संपूर्ण नागपंचमी पूजन विधि – मंत्र एवं अर्थ सहित
‘अपने कुटुंबियों की नागभय से सदासर्वकाल मुक्ति हो, इसके साथ ही नागदेवता का कृपाशीर्वाद प्राप्त हो’, इस हेतु प्रति वर्ष श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी को अर्थात नागपंचमी को नागपूजन किया जाता है ।
‘अपने कुटुंबियों की नागभय से सदासर्वकाल मुक्ति हो, इसके साथ ही नागदेवता का कृपाशीर्वाद प्राप्त हो’, इस हेतु प्रति वर्ष श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी को अर्थात नागपंचमी को नागपूजन किया जाता है ।
इसके साथ ही 9 भाषाओं में ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ सनातन संस्था के ‘यू-ट्यूब चैनल्स’ पर प्रसारित किया जाएगा । गुरुपरंपरा का महत्त्व समाजमन पर अंकित करने, समाज को साधना के लिए प्रेरित करने तथा धर्मनिष्ठ समाज की निर्मिति के लिए गुरुपूर्णिमा में सम्मिलित होइए, ऐसा आवाहन सनातन संस्था द्वारा किया गया है ।
संत ज्ञानेश्वरजी ने ज्ञानेश्वरी में ‘वारी’ यह शब्द ‘फेरा’, इस अर्थ से प्रयुक्त किया है । ‘यह वारी कब आरंभ हुई ?’, इस विषय में विद्वानों में मतभेद है । केवल इतना कहा जा सकता है कि ‘ज्ञानेश्वर महाराज ने ‘वारी’की महिमा में अत्यधिक वृद्धि की ।
श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ एवं उनके साथ महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के साधक गुट ने एक पंढरी की वारी का एवं उसमें होनेवाले रिंगण का चित्रीकरण किया ।
आषाढ एवं कार्तिक माह के शुक्लपक्ष में आनेवाली एकादशी के समय श्रीविष्णु का तत्त्व पृथ्वीवर अधिक मात्रा में आने से श्रीविष्णु से संबंधित ये दो एकादशियों का महत्त्व अधिक है ।
अनुक्रमणिका१. आपत्तियों का सखोल अध्ययन करना आवश्यक१ अ. आपत्कालीन घटना का स्वरूप और व्याप्ति समझकर लेना१ आ. आपत्कालीन सहायताकार्य करने के विषय में प्राधान्यक्रम निश्चित करना१ इ. पूर्वतैयारी के लिए घटनास्थल की भौगोलिक स्थिति का अंदाज लेना२. आपत्कालीन सहायता करने की पद्धति३. सहायताकार्य करनेवाले स्वयंसेवकों में आवश्यक गुण और कौशल४. आपत्कालीन सहायताकार्य के … Read more
हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य के पीछे परात्पर गुरु डॉ. आठवले जी की अद़्भुत शक्ति है । उनका मैं स्मरण करता हूं । हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन का आयोजन करनेवाले हिन्दू जनजागृति समिति के कार्यकर्ताओं को मैं आशीर्वाद देता हूं । भगवान ने जो दिया है, वह सर्व हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए समर्पित करें ।
ऐसा कहा जाता है कि तंजावुर में विश्व का सबसे बडा शिलालेख इसप्रकार लिखा गया है कि सीधे पढने पर रामायण और उलटा पढने पर महाभारत !
सनातनकी संत सदगुरु (कुमारी) स्वातीजी महाराष्ट्र के विविध जनपदों में प्रसारकार्य के लिए जाती हैं । सदगुरु (कुमारी) स्वातीजी के साथ से जो कुछ सीखा है, उसे यहां प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया है ।
भारत में भ्रमण करते समय हमने जिलास्तर पर ‘हिन्दू राष्ट्र अधिवेशनों’ का आयोजन किया । इस वर्ष कोरोना काल के उपरांत देश के ९ राज्यों के ३६ जिलों में ‘हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ आयोजित किए गए । उनमें २ सहस्र १०० स्थानीय हिन्दुत्वनिष्ठों ने अपना सहभाग प्रविष्ट किया है ।