हिन्दुत्व का सच्चा कार्यकर्ता बनने के लिए अध्यात्म सीखें तथा साधना करें ! – श्री. चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था
आजकल हिन्दुत्व का कार्य करनेवाले कार्यकर्ताआें को हिन्दू धर्म में विद्यमान अध्यात्म का कोई ज्ञान नहीं होता ।
आजकल हिन्दुत्व का कार्य करनेवाले कार्यकर्ताआें को हिन्दू धर्म में विद्यमान अध्यात्म का कोई ज्ञान नहीं होता ।
आनेवाली विजयादशमी को हम सभी अन्याय, अधर्म, अंधकार से मुक्ति देनेवाले धर्माधिष्ठित और प्रकाशमान हिन्दू राष्ट्र स्थापना के लिए सीमोल्लंघन का निश्चय करेंगे ।
केरल के त्रिचूर जिले में सनातन की ओर से जिज्ञासुआें के लिए व्याख्यान लिया गया ।
परात्पर गुुरु डॉ. आठवलेजी को दीर्घायु प्राप्त हो, हिन्दू राष्ट्र स्थापना के व्यापक कार्य में अनिष्ट शक्तियों द्वारा उत्पन्न बाधाएं दूर हों तथा आध्यात्मिक कष्टों से साधकों की रक्षा हो; इसके लिए रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में १४ अक्टूबर को तीसरा पंचमुखी हनुमानकवच यज्ञ संपन्न हुआ ।
आनंदी जीवन के लिए साधना की प्रमुख नींव स्वभावदोष तथा अहंनिर्मूलन प्रक्रिया कैसे और क्यों अपनानी चाहिए ?, इस विषय में मार्गदर्शन किया ।
भाईयो और बहनो, दीवाली में विद्युत चीनी दीये और मोम के दीयों को दूर रखें, तिल का तेल और कपास की बाती डालकर मिट्टी के पारंपरिक दीये लगाकर उनका आध्यात्मिक स्तर पर लाभ उठाएं !’
भगवान को प्रिय दास्यभक्ति का सर्वोच्च आदर्श एवं रामराज्य की स्थापना में बडा सहभाग रहनेवाले हनुमानजी व्यष्टि एवं समष्टि साधना का अपूर्व संगम ही है !
दूध पूर्णान्न है; क्योंकि दूध को सगुण चैतन्य का स्रोत माना गया है । जो घटक सत्त्वगुण के माध्यम से कार्य कर दूसरों के लिए कल्याणकारी सिद्ध होते हैं, उन्हें ‘सात्त्विक’ कहा जाता है ।
तरकारी धोनेके उपरांत काटना आरंभ करें । उसे जलसे धोते समय उसमें कुछ मात्रामें सात्त्विक अगरबत्तीकी विभूति मिलाएं । तरकारी अधिक समयतक पानीमें भिगोए रखनेसे उसमें विद्यमान ‘ब’ और ‘क’ जीवसत्त्व घटते हैं ।
आजकल सभी स्थानोंपर काली शक्तिका आवरण बढ गया है । इसलिए घरके अनाजपर भी आवरण आता है । उनपर आवरण न आए, इसलिए घरमें रखे अनाजके संग्रहके निकट किसी देवताकी सात्त्विक नामजप-पट्टी रखें ।