
‘२९ जुलाई २०२६ को गुरुपूर्णिमा है । गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का यह दिवस शिष्य के लिए अविस्मरणीय होता है । इस दिन गुरुदेवजी का कृपाशीर्वाद तथा उनसे प्रक्षेपित होनेवाला शब्दातीत ज्ञान सामान्य की अपेक्षा सहस्रों गुना अधिक कार्यरत होता है । अतः गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में गुरुसेवा एवं धन का त्याग करनेवाले व्यक्ति को गुरुतत्त्व का सहस्रों गुना लाभ होता है ।
१. शिष्य के जीवन में गुरु का महत्त्व !
निर्गुण परमेश्वर का पृथ्वीतल पर कार्यरत सगुण रूप हैं गुरु ! गुरु शिष्य को ज्ञान प्रदान कर उसकी पारमार्थिक उन्नति होने हेतु अखंड परिश्रम उठाते हैं । इसलिए शिष्य के लिए गुरु के बिना अन्य कोई उपाय नहीं होता । शिष्य को गुरु को सबकुछ अर्पित कर उनकी सेवा करना, यही वास्तविक गुरुदक्षिणा होती है । उसके कारण शिष्य पर गुरुकृपा का प्रवाह अविरत बना रहता है ।
२. गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में गुरुकार्य हेतु अर्थात धर्मकार्य हेतु अर्पण दें !
इस गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में तन, मन एवं धन का अधिकाधिक त्याग कर गुरुदेवजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर सभी को प्राप्त हुआ है । अतः जिज्ञासु एवं शुभचिंतक धर्मप्रसार का कार्य कर तथा उसके लिए धन अर्पित कर गुरुपूर्णिमा का आध्यात्मिक स्तर पर लाभ लें ।
आजकल धर्मग्लानि का समय होने से ‘धर्मप्रसार का कार्य करना’, सर्वश्रेष्ठ साधना है । इसलिए धर्मप्रसार का कार्य करनेवाले संत, संस्था एवं संगठनों के कार्य हेतु धन का दान देना, काल के अनुसार आवश्यक है । सनातन संस्था अत्यंत निःस्वार्थ भाव से विगत अनेक वर्षाें से यह कार्य कर रही है । इसलिए अर्पणदाताओं द्वारा सनातन संस्था को दिए जानेवाले अर्पण का विनियोग निश्चित रूप से धर्मकार्य हेतु ही होनेवाला है ।
– श्री. वीरेंद्र मराठे, प्रबंधकीय न्यासी, सनातन संस्था.
| गुरुपूर्णिमा हेतु घर बैठे ‘ऑनलाइन’ अर्पण देने की सुविधा भी उपलब्ध है । उसके लिए Sanatan.org/donate लिंक पर जाएं !
अर्पण देने के इच्छुक व्यक्ति श्रीमती भाग्यश्री सावंत से 7058885610 क्रमांक पर अथवा [email protected] इस संगणकीय पते पर संपर्क करें । |
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