विद्युत दीप से युक्त प्लास्टिक का दीया और मोम का दीया जलाने से वातावरण में नकारात्मक स्पंदन प्रक्षेपित होते हैं, जबकि तिल का तेल और कपास की बाती लगे मिट्टी के पारंपरिक दीये से सकारात्मक स्पंदन प्रक्षेपित होते हैं !

भाईयो और बहनो, दीवाली में विद्युत चीनी दीये और मोम के दीयों को दूर रखें, तिल का तेल और कपास की बाती डालकर मिट्टी के पारंपरिक दीये लगाकर उनका आध्यात्मिक स्तर पर लाभ उठाएं !’ 

रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में पंचमुखी हनुमानकवच यज्ञ संपन्न !

भगवान को प्रिय दास्यभक्ति का सर्वोच्च आदर्श एवं रामराज्य की स्थापना में बडा सहभाग रहनेवाले हनुमानजी व्यष्टि एवं समष्टि साधना का अपूर्व संगम ही है !

रसोई के संदर्भ में पुछे जानेवाले प्रश्न

दूध पूर्णान्न है; क्योंकि दूध को सगुण चैतन्य का स्रोत माना गया है । जो घटक सत्त्वगुण के माध्यम से कार्य कर दूसरों के लिए कल्याणकारी सिद्ध होते हैं, उन्हें ‘सात्त्विक’ कहा जाता है ।

तरकारी काटनेकी उचित पद्धति

तरकारी धोनेके उपरांत काटना आरंभ करें । उसे जलसे धोते समय उसमें कुछ मात्रामें सात्त्विक अगरबत्तीकी विभूति मिलाएं । तरकारी अधिक समयतक पानीमें भिगोए रखनेसे उसमें विद्यमान ‘ब’ और ‘क’ जीवसत्त्व घटते हैं ।

घरमें संग्रहित अनाजकी आध्यात्मिक देखभाल कैसे करें ?

आजकल सभी स्थानोंपर काली शक्तिका आवरण बढ गया है । इसलिए घरके अनाजपर भी आवरण आता है । उनपर आवरण न आए, इसलिए घरमें रखे अनाजके संग्रहके निकट किसी देवताकी सात्त्विक नामजप-पट्टी रखें ।

’झी-२४ तास’ वृत्त्तवाहिनी पर ’रोखठोक’ कार्यक्रम में ’ईश्वर को कपडों की अलर्जी’ विषय पर चर्चासत्र में सनातन का सहभाग

हाल-ही में पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान समिति द्वारा मंदिरप्रवेश के समय अपर्याप्त कपडे परिधान न करने के विषय में लिए गए निर्णय के अनुषंंग से यह चर्चासत्र आयोजित किया गया था ।

रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में हनुमान कवच संपन्न !

अडचनें दूर होने तथा साधकों की रक्षा होने हेतु यहां के सनातन आश्रम में ६ अक्तूबर को ’पंचमुखी हनुमानकवच’ यज्ञ संपन्न हुआ ।

कुछ प्रश्न एवं उनके उत्तर

जब कान और नाक के छेदन से पीडा (दु:ख) होती है, तब भी कोई बालिका क्यों छेदन के लिए मान जाती है ? अथवा माता प्रसूतिवेदना भोगने के लिए क्यों तैयार हो जाती है ? आदि प्रश्नों के उत्तर

आनंद कैसे प्राप्त करें ?

जो असीमित एवं अनंत है, वही खरे सुख का अर्थात आनंद का उद्गम स्थान होता है । वह चिरकालीन आनंद देता है और दुःख से हमें सदा के लिए छुटकारा दिलाता है ।’ हम अशाश्वत (अथवा अनित्य) विषयों से आनंद पाने का प्रयत्न करते हैं । अशाश्वत (अथवा अनित्य) विषय सीमित अथवा परिवर्तनशील होते हैं, इस कारण उन बातों में स्थायी सुख नहीं होता ।

सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने की मांग शुद्ध ढोंगबाजी !

पुरो (अधो) गामी लोग एवं प्रसारमाध्यमों द्वारा ’सनातन पर प्रतिबंध लगाएं ’ इस प्रकार निराधार अफवाहें फैलाई जा रही हैंं । ’इंडिया टुडे’ के श्री. उदय माहुरकर ने इन सब पर कडा जबाब देनेवाला लेख लिखा है, जिसके चुनिंदे सूत्र वाचकों के लिए साभार प्रकाशित कर रहे हैं ।