घर के घर ही में करें अदरक का रोपण !

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अदरक, यह उच्च प्रति की औषधीय गुणधर्म युक्त कंदवर्गीय फसल है । इसके नियमित सेवन से कई रोग दूर रहते हैं । अदरक चाय में डालकर अथवा इसका रस शहद एवं नीबू के साथ पीने में त्वचा स्वच्छ होने के साथ-साथ; वजन भी नियंत्रण में रहता है । ऐसी यह बहुगुणी अदरक हम अपने घर के बगीचे में भी लगा सकते हैं । एकदम छोटे-से बरामदे (बाल्कनी) में भी, छोटे से बगीचे में भी ! घर में नियमित लगनेवाली, कम परिश्रमवाली अदरक प्रत्येक को अपने घर में लगानी ही चाहिए ।

श्री. राजन लोहगांवकर

 

१. अदरक के रोपण करने का योग्य समय

यदि व्यावसायिक तत्त्वों पर लगानी हो, तो अदरक को अप्रैल के प्रथम पक्ष में लगाएं । एकदम देर ही हो जाए, तो दूसरे पक्ष में; परंतु उससे अधिक विलंब न करें । हम यदि एक-दो गमलों में ही अदरक लगानेवाले हों, तो उसे वर्षभर में कभी भी लगा सकते हैं ।

 

२. अदरक लगाने के लिए गमले का चयन

अदरक भूमि से लगभग ६ से ८ इंच पर ही होती है । इसलिए फुटभर गहरा गमला पर्याप्त होगा । अदरक आडी अधिक फैलती है इसलिए गमले का व्यास अधिक हो अथवा आयताकार हो । आम की लकडी की पेटी उत्तम होगी । अदरक को ऐसी पेटी में बढने के लिए भरपूर जगह और खुली हवा मिलेगी, जिससे वह भली-भांति बढेगी । अदरक मिट्टी में ही अधिक फैलती है, इसलिए मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए । अत: मिट्टी में सूखे पत्ते-घासफूस, गोबर की खाद एवं कंपोस्ट अधिक मात्रा में डालें । नीचे ईंट के टुकडे, ऊपर सूखे पत्ते और घास-फूस, उस पर कंपोस्ट अथवा गोबर की खाद, उस पर नीम के पत्तों की पतली सतह, ऊपर से थोडी मिट्टी और पुन: एक बार ऐसी ही सतह बनाकर गमला भरें । समीप ही नीम का पेड हो, तो उसके सूखे पत्ते सहज उपलब्ध होते हैं । ऐसे हरे अथवा सूखे हुए पत्तों का भरपूर मात्रा में उपयोग करने से खाद भी होगी औेर कीडे भी नहीं लगेंगे ।

(खाद अथवा कंपोस्ट के अभाव में जीवामृत का उपयोग करें । सूखे पत्तों पर जीवामृत छिडककर, उसके सडने पर तैयार ‘ह्यूमस’ (उर्वर मिट्टी) अदरक के रोपण के लिए अत्यंत पोषक होती है । ‘ह्यूमस’ अच्छी होने से और हम यदि नियमित सूखे पत्तों एवं घासफूस का आच्छादन कर जीवामृत दें, तब अन्य किसी भी खाद की आवश्यकता नहीं रहती । – संकलक)

 

