पाताल तक जाता है इस शिवलिंग पर चढाया गया जल, यहां लक्ष्मण को दिए थे महादेव ने दर्शन !

भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर अत्यंत रहस्यमय भी हैं। छत्तीसगढ़ के खरौद नगर में स्थित एक प्राचीन मंदिर में जिस शिवलिंग की पूजा की जाती है, उसके बारे में मान्यता है कि यहां से एक मार्ग पाताल तक जाता है।

नामजप संबंधी शंकानिरसन

‘नाम’ साधना की नींव है । ३३ करोड देवी-देवताओं में से कौन-सा जप करना चाहिए, नामजप में आनेवाली बाधाएं, गलत धारणाएं इत्यादि के विषय में प्रायोगिक प्रश्नोत्तर इसमें दिए हैं ।

आध्यात्मिक कष्ट क्यो होते है ?

साधना करते हुए सूक्ष्म की विविध शक्तियां साधक को कष्ट देती हैं । उसे साधना के परमार्थ पथ से परावृत्त करने हेतु वे प्रयत्नरत होते हैं । इस पर कौन-सा उपाय करें इत्यादि के विषय के प्रश्नोत्तर प्रस्तुत स्तंभ में अंतर्भूत हैं ।

कर्मकांड संबंधी शंकानिरसन

कर्मकांड साधना का प्राथमिक परंतु अविभाज्य भाग है । कर्मकांड में पालन करने योग्य विविध नियम, आचरण कैसे होना चाहिए, इस विषय में अनेक लोगों को जानकारी होती है; परंतु उसके पीछे का कारण और शास्त्र के विषय में हम अनभिज्ञ होते हैं ।

अध्यात्म संबंधी शंकानिरसन

गांव-गांव के जिज्ञासु और साधकों के मन में सामान्य तौर पर निर्माण होनेवाली अध्यात्मशास्त्र के सैद्धांतिक और प्रायोगिक भाग की शंकाओं का निरसन सनातन संस्था के प्रेरणास्रोत प.पू. डॉ. जयंत आठवलेजी ने किया है ।

गंगा तट पर आकर मेरी हज यात्रा पूर्ण हुर्इ : तारिक फतेह

देवबंद पर हमला बोलते हुए तारि‍क ने कहा कि, उनके मदरसों को जिस मोहम्मद गजनी लूटा वह उसकी विचारधारा पर चलते हैं। आज दुनिया के मुसलमानों को मुल्लाओं के इस्लाम की बजाए अल्लाह के इस्लाम पर चलने की जरूरत है।

रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में अनेक स्थानों पर अपनेआप बने ॐ का अस्पष्ट दिखाई देना

रामनाथी, गोवा स्थित सनातन आश्रम के विविध स्थानों पर अपनेआप बने ॐ चिन्हों का अस्पष्ट दिखाई देना और इस अस्पष्टता का कार्य-कारण विचार

रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम की सूक्ष्म-जगत् की प्रदर्शनी देखकर जिज्ञासुओं द्वारा प्राप्त अभिप्राय

सूक्ष्म जगत् की प्रदर्शनी देखकर यह प्रतीत हुआ कि, वर्तमान में वातावरण की अनिष्ट शक्तियों का प्रभाव सर्वत्र हो रहा है ।

यहां फेरे लेकर भगवान शिवजी ने किया था माता पार्वती से विवाह, आज भी जल रही वो अग्नि

भगवान शिवजी को पत‌ि रूप में पाने के ल‌िए देवी पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। देवी पार्वती की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने उनके विवाह के प्रस्ताव को स्वीकार कर दिया। भगवान शिवजी और देवी पार्वती का विवाह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हुआ था।

सनातन-प्रकाशित ग्रंथों के कारण लोग धर्माचरण निरंतर कर पाएंगे ! – स्वामी प्रणवानंदजी महाराज

हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक पू. चारुदत्त पिंगळेजी ने यहां के मार्कंडेय आश्रम के प्रमुख स्वामी प्रणवानंदजी महाराजजी से ४ जनवरी को नर्मदा तट पर स्थित मार्कंडेय आश्रम में भेंट की।