आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक पूर्वतैयारी’ : भाग – २

आपातकाल से पार होने के लिए साधना सिखानेवाली सनातन संस्था !

अखिल मानवजाति को आपातकाल में जीवित रहने के लिए
पूर्वतैयारी के विषय में मार्गदर्शन करनेवाले एकमेव परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी !

भाग १ पढने के लिए देखें : ‘आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक पूर्वतैयारी’ भाग १

बाढ, भूकंप, तृतीय विश्‍वयुद्ध, कोरोना महामारी आदि संकटों से भरे आपातकाल में अपनी रक्षा के लिए की जानेवाली पूर्व तैयारी के विषय में इस लेखमाला के पहले भाग में चूल्हा, गोबर-गैस आदि के विषय में आपने पढा । अब दूसरे भाग में हम प्रमुखरूप से सब्जी और फलदार वृक्ष लगाने के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे । अब दूसरे भाग में हम ‘अन्न’ संबंधी जानकारी प्राप्त करेंगे । ‘अन्न’ जीवित रहने की एक मूलभूत आवश्यकता है । आपातकाल में हमें भूखा न रहना पडे, इसके लिए घर में पहले से ही पर्याप्त मात्रा में अनाज खरीदकर रखना आवश्यक है । हमारी वर्तमान पीढी को विविध प्रकार के अन्न संचय करने और उन्हें दीर्घकाल तक उत्तम स्थिति में रखनेवाली पद्धतियों की जानकारी नहीं होती । इसलिए हमने कुछ अन्नसुरक्षा पद्धतियों के विषय में इस लेखमाला में बताया है । अनाज कितना भी संग्रहित करें, वह धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है । ऐसे समय दाने-दाने के लिए तरसनेसे बचने के लिए इसकी पूर्वतैयारी के रूप में अनाज की खेती करना भी आवश्यक है । धान (चावल), दलहन आदि की खेती करना सबके लिए संभव नहीं है । परंतु कंदमूल, अल्प पानी में अधिक उपज देनेवाली बारहमासी सब्जियां और बहुपयोगी फलवृक्ष सदनिका (‘फ्लैट’) के बरामसे (बालकनी) में तथा घर के परिसर में भी लगा सकते हैं । इस विषय में अधिक जानकारी इस लेख में दी गई है ।

३ अ ३. अनाज का रोपण , गोपालन आदि करना अभी से आरंभ करना

हम कितना भी अनाज संग्रहित कर लें, वह धीरे-धीरे समाप्त होता है । ऐसे समय भूखा न रहना पडे, इसकी पूर्व तैयारी के लिए अनाज का रोपण, गोपालन आदि करना आवश्यक है ।

३ अ ३ अ. धान, दलहन (द्विदल अनाज) आदि उगाना

जो लोग किसान नहीं हैं, वे इस विषय में जानकार लोगों से सीख लें ।

३ अ ३ आ. सब्जियां, कंदवर्गीय सब्जियां और फलवृक्ष लगाना

इस विषय से परिचित कराने के लिए आगे संक्षिप्त मार्गदर्शन किया गया है । ‘सब्जियां, फलवृक्ष आदि का प्रत्यक्ष रोपण और संवर्धन कैसे करें’, इस विषय पर सनातन का भिन्न ग्रंथ शीघ्र ही प्रकाशित होगा ।

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३ अ ३ आ १. सब्जियां, कंदवर्गीय सब्जियां और फलवृक्ष लगाने की आवश्यकता

अ. कुछ महीने परिवार के लिए पर्याप्त हो, इतना अनाज, दलहन आदि संग्रहित कर सकते हैं; परंतु इनकी तुलना में सब्जियां, फल आदि का संग्रह करना संभव नहीं होता ।

आ. आपातकाल में आहार में सब्जियों का उपयोग करने पर संग्रहित दलहन अधिक दिन चलेंगे ।