३. अदरक का रोपण

हम सदैव हाट (बाजार) से जो अदरक लाते हैं, उनमें से आंखयुक्त अदरक के कुछ टुकडे हमें रोपण के लिए उपयोग करने होते हैं । इससे बीज लाने के लिए हमें कुछ नहीं करना पडता । ‘आंख’ अर्थात ‘अदरक के पृष्ठभाग पर जहां रेखा होगी और कुछ भाग फूला हुआ होगा’, वह भाग । छायाचित्र में गोल कर दिखाए अनुसार अदरक का उतना किल्लेयुक्त भाग निकालकर उसे गमले में गमले के आकार समान; परंतु किनार का २ – ३ इंच भाग छोडकर मिट्टी में २ से ढाई इंच गहरा लगाएं । लगाने के पश्चात इतना ही पानी डालें कि मिट्टी गीली हो जाए । हम अदरक का किल्ला युक्त भाग ही तोडकर लगाते हैं, इसलिए कोई न कोई भाग अदरक का खुला रह जाता है । इसलिए आरंभ के काल में अधिक पानी के कारण अदरक के सड जाने की संभावना होती है; इसलिए मिट्टी में नमी आने तक ही पानी डालें । उसके पश्चात भी पानी इसी पद्धति से डालें ।

 

४. धूप की आवश्यकता

अदरक को अधिक धूप की आवश्यकता नहीं होती । इसलिए दिनभर में २ से ढाई घंटे धूप मिलना भी काफी होता है । गमला संभवत: ऐसे स्थान पर सवेरे से दोपहर १२ बजे तक धूप मिले, ऐसे स्थान पर ही रखेंगे, तो उत्तम होगा ।

 

५. अदरक की खुदाई

अदरक बनाने के लिए सामान्यत: ६ – ७ माह लगते हैं । सोंठ बनाने के लिए अदरक का उपयोग किया जाता है, तो उसे ८ से १० माह में निकालना भी ठीक होगा; परंतु घरेलु उपयोग के लिए ६ – ७ माह में निकालें, अन्यथा अधिक से अधिक तंतू निर्माण होने से रस अल्प मिलता है । पत्ते पीले होना आरंभ हो जाएं, तो समझें कि अदरक बन चुकी है । अदरक के कुछ प्रकारों में कभी पौधों को फूल भी आते हैं । कली स्वरूप में ये फल किसी भुट्टे समान दिखाई देता है । घर ही में उपयोग करना हो, तो २ – ३ दिनों तक के लिए पर्याप्त हो, इतनी ही अदरक गमले से निकालें और शेष मिट्टी में ही वैसे ही रहने दें, इससे नए अंकुर आएंगे ।

 

६. पानी एवं खाद व्यवस्थापन

अप्रैल में अदरक आने पर आरंभ में ३ – ४ दिनों में पानी दें । तत्पश्चात वर्षा का पानी अदरक के लिए पर्याप्त होता है । वैसे मिट्टी सूखी लगे, तब ही पानी दें । हर १५ दिनों में एक बार कंपोस्ट, तो अगली बार गोबर की खाद दें । अर्थात एक बार कंपोस्ट तो १५ दिनों पश्चात गोबर की खाद ! बीच-बीच में यदि थोडी नीम के पत्ते डाले, तो अन्य किसी भी खाद की आवश्यकता ही नहीं रहती । नीमपेंड (अथवा नीम के पत्ते) का उपयोग करने से रोग भी नहीं लगते ।

 

७. अन्य सावधानी

वर्षा में सभी ओर कष्ट, अर्थात पत्ते खानेवाली सूंडियां (कीडे); परंतु उससे अदरक को किसी प्रकार की हानि नहीं होती । केवल हुमणी (भौंरे समान एक कीडा) इत्यादि नहीं है ना, यह बीच-बीच में देखते रहना है । अन्यथा एक बार लगाने के पश्चात ६ महिने तक झांककर देखने की भी आवश्यकता नहीं ।

 

८. अदरक में आंतरफसल

अदरक लगाने से लेकर उसे निकालने तक के काल में पृष्ठभाग पर स्थान खाली ही होता है । इसलिए इस काल में जिसे किसान आंतरफसल कहते हैं, वह उगा सकते हैं; अर्थात हरी सब्जियां अथवा टमाटर, बैंगन इत्यादि । इससे उतनी ही खाद-पानी में दो फसलों की पैदावार से भूमि, पानी एवं परिश्रम, इन सभी की बचत होती है ।’

– राजन लोहगांवकर, टिटवाळा (साभार : https://vaanaspatya.blogspot.com/)

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