घर के घर ही में करें बैंगन का रोपण
बैंगन के एक पौधे के लिए १५ से २० लीटर क्षमता का गमला पर्याप्त होता है । गमले की गहराई एक से सवा फुट होना आवश्यक है ।
बैंगन के एक पौधे के लिए १५ से २० लीटर क्षमता का गमला पर्याप्त होता है । गमले की गहराई एक से सवा फुट होना आवश्यक है ।
‘धनिया भले ही बीजों से होता है, तब भी इन बीजों को हमें किसी रोपवाटिका से खरीद कर लाने की आवश्यकता नहीं होती । अपनी रसोई में ही ये बीज होते हैं । धनिया बोने की विविध पद्धतियां हैं ।
भारत में केवल हिमाचलप्रदेश एवं कश्मीर, इन दो राज्यों में ही होनेवाला सेब, यह फल आज सर्व राज्यों में बारहों महीने उपलब्ध है । उसका वृक्ष कैसा होता है ? उसके पत्ते कैसे दिखाई देते हैं ? उसका बौर कैसा होता है ?
अदरक, यह उच्च प्रति की औषधीय गुणधर्म युक्त कंदवर्गीय फसल है । इसके नियमित सेवन से कई रोग दूर रहते हैं ।
मंदिर स्वच्छता के आयोजन हेतु स्थानिक धर्मप्रेमी श्रीमती आशा सोलंकी जी तथा मंदिर के पुरोहित जी ने विशेष सहायता की। समाज सहायता से और निस्वार्थ भाव से किए मंदिर स्वच्छता अभियान की अनेकों ने सराहना की। कडी धूप होते हुए भी महिलाओं का उत्साहपूर्ण सहभाग रहा।
स्थूल रूप से भारतीय वाद्यों की अपेक्षा पश्चिमी वाद्य अधिक प्रगतिशील प्रतीत होते हैं किंतु सूक्ष्म रूप से देखने पर उसका परिणाम अच्छा नहीं होता । एक कार्यक्रम में इसका प्रयोग किया गया था ।
आयुर्वेद में ‘अनुसुखं मर्दयेत्’ अर्थात ‘जिस पद्धति से रोगी को अच्छा लगेगा, उस पद्धति से मर्दन करें’, ऐसे बताया है ।
अबतक हमने इस लेखमाला में विविध आपदा एवं उनसे बचाव करने से संबंधित सूत्र देखे । इस लेख में इन सभी आपदाओं के संदर्भ में कुछ सामायिक सूचना हैं । उन्हें ध्यान में रखकर आपदा से पूर्व कुछ तैयारियां करना संभव होगा ।
भूमि में फॉस्फरस, यशद (जिंक), पोटैश, तांबे समान अनेक खनिज घटक होते हैं; परंतु ये घटक स्वयं ही वनस्पति को अन्न के रूप में उपलब्ध नहीं होते । केंचुए, इसके साथ ही भूमि के सूक्ष्म जीवाणु उन घटकों से अन्न निर्माण करते हैं और वनस्पतियों की जडों को देते हैं ।
श्रीराम नवमी के पावन पर्व पर परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मथुरा के राधानगर के राधेश्वर महादेव मंदिर में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए प्रार्थना की गई । इस अवसर पर मंदिर के प्रमुख श्री. महेश पांडे उपस्थित थे ।
