ज्योतिर्मय काशी (उत्तरप्रदेश) की श्री ब्रह्मचारिणी देवी

काशी के दुर्गाघाट पर श्री ब्रह्मचारिणी देवी का मंदिर है । शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन श्री ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा की जाती है । देवी के प्रति श्रद्धालुओं का विश्वास है कि ‘इस देवी के दर्शन से परब्रह्म की प्राप्ति होती है |

हिन्दुओं पर होनेवाले धर्मांधों के बढ रहे आक्रमणों के अन्वेषण के लिए विशेष दल की स्थापना करें ! – हिन्दूत्वनिष्ठ

उत्तरप्रदेश में गत कुछ दिनों से धर्मांधों द्वारा मंदिरों में बलपूर्वक प्रवेश कर प्रतिमाओं का अनादर करना, तोडफोड करना, हिन्दुओं के घरों पर आक्रमण करना, हिन्दुओं की शोभायात्राओं पर पथराव करना इत्यादि घटनाएं बढ रही हैं ।

चतु:श्रृंगी मंदिर (पुणे) में सनातन की भव्य प्रदर्शनी !

प्रतिवर्ष नुसार यहां का जागृत देवस्थान चतु:श्रृृंंगी देवीमंदिर के प्रांगण में सनातन संस्था द्वारा ग्रंथ तथा सात्त्विक उत्पादनों की भव्यप्रदर्शनी आयोजित की गई है ।

सनातन संस्था के ग्रंथ समाज को दिशादर्शक ! – मयुर घोडके, शिवसेना

श्री दुर्गामाता मंदिर के सामने सनातन द्वारा आयोजित ग्रंथप्रदर्शनी का अनावरण शिवसेना शहरप्रमुख श्री. मयुर घोडके के हाथों किया गया । उस समय उन्होंने यह वक्तव्य किया कि, ‘समाज को आज अध्यात्म तथा धर्म की अत्यंत आवश्यकता है ।

देवी का महत्त्व !

कुलदेवी, ग्रामदेवी, शक्तिपीठ आदि रूपों में देवी के विविध सगुण रूपों की उपासना की जाती है । हिन्दू संस्कृति में जितना महत्त्व देवता का है उतना ही महत्त्व देवी को भी दिया जाता है,

५१ शक्तिपिठों मेंसे एक श्रीक्षेत्र काशी (उत्तरप्रदेश) की श्री बंदीदेवी

श्रीक्षेत्र काशी के दशाश्वमेध किनारे पर श्री बंदीदेवी का मंदिर है । यह देवी ५१ शक्तिपिठों मेंसे एक है । देवी के दायी ओर वेणीमाधव, बायी ओर दो मारुति, अक्षत वड, वासुकी(नाग) तथा बीच में प्रयागेश्वर की प्रतिमा हैं ।

शक्तिदेवता !

इस वर्ष की नवरात्रि के उपलक्ष्य में हम देवी के इन ९ रूपों की महिमा समझ लेते हैं । यह व्रत आदिशक्ति की उपासना ही है !

झारखंड स्थित विश्वविख्यात श्री छिन्नमस्तिका देवी का अति प्राचीन मंदिर !

झारखंड की राजधानी रांची से ८० किलोमीटर दूर रामगढ जनपद के रजरप्पा गांव में श्री छिन्नमस्तिका देवी का विश्वविख्यात मंदिर है । भारत के अनेक प्राचीन मंदिरों में एक  यह मंदिर, भैरवी तथा दामोदर इन नदियों के संगम पर स्थित है ..

चंडीविधान (पाठ एवं हवन)

श्री दुर्गादेवी का एक नाम है चंडी । मार्कडेय पुराण में चंडी देवी का माहात्म्य बताया गया है, जिसमें उसके अवतारों का एवं पराक्रमों का विस्तार से वर्णन किया गया है ।

आद्याशक्ति

महाकाली ‘काल’ तत्त्व का, महासरस्वती ‘गति’ तत्त्व का एवं महालक्ष्मी ‘दिक्’ (दिशा) तत्त्व का प्रतीक है । काल के प्रवाह में सर्व पदार्थों का विनाश होता है ।