दिनभर की विभिन्न कृतियों में भी हम कैसे भाव रख सकते हैं ?
आज से हम जो भी कृति करेंगे वह ईश्वर का स्मरण करते हुए और जैसी ईश्वर को अच्छी लगेगी, वैसी करेंगे । फिर हम उसे ईश्वर को समर्पित करेंगे ।
आज से हम जो भी कृति करेंगे वह ईश्वर का स्मरण करते हुए और जैसी ईश्वर को अच्छी लगेगी, वैसी करेंगे । फिर हम उसे ईश्वर को समर्पित करेंगे ।
हमें भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सिखाए गए भक्तियोग और कर्मयोग के पालन से शक्ति और शांति मिल पाएगी, ऐसा वक्तव्य अमेरिका की प्रथम हिन्दू सांसद तुलसी गेबार्ड ने किया ।
सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से पाक्षिक ‘सनातन प्रभात’के हिन्दी भाषा के पाठकों के लिए नियमित ‘ऑनलाईन’ साप्ताहिक सत्संग प्रारंभ किया गया है ।
आनेवाला काल भीषण है । इसलिए कोई भी निर्णय लेते समय इसका अनुभूति होना आवश्यक है । उद्योगपति राष्ट्र का आधारस्तंभ हैं ।
सनातन संस्था की ओर से संगणकीय प्रणाली द्वारा शिक्षक शिविर का आयोजन किया गया था ।
सनातन संस्था के सनातन डॉट ऑर्ग जालस्थल का मलयालम भाषा में लोकार्पण तेलंगाना चिलकूर बालाजी ‘मंदिर के मुख्य पुजारी श्री. सी.एस. रंगराजन के करकमलों द्वारा २८ जून को मंदिरों का नियंत्रण धर्मनिरपेक्ष सरकार के हाथों में क्यों ?’, इस विषय पर ‘ऑनलाइन’ परिसंवाद में संपन्न हुआ ।
श्री. राजहंस ने उपस्थित जिज्ञासुओं को श्री विठ्ठल एवं वारी के संदर्भ में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा रखे गए शास्त्रीय ज्ञान से अवगत कराया ।
सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से २७ जून को वर्तमानस्थिति में ‘तनाव और उपाय’ इस विषय पर पत्रकारों के लिए ‘ऑनलाईन पत्रकार संवाद’ आयोजित किया गया था ।
आज तक जहां राम-नाम का स्मरण होता है, जहां रामकथा होती है, वहा साधकों को मदद करने के लिए हनुमानजी सूक्ष्मरूप से उपस्थित रहते हैं ।
श्रीगणेश को फल-फूल और नैवेद्य अर्पण करने के पीछे शास्त्र और उसके आध्यात्मिक लाभ जाने बिना शास्त्र विरोधी आवाहन करने से धर्म की हानि होती है और पाप भी लगता है ।