’झी-२४ तास’ वृत्त्तवाहिनी पर ’रोखठोक’ कार्यक्रम में ’ईश्वर को कपडों की अलर्जी’ विषय पर चर्चासत्र में सनातन का सहभाग

हाल-ही में पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान समिति द्वारा मंदिरप्रवेश के समय अपर्याप्त कपडे परिधान न करने के विषय में लिए गए निर्णय के अनुषंंग से यह चर्चासत्र आयोजित किया गया था ।

रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में हनुमान कवच संपन्न !

अडचनें दूर होने तथा साधकों की रक्षा होने हेतु यहां के सनातन आश्रम में ६ अक्तूबर को ’पंचमुखी हनुमानकवच’ यज्ञ संपन्न हुआ ।

कुछ प्रश्न एवं उनके उत्तर

जब कान और नाक के छेदन से पीडा (दु:ख) होती है, तब भी कोई बालिका क्यों छेदन के लिए मान जाती है ? अथवा माता प्रसूतिवेदना भोगने के लिए क्यों तैयार हो जाती है ? आदि प्रश्नों के उत्तर

आनंद कैसे प्राप्त करें ?

जो असीमित एवं अनंत है, वही खरे सुख का अर्थात आनंद का उद्गम स्थान होता है । वह चिरकालीन आनंद देता है और दुःख से हमें सदा के लिए छुटकारा दिलाता है ।’ हम अशाश्वत (अथवा अनित्य) विषयों से आनंद पाने का प्रयत्न करते हैं । अशाश्वत (अथवा अनित्य) विषय सीमित अथवा परिवर्तनशील होते हैं, इस कारण उन बातों में स्थायी सुख नहीं होता ।

सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने की मांग शुद्ध ढोंगबाजी !

पुरो (अधो) गामी लोग एवं प्रसारमाध्यमों द्वारा ’सनातन पर प्रतिबंध लगाएं ’ इस प्रकार निराधार अफवाहें फैलाई जा रही हैंं । ’इंडिया टुडे’ के श्री. उदय माहुरकर ने इन सब पर कडा जबाब देनेवाला लेख लिखा है, जिसके चुनिंदे सूत्र वाचकों के लिए साभार प्रकाशित कर रहे हैं ।

बेंगलुरू के ‘प्रथम कन्नड साहित्य सम्मेलन’ में सनातन के ग्रंथों की प्रदर्शनी

राजराजेश्वरी नगर में ३० सितंबर को ‘प्रथम कन्नड साहित्य सम्मेलन’ आयोजित किया गया था । इस सम्मेलन में सनातन संस्था की ओर से ग्रंथप्रदर्शनी लगाई गई ।

सनातन संस्था की सहायता के लिए सदैव सिद्ध हूं ! – श्री. प्रशांत सातव, भाजपा

सनातन का कार्य अच्छा है । आप को कभी भी सहायता की आवश्यकता पडी, तो मैं सहायता के लिए सदैव सिद्ध हूं । भाजपा के श्री. प्रशांत सातव ने ऐसा प्रतिपादित किया ।

सनातन संस्था धर्मशास्त्र बताकर समाज का उद्बोधन करती है ! – श्रीमती नयना भगत, सनातन संस्था

सनातन संस्था ‘आदर्श गणेशोत्सव कैसे मनाएं ?’, साथ ही शास्त्र के अनुसार श्री गणेशपूजन तथा विसर्जन कैसे करना चाहिए ?, इस विषय में उद्बोधन करती है । श्री गणेशजी की मूर्ति प्लास्टर ऑफ पैरिस की न होकर शाडू मिट्टी की होनी चाहिए, यह हमारा मत है ।

गुरुदेवजी के प्रति अचल श्रद्धा रखनेवाले सनातन के ७वें संत पू. पद्माकर होनपजी (आयु ७० वर्ष) की साधनायात्रा

मेरा बचपन गांव में बीत गया । मैं जब ७-८ वर्ष का था, तभी मेरे पिताजी का देहांत हुआ । मां, दादी, ३ बडे भाई, मैं और बहन इतने लोग नान्नज के घर में रहते थे । हमने ७वीं कक्षातक की पढाई वहीं पूर्ण की ।