इ. अनाज और दलहन उगाने के लिए अधिक मात्रा में कृषियोग्य भूमि की आवश्यकता होती है; परंतु सब्जियां, फलवृक्ष आदि घर के बरामदे और परिसर में भी लगा सकते हैं ।

ई. अनाज और दलहन की तुलना में अनेक सब्जियां अल्पकाल में तैयार होती हैं ।

उ. शरीर के लिए आवश्यक पोषक घटक, उदा. कुछ जीवनसत्त्व (विटामिन), खनिज, तंतुमय पदार्थ (फायबर) ये सब सब्जी, कंदमूल और फलों से मिलते हैं । इसलिए आहारशास्त्र कहता है, ‘आहार में कुछ मात्रा में सब्जी, कंद और फल होने चाहिए ।’

ऊ. आपातकाल में प्रतिदिन दाल, रोटी खाने से आई एकरसता, सब्जी से दूर होती है तथा भोजन अधिक स्वादिष्ट बनता है ।

ए. सब्जी और फलों का उपयोग औषधि की भांति भी किया जा सकता है ।

३ अ ३ आ २. आपातकाल की दृष्टि से कौन-कौनसी सब्जियां, कंदवर्गीय सब्जियां और फलवृक्ष लगाना अधिक लाभदायक है ?

‘आपातकाल में अल्प अवधि में अधिक उपज अथवा फल मिलना आवश्यक होता है’, यह ध्यान में रखकर आगे बताए अनुसार सब्जियां और फलवृक्ष लगाना लाभदायक है – अरबी छोडकर अधिकतर पत्तेवाली सब्जियां; ग्वारफली, पत्तागोभी, मटर, फूलगोभी, टमाटर, बैगन, भिंडी, मिर्च, शिमलामिर्च और सब लतावर्गीय सब्जियां (उदा. सेम, कुंदरु, परवल, तुरई, खीरा); आलू, चुकंदर, गाजर, मूली, शकरकंद, रतालु, जूपरी आलू और सुथनी ये कंदवर्गीय सब्जियां; अनानास, पपीता, केला, चीकू और दाडिम (अनार) ये फलवृक्ष ।

३ अ ३ आ ३. सब्जी, कंदवर्गीय सब्जी तथा फलवृक्ष कब लगाएं ?

अधिकतर शाक (साग), बैगन, टमाटर और भिंडी कभी भी लगाए जा सकते हैं । लतावर्गीय (उदा. कुंदरु) और सेमवर्गीय (उदा. ग्वारफली) सब्जियां वर्षाऋतु के आरंभ में अथवा शीतऋतु के अंत में लगाएं । कंदवर्गीय सब्जियां (उदा. शकरकंद) और फलवृक्ष वर्षाऋतु आरंभ होने पर लगाएं ।’

– श्री. अविनाश जाधव, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा (मार्च २०२०)
३ अ ३ आ ४. आपातकाल की दृष्टि से सदनिका (फ्लैट) के छज्जे में तथा बरामदे में सब्जी और साग बोने के लिए मिट्टी के गमलों के स्थान पर अन्य साधनों का उपयोग करने की आवश्यकता

‘मिट्टी के गमलों में पेड लगाना’, पेड के विकास की दृष्टि से उत्तम है; परंतु मिट्टी के गमले उठाते-रखते समय टूट सकते हैं । आपातकाल में कब क्या होगा, यह कहा नहीं जा सकता । इसलिए ये गमले टूटने से होनेवाली हानि टालने के लिए मिट्टी के गमलों के स्थान पर टीन के पीपे; तेल के खाली डिब्बे; प्लास्टिक की बोरियां, थैलियां, डब्बे, चौडे टब आदि वैकल्पिक साधनों का उपयोग करना अधिक अच्छा है । इन वैकल्पिक साधनों में से अतिरिक्त पानी निकलने के लिए उनकी पेंदी से आधा इंच ऊपर समान अंतर पर २ – ३ छेद कर दें । पेंदी में छेद न करें; क्योंकि पेड की जडें उनसे निकल कर भूमि में जा सकती हैं ।’

