अभाविप के राष्ट्रीय अधिवेशन में सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति का सहभाग

परिषद की ओर से ६२वें राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन किया गया । इस अधिवेशन में सनातन संस्था व हिन्दू जनजागति समिति की ओर से राष्ट्र एवं धर्म संबंधी ग्रंथ-प्रदर्शनी तथा धर्मशिक्षा फलक लगाए गए ।

सामान्य जल एवं अभिमंत्रित जल से वायुमंडल पर होनेवाले प्रभाव का वैज्ञानिक परीक्षण

विकार-निर्मूलन हेतु विविध उपचार-पद्धतियां प्रचलित हैं । इनमें मंत्रोपचार से विकार ठीक करने की पद्धति भी भारत में प्राचीन काल से प्रचलित है । इस पद्धति का महत्त्व दर्शानेवाला वैज्ञानिक परीक्षण महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय ने २५.५.२०१६ को गोवा के सनातन आश्रम में किया ।

रेलमंत्री सुरेश प्रभु द्वारा सनातन की ग्रंथ-प्रदर्शनी का अवलोकन

यहां के प्रगति मैदान में विश्‍व पुस्तक मेले में सनातन के ग्रंथों की प्रदर्शनी लगाई गई । इस प्रदर्शनी का १०.१.२०१७ को केंद्रीय रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने अवलोकन किया ।

भाव एवं भाव के प्रकार

अधिकांश साधकों को देवता की आरती के समय अथवा गुरु / ईश्वर कास्मरण होने से अथवा उनके संदर्भ में अन्य किसी भी कारण से आंखों से पानी आता है । यह भाव के उपर्युक्त दिए गए आठ लक्षणों मेंसे ‘अश्रुपात’ यह लक्षण है ।

वैवाहिक जीवन आनंदमय होने के लिए क्या करना चाहिए ?

विवाह के कारण परिवारव्यवस्था से उत्पन्न बच्चों को सुसंस्कार, प्रेम एवं सुरक्षा मिलती है । किंतु, व्यभिचार से उत्पन्न संतति, इन सबसे वंचित रहती है ।

बदरीनाथ धाम में उगे इस चमत्कारिक पौधे से हैरत में पडे वैज्ञानिक !

जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए तैयार किए जा रहे डाटा बेस के तहत पहली बार विज्ञानियों ने बदरी तुलसी पर परीक्षण किया।

धार्मिक विधियोंमें पति एवं पत्नीद्वारा करने योग्य कृत्य

जानिये इन प्रश्नोंके उत्तर – किस विधिमें पत्नी पतिकी बाइं ओर बैठे ?, पतिके दाहिने हाथको हस्तस्पर्श करते समय पत्नी अपनी चार उंगलियोंसे स्पर्श करती है, अंगूठेसे क्यों नहीं ? और अन्य प्रश्नोंके उत्तर |

वैदिक पद्धतिसे विवाह क्यों करते है ?

पशुके स्तरपर न रहकर उच्चतम स्तरपर जाकर, विवाह जैसे रज-तमात्मक प्रसंगको भी सात्त्विक बनाकर, उन्हें अध्यात्मसे जोडकर देवताओंके कृपाशीर्वाद प्राप्त करनेका अवसर हिंदु धर्मने दिया है ।

विवाह संस्कार

‘विवाह’ जीवनका एक महत्त्वपूर्ण संस्कार है । धार्मिक संस्कारोंको केवल परंपरागत करनेकी अपेक्षा, उनके शास्त्रीय आधारको समझकर करना महत्त्वपूर्ण होता है । शास्त्रीय आधार समझनेसे वह संस्कार अधिक श्रद्धापूर्वक होता है ।