सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ‘धर्मरक्षा’ एवं ‘साधकों को तैयार करना’ इस अलौकिक कार्य की योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन ने की प्रशंसा !
सनातन के आश्रमों में ज्येष्ठ साधकों द्वारा नवोदित साधकों का ध्यान बालकों समान लिया जाता है । यह दुर्लभ चित्र आपके ही आश्रम में दिखाई देता है । इसलिए नवोदित साधकों को सुयोग्य मार्गदर्शन मिलता है औेर पुराने साधकों को अहंकार का स्पर्श नहीं होता, यह विशेष है ।
