प्रार्थना के उदाहरण – भाग २

विविध कार्यक्षेत्रों से संबंधित व्यक्तियों के लिए उपयुक्त विशेष प्रार्थनाएं

१. विद्यार्थी

अ. पढाई प्रारंभ करने से पूर्व और पढाई करते समय नियमित अंतराल पर प्रार्थना करें – हे श्री गणपति और श्री सरस्वतीदेवी, मेरी पढाई में आनेवाली बाधाएं दूर होने दीजिए । मेरा मन पढाई में एकाग्र होने दीजिए । मैं जो पढाई कर रहा हूं, उसे मुझे भली-भांति ग्रहण होने दीजिए और उचित समय पर मुझे उसका स्मरण करवाइए ।

आ. कक्षा में पहुंचने पर : हे भगवन्, शिक्षकों में मुझे आपका ही रूप दिखाई दे और कक्षा में सिखाए जानेवाले सर्व विषयों का ज्ञान मैं एकाग्रतापूर्वक ग्रहण कर पाऊं ।

इ. अन्य प्रार्थनाएंं

१. हे ईश्वर, मुझे सदैव अच्छे कर्म करने हेतु सहायता कीजिए और बुराइयों से दूर रखिए ।

२. मुझे सभी छोटे-बडों का आदर करना सिखाइए ।

३. मुझे अपने देश और धर्म के प्रति प्रेम अनुभव होने दीजिए ।

२. कार्यालयीन कर्मचारी

अ. हे प्रभु, कार्यालयीन काम करते समय मेरे सहयोगी, ग्राहकवर्ग इत्यादि के विषय में मेरे मन में केवल प्रेम ही रहने दीजिए ।

आ. सत्यनिष्ठा से (ईमानदारी से) सेवा करना, मेरा धर्म है । मुझसे सदैव प्रामाणिकता से सेवा करवा लीजिए ।

३. निर्माण-कार्य अभियंता

अ. हे स्थानदेवता, आपकी कृपा से यह निर्माण-कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण होने दीजिए । आगे इस वास्तु में आपकी कृपा से पवित्रता बनी रहने दीजिए ।

आ. हे भगवन्, यह निर्माण-कार्य करते समय ‘मैं देवालय का ही निर्माण-कार्य कर रहा हूं’, ऐसा मेरा भाव रहने दीजिए ।

४. श्रमिक

अ. हे प्रभु, यह काम करते समय दुर्घटना, चोट आदि से मेरी रक्षा कीजिए ।

आ. हे भगवन्, आपका नामजप करते हुए काम करते समय मुझे अपने परिश्रम का विस्मरण होने दीजिए ।

५. किसान

अ. हे भूमिमाता, फसल काटते समय मुझसे आप पर जाने-अनजाने होनेवाले आघातों के लिए आप मुझे क्षमा कर दीजिए ।

आ. हे वरुणदेवता, आपकी कृपा से खेती को (फसलों को) आवश्यक मात्रा में जल मिलने दीजिए ।

इ. हे भगवन्, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, धान को लगनेवाले कीटक इत्यादि से धान की रक्षा कीजिए ।

६. चिकित्सक (डॉक्टर)

अ. हे धन्वंतरिदेवता, आप ही मेरे माध्यम से रोगियों पर उचित उपचार कीजिए ।

आ. हे प्रभु, रोगियों की सेवा आप ही की सेवा है । वह उचितरूप से होने हेतु मुझ में प्रेमभाव तथा सेवाभाव बढाइए ।

७. अधिवक्ता (वकील)

अ. हे न्यायदेवता, अन्याय से पीडित लोगों को न्याय दिलाने हेतु आप ही मेरी सहायता कीजिए ।

आ. लोभवश मुझसे कोई भी अनुचित कर्म (अधर्म) मत होने दीजिए ।

८. कीर्तनकार अथवा प्रवचनकार

अ. हे भगवन्, मुझसे हुई कीर्तन / प्रवचन की सेवा को आप स्वीकार कीजिए और मुझ पर कृपा कीजिए ।

आ. हे सरस्वतीदेवी, मुझे सात्विक और अन्यों को आनंद प्रदान करनेवाली वाणी प्रदान कीजिए ।

इ. मेरे द्वारा बताए गए राष्ट्र, संत, धर्म आदि का महत्व श्रोताओं को भली-भांति समझ में आने दीजिए । सर्व श्रोताओं को राष्ट्राभिमानी और धर्माचरणी बनने दीजिए ।

९. सैनिक

अ. हे दुर्गामाता, मातृभूमि की रक्षा हेतु आप हमें आशीर्वाद दीजिए ।

आ. हे दुर्गामाता, देशरक्षा की सेवा मुझसे साधना के रूप में करवा लीजिए ।

दैनिक कृत्य करते समय की जानेवाली प्रार्थना

अ. सवेरे नींद से जागने पर

१. हे प्रभु, आपके कृपाशीर्वाद से मुझे आज का दिन प्राप्त हुआ है । आज दिनभर का प्रत्येक कृत्य मुझसे गुरुसेवा के रूप में करवा लीजिए ।

