आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक पूर्वतैयारी : भाग – ३

आपातकाल में ऐसी स्थिति निर्माण हो सकती है कि भोजन के लिए ईंधन का अभाव हो, घर में सभी लोग रोगी हों, अचानक अन्य स्थान पर रहना पडे, बाजार में साग-सब्जियां न मिले ।

आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक पूर्वतैयारी’ : भाग – २

हम कितना भी अनाज संग्रहित कर लें, वह धीरे-धीरे समाप्त होता है । ऐसे समय भूखा न रहना पडे, इसकी पूर्व तैयारी के लिए अनाज का रोपण, गोपालन आदि करना आवश्यक है ।

आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक पूर्वतैयारी : भाग – १

आपातकाल में रक्षा हेतु व्यक्ति अपने बल पर कितनी भी तैयार रहे, भूकम्प, त्सुनामी समान महाभीषण आपदाओं से बचने के लिए अन्ततः भगवान पर भरोसा करना ही पडता है ।

‘एलोपैथिक सेनिटाइजर’ (रोगाणुरोधक) की तुलना में ‘आयुर्वेदिक सेनिटाइजर’ का उपयोग करना स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्‍टि से तथा आध्‍यात्मिक दृष्‍टि से भी लाभदायक होना

‘एलोपैथिक सेनिटाइजर’ और ‘आयुर्वेदिक सेनिटाइजर’ से प्रक्षेपित स्पंदनों का वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए २५.४.२०२० को रामनाथी, गोवा स्थित सनातन के आश्रम में ‘महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय’ द्वारा एक परीक्षण किया गया ।

हिन्दुओ, ‘मंदिर में पैसे चढाने के बजाय, वही पैसा मंदिर के बाहर बैठे भिखारियों को दें’, ऐसा कहकर भ्रमित करनेवाले और हिन्दू धर्मियों की श्रद्धा पर आघात करनेवाले आधुनिकतावादियों का कपट पहचानें !

प्रगतिशील लोगों को यदि निर्धनों पर इतनी दया आ रही है, तो उन्हें अब तक इन युवाओं को रोजगार देना चाहिए था ।

वर्तमान में ‘कोरोना विषाणु’के कारण जिनकी मृत्यु हुई है ऐसे व्यक्तियों की मृतदेह पर अग्निसंस्कार नहीं कर सकते इसलिए धर्मशास्त्रानुसार की जानेवाली ‘पालाशविधि’ !

‘देश में सर्वत्र ‘कोरोना’ विषाणु का संसर्ग बढता जा रहा है और इसकारण अनेक लोगों की मृत्यु हो रही है । इस संसर्ग के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके परिवारवालों को मृतदेह नहीं दी जाती ।

कलास्वतंत्रता के नाम पर देवी-देवताओं का अनादर करनेवाले धर्मविरोधी !

अनेक देवी-देवताओं के नग्न एवं अश्लील चित्र बनाए हैं । इन चित्रों की बिक्री कर, करोडों रुपये कमाए । ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ को इसकी जानकारी मिलते ही उसने इस विषय में जगह-जगह आंदोलन किए

कोरोना संक्रमण की चिकित्‍सा के लिए प्राचीन भारतीय चिकित्‍सा पद्धति ‘योग एवं ध्‍यानधारणा’ परिणामकारी है ! – अंतरराष्‍ट्रीय विशेषज्ञों का दावा

 कुछ अंतरराष्‍ट्रीय विशेषज्ञों ने कोरोनाग्रस्‍त रोगियों की चिकित्‍सा के लिए योग एवं ध्‍यानधारणा ये २ प्राचीन चिकित्‍सा पद्धतियों के परिणामकारी होने का शोध किया है ।

सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ‘धर्मरक्षा’ एवं ‘साधकों को तैयार करना’ इस अलौकिक कार्य की योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन ने की प्रशंसा !

रूढी एवं परंपरा का अंधानुकरण न करते हुए उसके वैज्ञानिक एवं सामाजिक दृष्टिकोणों पर आप जो बल देते हैं, वह अत्यंत हितकारी है ।

भारत में मिली भगवान शिवजी की मूर्ति २८ सहस्र ४५० वर्ष प्राचीन अर्थात द्वापरयुग की होने का स्‍पष्‍ट !

भारत में ‘कल्‍प विग्रह’ के नाम से जानी जानेवाली भगवान शिवजी की धातु से बनी मूर्ति विश्‍व में अभी तक मिली अनेक मूर्तियों में सबसे प्राचीन मूर्ति मानी जाती है ।