झारखंड स्थित विश्वविख्यात श्री छिन्नमस्तिका देवी का अति प्राचीन मंदिर !

झारखंड की राजधानी रांची से ८० किलोमीटर दूर रामगढ जनपद के रजरप्पा गांव में श्री छिन्नमस्तिका देवी का विश्वविख्यात मंदिर है । भारत के अनेक प्राचीन मंदिरों में एक  यह मंदिर, भैरवी तथा दामोदर इन नदियों के संगम पर स्थित है ..

चंडीविधान (पाठ एवं हवन)

श्री दुर्गादेवी का एक नाम है चंडी । मार्कडेय पुराण में चंडी देवी का माहात्म्य बताया गया है, जिसमें उसके अवतारों का एवं पराक्रमों का विस्तार से वर्णन किया गया है ।

आद्याशक्ति

महाकाली ‘काल’ तत्त्व का, महासरस्वती ‘गति’ तत्त्व का एवं महालक्ष्मी ‘दिक्’ (दिशा) तत्त्व का प्रतीक है । काल के प्रवाह में सर्व पदार्थों का विनाश होता है ।

कुदृष्टि उतारने की पद्धति का अध्यात्मशास्त्रीय आधार एवं अनुभूतियां

प्रार्थना के कारण देवता के आशीर्वाद से कुदृष्टिग्रस्त व्यक्ति की देह के भीतर और बाहर के कष्टदायक स्पंदन अल्पावधि में कार्यरत होकर कुदृष्टि उतारने हेतु उपयुक्त घटकों में घनीभूत होकर, तदुपरांत अग्नि की सहायता से अल्पावधि में नष्ट किए जाते हैं ।

पितरों का ‘वार्षिक श्राद्ध’ और ‘पितृपक्ष में महालय श्राद्ध’ दोनों क्यों करना चाहिए ?

प्रत्येक कार्य विशिष्ट तिथि अथवा मुहूर्त पर करना विशेष लाभदायक है; क्योंकि उस दिन उन कर्मों का कालचक्र, उनका प्रत्यक्ष होना तथा उनका परिणाम, इन सभी के स्पंदन एक-दूसरे के लिए सहायक होते हैं ।

अखंड हरिनाम सप्ताह के उपलक्ष्य में कल्याण में सनातन संस्था की ग्रंथ तथा तथाफ्लेक्स प्रदर्शनी

श्री विठ्ठल-रुक्मिणी महिला भजनी मंडल की ओर से आयोजित अखंड हरिनाम सप्ताह के उपलक्ष्य में ९ तथा १० सितम्बर कोसनातन संस्था की ग्रंथ प्रदर्शनी तथा फ्लेक्स प्रदर्शनी आयोजित की गई थी ।

ईश्वर के प्रति उत्कट भाव तथा तमिळनाडु के हिन्दूत्वनिष्ठों का आधारस्तंभ होनेवाली चेन्नई की साधिका श्रीमती उमा रविचंद्रन् सनातन के ७० वे समष्टि संतपद पर विराजमान !

श्रीकृष्ण के प्रति उत्कट भाव होनेवाली चेन्नई की सनातन की साधिका श्रीमती उमा रविचंद्रन् ने ७१ प्रतिशत स्तर प्राप्त किया है । इस दिन सनातन के सुवर्णमय इतिहास में उनके ७० वी समष्टि संत के रूप में विराजमान होने की आनंददायी घोषणा की गई |

वटसावित्री व्रत एवं व्रत का उद्देश्य

सावित्रीको अखंड सौभाग्यका प्रतीक माना जाता है । सावित्री समान अपने पतिकी आयुवृद्धिकी इच्छा करनेवाली सुहागिनोंद्वारा यह व्रत किया जाता है । यह एक काम्यव्रत है । किसी कामना अथवा इच्छापूर्तिके लिए किया जानेवाला व्रत काम्यव्रत कहलाता है ।

मध्यप्रदेश में गणेशोत्सव के निमित्त सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा धर्मशिक्षा के माध्यम से प्रबोधन

 श्री गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर यहां के एसआरसी केबल पर सनातन संस्था निर्मित धार्मिक कृति के पीछे का शास्त्र और ईश्‍वरप्राप्ति हेतु अध्यात्मशास्त्र सत्संग श्रृंखला का प्रसारण किया जा रहा है । दिन में दो बार इस सत्संग श्रृंखला का प्रसारण होता है ।

सूर्य षष्ठी (छठ) पूजा

हमारे देशमें सूर्योपासनाके लिए प्रसिद्ध पर्व है छठ । मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होनेके कारण इसे छठ कहा गया है । यह पर्व वर्षमें दो बार मनाया जाता है ।