गुरुकृपायोग एवं अन्य साधनामार्गों के बारे में कुछ प्रश्न

किसी भी योग से साधना करने पर स्थूल एवं प्राणदेह की अधिकतम शुद्धि २० से ३० प्रतिशत हो सकती है । अत: इन देहों का त्याग किए बिना स्वर्गलोक अथवा अगले लोकों में प्रवेश नहीं किया जा सकता । गुरुद्वारा बताई गई साधना करने से साधना में बाधाएं अल्प आती हैं । इससे साधना में शीघ्र उन्नति होती है ।

गुरुकृपायोग से शीघ्र आध्यात्मिक उन्नति होने के कारण

गुरुकृपायोग के मूल्य जीव को सेवाभाव से अहं अल्प करने के लिए विशिष्ट स्तर पर चैतन्य प्रदान कर ‘समष्टि साधना से व्यष्टि साधना की अपेक्षा अहं न्यून होने में शीघ्र सहायता मिलती है’, इसकी शिक्षा देते हैं ।’ अहं नष्ट करने के लिए गुरुकृपा की आवश्यकता होती है आैर इसलिए ‘गुरुकृपायोग’ सर्व योगों में श्रेष्ठ योग है ।

प्रार्थना किसे कहते हैं एवं उससे क्या लाभ होता है ?

उषःकाल में प्रार्थना की कुंजी से दिन का द्वार खोलें और रात को प्रार्थना की कुंडी डालकर उसे बंद कर लें’, ऐसा सुवचन है ।यह वैज्ञानिक प्रयोगोंद्वारा भी सिद्ध हो गया है कि प्रार्थना से व्यक्ति को व्यावहारिक एवं आध्यात्मिक लाभ होते हैं ।

हिन्दू संस्कृति की रक्षा हेतु धर्माचरण तथा साधना की आवश्यकता ! – कु. पूनम शर्मा, सनातन संस्था, विलासपुर

आज जनता को अपनी छोटी-छोटी मांगों के लिए भी आंदोलन चलाने पडते हैं । राजनेता भ्रष्ट हो चुके हैं । शिक्षा का बाजारीकरण हो चुका है ।

सनातन के रामनाथी, गोवा के आश्रम के ध्यानमंदिर में दीपों की विशेषतापूर्ण सजावट

संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वरजी के कथनानुसार दीप चाहे जितना भी छोटा हो; परंतु उसमें संपूर्ण कक्ष को प्रकाशमान करने का सामर्थ्य होता है ।