२. दिनभर में होनेवाले प्रसंगों से मैं साधना के विषय में कुछ नया सीख पाऊं, ऐसी कृपा कीजिए ।

आ. स्नान करते समय

१. हे जलदेवता, आपकी कृपा से ही यह तीर्थ मुझे स्नान के लिए मिला है । इससे मेरे शरीर, मन और बुद्धि पर आया रज-तम का आवरण नष्ट होने दीजिए । आपके कृपाशीर्वाद से मुझे अधिकाधिक उचित और प्रभावकारी गुरुसेवा करने हेतु शक्ति एवं चैतन्य प्राप्त होने दीजिए ।

२. स्नान करने पर जिस प्रकार शरीर से मैल निकल जाता है, उसी प्रकार प्रतिदिन प्रार्थनारूप साबुन और नामरूप जल से स्नान हो और मेरे स्वभावदोषों की मैल दूर होने दीजिए । इस हेतु आप ही कृपा कर मेरे स्वभावदोष शीघ्र समझ में आने दीजिए ।

इ. कपडे धोते समय

हे गुरुदेव, ये कपडे आप ही के परिजनोंके हैं । उन्हें धोने का अवसर आप ही ने मुझे प्रदान किया है । इन कपडों में आप ही चैतन्य निर्मित कीजिए और उसका आपके परिजनों को लाभ होने दीजिए ।

ऐसी प्रार्थना करने के कुछ समय उपरांत मेरे ध्यान में आया कि अन्य दिनों की तुलना में आज कपडे अधिक स्वच्छ धुले हैं । – श्रीमती संगीता लोटलीकर, डोंबिवली, जनपद ठाणे.

ई. वस्त्र धारण करते समय

हे प्रभु, आपकी कृपा से प्राप्त ये वस्त्र आप ही के द्वारा प्रदान किया गया सुरक्षा-कवच है । इन वस्त्रोंद्वारा आप ही अनिष्ट शक्तियों के आक्रमणों से मेरी रक्षा कीजिए ।

उ. कंघी करते समय

मेरे प्रत्येक केश के मूल में विद्यमान कष्टदायक शक्ति नष्ट होने दीजिए । ऐसी कृपा कीजिए कि, मेरे प्रत्येक केश से वातावरण में विद्यमान चैतन्य ग्रहण हो और वह मेरे संपूर्ण शरीर में  फैल जाए ।

ऊ. सायंकाल के समय भगवानके सामने दीप जलाते समय

हे ज्योति, तुम्हारे समान मैं भी अंधकार पर (विकारों पर) विजय प्राप्त कर पाऊं । जिस प्रकार तुम निरंतर जलकर अन्यों को प्रकाश देती हो, उसी प्रकार मैं भी अन्यों की सहायता कर पाऊं ।

ए. रात को सोते समय

हे भगवन्, संपूर्ण दिन में हुई सत्सेवा और नामजप आपके चरणों में अर्पित कर रही हूं । मुझसे निरंतर आपकी अपेक्षा के अनुरूप चूकरहित सेवा करवा लीजिए ।

ऐ. विभिन्न कृत्यों में सहायक सामग्री से (उपकरणों से) की जानेवाली प्रार्थना

१. पेन, पेन्सिल, बही और दैनंदिनी : आपके कारण मेरा साधना संबंधी अभ्यास होता है । आप अपनी देह घिसकर अन्यों को ज्ञान प्रदान करती हो, उसी प्रकार मैं भी अपनी देह गुरुसेवा हेतु घिसकर अन्यों को सहायता कर पाऊं ।

२. गणकयंत्र (कैल्क्यूलेटर) : आप जिस प्रकार मेरा समयरूप धन बचाते हो, उस प्रकार मुझसे भी सेवा का उचित नियोजन हो और साधना हेतु अधिकाधिक समय देने के प्रयास हो पाए ।

३. दूरभाष और दूरमुद्रक( फैक्स) यंत्र : आपकी सेवा के कारण गुरुसेवक एक-दूसरे से संवाद साध पाते हैं और इस माध्यम से एक-दूसरे का मार्गदर्शन प्राप्त होने से उनकी साधना बढती है । आपके समान मुझसे भी निरंतर गुरुसेवा हो पाए ।

४. वाहन : आपके कारण मेरे अमूल्य समय और ऊर्जा की जो बचत होती है, उसका उपयोग मुझसे साधना बढाने के लिए हो, ऐसी बुद्धि दें ।

 नामजप गुणात्मक होने हेतु की जानेवाली प्रार्थना

अ. हे प्रभु, आपकी कृपा से मेरा नामजप भावपूर्वक और निरंतर होने दीजिए ।

आ. हे प्रभु, आपकी कृपा से मुझे नामजप से शक्ति और चैतन्य ग्रहण होने दीजिए ।

संदर्भ : सनातन निर्मित लघुग्रंथ ‘प्रार्थना’