घर के घर में ही पौधों की निर्मिति कर रोपण कैसे करें ?
किसी पेड अथवा पौधे से नया रोप तैयार करने के लिए यह जानना महत्त्वपूर्ण है कि उस पेड का कौनसा भाग उपयोगी है । कुछ पौधे टहनियों से, कुछ बीजों से, कुछ जडों से, तो कुछ पत्तों से किए जा सकते हैं ।
किसी पेड अथवा पौधे से नया रोप तैयार करने के लिए यह जानना महत्त्वपूर्ण है कि उस पेड का कौनसा भाग उपयोगी है । कुछ पौधे टहनियों से, कुछ बीजों से, कुछ जडों से, तो कुछ पत्तों से किए जा सकते हैं ।
महामारी अर्थात अनेक लोगों को तथा जनसमुदाय को मरणोन्मुख करने हेतु गंभीर स्वरूप धारण किया हुआ रोग अथवा व्याधि । गावों में, जिलों में, राज्यों में, देश अथवा भूखंड में रहनेवाले सभी लोगों को ऐसी व्याधियों का सामना करना पडता है । किसी भी बीमारी अथवा व्याधि के कारणों का विभाजन सामान्य तथा असामान्य, इन दो वर्गाें में किया जाता है ।
कफ, गठिया, आमवात, सायटिका, सिरदर्द, सूजन, ज्वर, त्वचारोग – बच्छनाग (वत्सनाभ) पानी में घिसकर उसका लेप दें ।
केश पकना, त्वचा पर झुर्रियां पडना एवं वृद्धावस्था शीघ्र न आए, इस हेतु उपयोगी रसायन
विदेशी वास्तुशास्त्र में भवन के केवल टिकाऊपन पर बल दिया गया है; परंतु भारतीय वास्तुशास्त्र में टिकाऊपन के साथ-साथ उसमें रहनेवाले व्यक्ति, उसकी सोच और देवता के प्रति श्रद्धा का भी विचार किया गया है ।
धनी लोगों को अपने धन का बहुत गर्व होता है । वे धन के बल पर ऊंचे-ऊंचे भवन बनवाते हैं । ये भवन देखनेयोग्य होते हैं । परंतु, वहां से जानेवाले कुछ लोगों को यह भवन अद्भुत लगता है, तो कुछ को इससे इर्ष्या होती है ।
उदयकालीन सूर्य की किरणों का स्पर्श क्यों न होने दें ?, सूर्योदय एवं सूर्यास्त के संधिकाल में साधना करने का महत्त्व
सनातन निर्मित ग्रंथ : आदर्श दिनचर्या एवं अध्यात्मशास्त्र
नैवेद्य दिखाते समय सात्त्विक अन्न का नैवेद्य भावपूर्ण प्रार्थना करके भगवान को अर्पण करने पर उस नैवेद्य के पदार्थ की सात्त्विकता के कारण भगवान से प्रक्षेपित होनेवाली चैतन्य-लहरें नैवेद्य की ओर आकृष्ट होती हैं । इससे नैवेद्य के लिए अन्न बनाते समय उसमें देशी घी के समान सात्त्विक पदार्थाें का उपयोग किया जाता है ।
दीपक के कांच पर लगी हुई कालिख स्वच्छ करनी पडती है, तब ही दीपक का प्रकाश बाहर निकल सकता है । उसी प्रकार मंदिर की स्वच्छता करने से उस मंदिर का लाभ संपूर्ण समाज को होगा।