नवम ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ के दूसरे दिन हिन्दुओं पर हो रहे आघातों संबंधी विचारमंथन !

वास्तव में ‘सेक्युलर’ भारत में इस्लामी आर्थिकनीति को बढावा देनेवाली ‘हलाल सर्टिफिकेट’ की व्यवस्था ८० प्रतिशत हिन्दुओं पर लादा गया ‘जजिया कर’ ही है और उसे निरस्त करने हेतु हिन्दुओं को संगठित होना चाहिए, ऐसा प्रतिपादन हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने किया ।

हिन्‍दुुत्‍वनिष्‍ठों के अपूर्व उत्‍साह में ‘ऑनलाइन’ नवम ‘अखिल भारतीय हिन्‍दू राष्‍ट्र अधिवेशन’ का उद़्‍घाटन

शंखनाद और वेदमंत्र का पाठ कर ‘ऑनलाइन’ पद्धति से आयोजित नवम ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ का आरंभ हुआ ।

ईश्वरीय राज्य का प्रतिरूप सनातन का प्रत्येक आश्रम, व्यवस्थापन का आदर्श उदाहरण !

सनातन के आश्रम, ईश्वरीय राज्य के प्रतिरूप ही हैं । परम पूज्य डॉक्टरजी ने हम साधकों को ऐसे आदर्श वातावरण में रखा है, यह हमारा महाभाग्य ही है । जिन्हें ईश्वरीय राज्य की आदर्श जीवनपद्धति देखनी है, वे सनातन के आश्रम में आकर देखें ।

आपातकालमें जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी : भाग – ७

आपातकाल से पार होने के लिए साधना सिखानेवाली सनातन संस्था ! भाग ६ पढनेके लिए देखें – आपातकालमें जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी भाग  ६ आपातकाल में अखिल मानवजाति की जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी करने के विषय में मार्गदर्शन करनेवाले एकमात्र परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी ! आपातकालीन लेखमाला के पिछले भाग में हमने पारिवारिक स्तर … Read more

समर्थ रामदास स्वामीजी ने दासबोध में कीर्तनभक्ति का वर्णन किस प्रकार किया है !

समर्थ रामदास स्वामीजी ने दासबोध में ‘कीर्तन कैसे होना चाहिए, कीर्तन में कौनसे विषय लेने चाहिए । कीर्तन के लक्षण, महत्त्व एवं फलोत्पत्ति’ के संदर्भ में अत्यंत सुंदरता से बताया है ।

आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी : भाग – ६

आपातकाल की दृष्टि से कौन-कौन-सी वस्तुएं घर में रहनी चाहिए, यह कभी-कभी एकदम नहीं सूझता । पाठकों को ऐसी वस्तुएं खरीदना सरल हो, इस विचार से आगे विभिन्न वस्तुओं की सूची दी है ।

आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी : भाग – ५

आपातकाल में पेट्रोल, डीजल आदि ईंधन का संकट अनुभव होगा । आगे तो ये ईंधन मिलेंगे भी नहीं । तब ईंधन पर चलनेवाले दुपहिया और चारपहिया वाहन अनुपयोगी हो जाएंगे ।

संत कबीर जी का आध्यात्मिक सामर्थ्य !

संत कबीर जी ने बताया, २५ वर्षों से मैं योगसाधना के बल पर हिमालय में गया था । वहां दो भाई तपश्चर्या कर रहे थे । उन्होंने मुझसे ब्रह्मज्ञान की मांग की ।

वास्तुदेवता की कृपादृष्टि सदैव हमपर बनी रहे इसलिए कैसी प्रार्थनाएं करें

आज हम सीखेंगे कि वास्तुदेवता की कृपादृष्टि सदैव हमपर बनी रहे इसलिए कैसी प्रार्थनाएं करें । प्रार्थना एसे करें कि हम आर्त भाव से ईश्वर को पुकार रहे हैं ।

अन्नसेवन यह एक ‘यज्ञकर्म’ है

हिन्दू धर्मशास्त्र में नामजप सहित सात्त्विक अन्नसेवन को ‘यज्ञकर्म’ कहा है । ‘यज्ञकर्म’ करने से अन्न सहज ही पच जाता है और प्राणशक्ति मिलती है ।