है ।
‘भा’ + ‘व’ अर्थात भाव । यहां ‘भा’ का अर्थ है ‘तेज’ एवं ‘व’ अर्थात वृद्धि करनेवाला । अर्थात हममें तेजतत्व की वृद्धि करनेवाला ।
भगवान के पास जाते समय यदि मन में गर्व लेकर जाएंगे अथवा बिना शरणागत हुए जाएंगे, तो निश्चितरूप से भगवान की कृपा नहीं मिलती । हम याचक बनकर गए, शरणागत होकर गए, बिना फल की अपेक्षा रखकर गए, तो भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं ।
वास्तुदेवता की जो हम पर कृपा है, उसके लिए मन में जितनी कृतज्ञता रखें उतनी कम ही है । उनके चरणों में भावपूर्ण कृतज्ञता व्यक्त करेंगे ।
नई देहली में सनातन संस्था की ओर से छोटे बच्चों के लिए ऑनलाईन बालसंस्कार वर्ग का आयोजन किया गया ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्रों में योगशास्त्र का महत्त्व जगभर के अन्य देशों के मन पर अंकित किया । अत: संयुक्त राष्ट्रों ने २१ जून को ‘आंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में घोषित किया
सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है । सूर्य नमस्कार को एक संपूर्ण व्यायाम माना जाता है । जानिए, सूर्य नमस्कार का लाभ एवं वह कैसे करें ।
‘आषाढ अमावस्या, २१.६.२०२०, रविवार को भारत के राजस्थान, पंजाब, हरियाणा एवं उत्तराखंड के कुछ प्रदेशों में सवेरे लगभग १० बजे ‘कंकणाकृति’ सूर्यग्रहण दिखाई देगा तथा शेष संपूर्ण भारत में यह सूर्यग्रहण ‘खंडग्रास’ दिखाई देगा ।’
आजकल कई लोग मधुमेह, रक्तचाप, हृदयरोग, तीव्र आम्लपित्त (हाइपर एसिडिटी), घुटनों के दर्द जैसे कई विकारों पर वर्षों से एलोपैथी औषधियों का सेवन कर रहे हैं ।