राष्ट्रीय पुस्तक मेले में सनातन संस्था की ग्रंथ-प्रदर्शनी को उत्साही प्रतिसाद
वाराणसी (उत्तरप्रदेश) – यहां आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में सनातन संस्था की ओर से दस दिवसीय ग्रंथ-प्रदर्शनी लगाई गई । इस प्रदर्शनी का लाभ अनेक जिज्ञासुआें ने उठाया ।
वाराणसी (उत्तरप्रदेश) – यहां आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में सनातन संस्था की ओर से दस दिवसीय ग्रंथ-प्रदर्शनी लगाई गई । इस प्रदर्शनी का लाभ अनेक जिज्ञासुआें ने उठाया ।
हिन्दू जनजागृति समिति के केंद्रीय समन्वयक श्री. नागेश गाडे ने प्रतिपादित किया कि प्रत्येक हिन्दू संगठक कार्यकर्ता को स्वयं, स्वयं के परिवार, स्वयं के संगठन से आदर्श कृत्य का आरंभ करना चाहिए ।
श्री तनोटमाता मंदिर, राजस्थान राज्य के जैसलमेर जनपद से १३० किलोमीटर दूर थार मरुस्थल (रेगिस्तान) में भारत-पाकिस्तान की सीमा पर स्थित है । भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय हुई अद्भुत घटनाओं के कारण यह मंदिर विख्यात है ।
काशी के दुर्गाघाट पर श्री ब्रह्मचारिणी देवी का मंदिर है । शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन श्री ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा की जाती है । देवी के प्रति श्रद्धालुओं का विश्वास है कि ‘इस देवी के दर्शन से परब्रह्म की प्राप्ति होती है |
उत्तरप्रदेश में गत कुछ दिनों से धर्मांधों द्वारा मंदिरों में बलपूर्वक प्रवेश कर प्रतिमाओं का अनादर करना, तोडफोड करना, हिन्दुओं के घरों पर आक्रमण करना, हिन्दुओं की शोभायात्राओं पर पथराव करना इत्यादि घटनाएं बढ रही हैं ।
प्रतिवर्ष नुसार यहां का जागृत देवस्थान चतु:श्रृृंंगी देवीमंदिर के प्रांगण में सनातन संस्था द्वारा ग्रंथ तथा सात्त्विक उत्पादनों की भव्यप्रदर्शनी आयोजित की गई है ।
श्री दुर्गामाता मंदिर के सामने सनातन द्वारा आयोजित ग्रंथप्रदर्शनी का अनावरण शिवसेना शहरप्रमुख श्री. मयुर घोडके के हाथों किया गया । उस समय उन्होंने यह वक्तव्य किया कि, ‘समाज को आज अध्यात्म तथा धर्म की अत्यंत आवश्यकता है ।
कुलदेवी, ग्रामदेवी, शक्तिपीठ आदि रूपों में देवी के विविध सगुण रूपों की उपासना की जाती है । हिन्दू संस्कृति में जितना महत्त्व देवता का है उतना ही महत्त्व देवी को भी दिया जाता है,
श्रीक्षेत्र काशी के दशाश्वमेध किनारे पर श्री बंदीदेवी का मंदिर है । यह देवी ५१ शक्तिपिठों मेंसे एक है । देवी के दायी ओर वेणीमाधव, बायी ओर दो मारुति, अक्षत वड, वासुकी(नाग) तथा बीच में प्रयागेश्वर की प्रतिमा हैं ।
इस वर्ष की नवरात्रि के उपलक्ष्य में हम देवी के इन ९ रूपों की महिमा समझ लेते हैं । यह व्रत आदिशक्ति की उपासना ही है !