– श्री. माधव रामचंद्र पराडकर, डिचोली, गोवा (२८.५.२०२०)
३ अ ३ आ ५. सदनिका के छज्जे में लगाई जानेवाली सब्जियां

‘छज्जेे में यदि ३ – ४ घंटे सूर्यप्रकाश आता होगा, तब वहां बैगन, टमाटर, मिर्च, धनिया आदि लगा सकते हैं । छज्जे में सूर्यप्रकाश थोडे समय के लिए ही आता हो, तो भी वहां अदरक बो सकते हैं ।

३ अ ३ आ ६. घर के बरामदे में लगाई जानेवाली सब्जियां, कंदवर्गीय सब्जियां और फलवृक्ष

सदनिका के छत में लगाई जानेवाली सब्जियां; अधिकतर साग; पत्ता गोभी, फूल गोभी, ग्वारफली, भिंडी आदि सब्जियां; कुंदरू समान लतावर्गीय सब्जियां; आलू, मूली, चुकंदर और गाजर ये कंदवर्गीय सब्जियां तथा अनानास ।

३ अ ३ आ ७. घर के परिसर में लगाई जानेवाली सब्जियां और कंदवर्गीय सब्जियां

सदनिका के छज्जे में और घर के बरामदे में लगाई जानेवाली सब्जियां; सेम आदि लतावर्गीय सब्जियां तथा शकरकंद, रतालु आदि कंदवर्गीय सब्जियां

३ अ ३ आ ८. घर के परिसर में लगाए जानेवाले फलवृक्ष

नींबू, केला, अमरूद, चीकू, पपीता, अनानास, सीताफल (सरीफा) और अंजीर ।

– श्री. अविनाश जाधव, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा (मार्च २०२०)
३ अ ३ इ. गाय-बैल पालना

दूध, गोमूत्र, गोबर, उपलियां आदि के लिए गाय तथा खेती, बैलगाडी आदि के लिए बैल उपयोगी है । गाय और बैल पालना, गाय दुहना, अस्वस्थता के समय उनकी देखभाल करना आदि के विषय में जानकार लोगों से सीख लें ।

३ अ ४. भोजन में वन्य शाकों का (वर्षाकाल में अपनेआप उगनेवाले शाक) उपयोग अभी से आरंभ करना

चकवड, भांगरा (भृंगराज), करमी (नाडीशाक), अपामार्ग जैसे अनेक वन्य शाकों का उपयोग आहार में किया जा सकता है । यदि वन्य शाकों के उपयोग के विषय में जानकारी न हो, तब इस विषय में जानकार लोगों से पूछें । कोल्हापुर के ‘निसर्ग मित्र (मोबाईल क्र. ९४२३८ ५८७११)’ नामक संस्था ने ‘औषधी रानभाज्या’ (औषधीय गुणोंवाली वन्य सब्जियां) यह मराठी ग्रंथ प्रकाशित किया है । उसमें ६१ वन्य सब्जियां तथा उनके औषधीय गुणों के संबंध में जानकारी छायाचित्रसहित दी है ।

वन्य सब्जियों के विषय में उपयुक्त जानकारी के लिए यहां क्लिक करें ।

(संदर्भ : सनातन की आगामी ग्रंथमाला ‘आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक पूर्वतैयारी’)

(प्रस्तुत लेखमाला के सर्वाधिकार (कॉपीराइट) ‘सनातन भारतीय संस्कृति संस्था’ के पास हैं ।)

संकलनकर्ता : (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले

भाग ३ पढने के लिए देखें । आपातकाल में आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक पूर्वतैयारी भाग – ३

बाह्य सूत्र (External links)

१. वन्य सब्जियों के विषय में उपयुक्त जानकारी

अ. Wild Vegetables

आ. Surviving in the Wild: 19 Common Edible Plants

इ. The Ultimate Army Field Guide to Wild Edible Plants

भाग ३ पढने के लिए देखें : ‘आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु पूर्वतैयारी भाग – ३’

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