विविध कार्यक्षेत्रों से संबंधित व्यक्तियों के लिए उपयुक्त विशेष प्रार्थनाएं
१. विद्यार्थी
अ. पढाई प्रारंभ करने से पूर्व और पढाई करते समय नियमित अंतराल पर प्रार्थना करें – हे श्री गणपति और श्री सरस्वतीदेवी, मेरी पढाई में आनेवाली बाधाएं दूर होने दीजिए । मेरा मन पढाई में एकाग्र होने दीजिए । मैं जो पढाई कर रहा हूं, उसे मुझे भली-भांति ग्रहण होने दीजिए और उचित समय पर मुझे उसका स्मरण करवाइए ।
आ. कक्षा में पहुंचने पर : हे भगवन्, शिक्षकों में मुझे आपका ही रूप दिखाई दे और कक्षा में सिखाए जानेवाले सर्व विषयों का ज्ञान मैं एकाग्रतापूर्वक ग्रहण कर पाऊं ।
इ. अन्य प्रार्थनाएंं
१. हे ईश्वर, मुझे सदैव अच्छे कर्म करने हेतु सहायता कीजिए और बुराइयों से दूर रखिए ।
२. मुझे सभी छोटे-बडों का आदर करना सिखाइए ।
३. मुझे अपने देश और धर्म के प्रति प्रेम अनुभव होने दीजिए ।
२. कार्यालयीन कर्मचारी
अ. हे प्रभु, कार्यालयीन काम करते समय मेरे सहयोगी, ग्राहकवर्ग इत्यादि के विषय में मेरे मन में केवल प्रेम ही रहने दीजिए ।
आ. सत्यनिष्ठा से (ईमानदारी से) सेवा करना, मेरा धर्म है । मुझसे सदैव प्रामाणिकता से सेवा करवा लीजिए ।
३. निर्माण-कार्य अभियंता
अ. हे स्थानदेवता, आपकी कृपा से यह निर्माण-कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण होने दीजिए । आगे इस वास्तु में आपकी कृपा से पवित्रता बनी रहने दीजिए ।
आ. हे भगवन्, यह निर्माण-कार्य करते समय ‘मैं देवालय का ही निर्माण-कार्य कर रहा हूं’, ऐसा मेरा भाव रहने दीजिए ।
४. श्रमिक
अ. हे प्रभु, यह काम करते समय दुर्घटना, चोट आदि से मेरी रक्षा कीजिए ।
आ. हे भगवन्, आपका नामजप करते हुए काम करते समय मुझे अपने परिश्रम का विस्मरण होने दीजिए ।
५. किसान
अ. हे भूमिमाता, फसल काटते समय मुझसे आप पर जाने-अनजाने होनेवाले आघातों के लिए आप मुझे क्षमा कर दीजिए ।
आ. हे वरुणदेवता, आपकी कृपा से खेती को (फसलों को) आवश्यक मात्रा में जल मिलने दीजिए ।
इ. हे भगवन्, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, धान को लगनेवाले कीटक इत्यादि से धान की रक्षा कीजिए ।
६. चिकित्सक (डॉक्टर)
अ. हे धन्वंतरिदेवता, आप ही मेरे माध्यम से रोगियों पर उचित उपचार कीजिए ।
आ. हे प्रभु, रोगियों की सेवा आप ही की सेवा है । वह उचितरूप से होने हेतु मुझ में प्रेमभाव तथा सेवाभाव बढाइए ।
७. अधिवक्ता (वकील)
अ. हे न्यायदेवता, अन्याय से पीडित लोगों को न्याय दिलाने हेतु आप ही मेरी सहायता कीजिए ।
आ. लोभवश मुझसे कोई भी अनुचित कर्म (अधर्म) मत होने दीजिए ।
८. कीर्तनकार अथवा प्रवचनकार
अ. हे भगवन्, मुझसे हुई कीर्तन / प्रवचन की सेवा को आप स्वीकार कीजिए और मुझ पर कृपा कीजिए ।
आ. हे सरस्वतीदेवी, मुझे सात्विक और अन्यों को आनंद प्रदान करनेवाली वाणी प्रदान कीजिए ।
इ. मेरे द्वारा बताए गए राष्ट्र, संत, धर्म आदि का महत्व श्रोताओं को भली-भांति समझ में आने दीजिए । सर्व श्रोताओं को राष्ट्राभिमानी और धर्माचरणी बनने दीजिए ।
९. सैनिक
अ. हे दुर्गामाता, मातृभूमि की रक्षा हेतु आप हमें आशीर्वाद दीजिए ।
आ. हे दुर्गामाता, देशरक्षा की सेवा मुझसे साधना के रूप में करवा लीजिए ।
दैनिक कृत्य करते समय की जानेवाली प्रार्थना
अ. सवेरे नींद से जागने पर
१. हे प्रभु, आपके कृपाशीर्वाद से मुझे आज का दिन प्राप्त हुआ है । आज दिनभर का प्रत्येक कृत्य मुझसे गुरुसेवा के रूप में करवा लीजिए ।
२. दिनभर में होनेवाले प्रसंगों से मैं साधना के विषय में कुछ नया सीख पाऊं, ऐसी कृपा कीजिए ।
आ. स्नान करते समय
१. हे जलदेवता, आपकी कृपा से ही यह तीर्थ मुझे स्नान के लिए मिला है । इससे मेरे शरीर, मन और बुद्धि पर आया रज-तम का आवरण नष्ट होने दीजिए । आपके कृपाशीर्वाद से मुझे अधिकाधिक उचित और प्रभावकारी गुरुसेवा करने हेतु शक्ति एवं चैतन्य प्राप्त होने दीजिए ।
२. स्नान करने पर जिस प्रकार शरीर से मैल निकल जाता है, उसी प्रकार प्रतिदिन प्रार्थनारूप साबुन और नामरूप जल से स्नान हो और मेरे स्वभावदोषों की मैल दूर होने दीजिए । इस हेतु आप ही कृपा कर मेरे स्वभावदोष शीघ्र समझ में आने दीजिए ।
इ. कपडे धोते समय
हे गुरुदेव, ये कपडे आप ही के परिजनोंके हैं । उन्हें धोने का अवसर आप ही ने मुझे प्रदान किया है । इन कपडों में आप ही चैतन्य निर्मित कीजिए और उसका आपके परिजनों को लाभ होने दीजिए ।
ऐसी प्रार्थना करने के कुछ समय उपरांत मेरे ध्यान में आया कि अन्य दिनों की तुलना में आज कपडे अधिक स्वच्छ धुले हैं । – श्रीमती संगीता लोटलीकर, डोंबिवली, जनपद ठाणे.
ई. वस्त्र धारण करते समय
हे प्रभु, आपकी कृपा से प्राप्त ये वस्त्र आप ही के द्वारा प्रदान किया गया सुरक्षा-कवच है । इन वस्त्रोंद्वारा आप ही अनिष्ट शक्तियों के आक्रमणों से मेरी रक्षा कीजिए ।
उ. कंघी करते समय
मेरे प्रत्येक केश के मूल में विद्यमान कष्टदायक शक्ति नष्ट होने दीजिए । ऐसी कृपा कीजिए कि, मेरे प्रत्येक केश से वातावरण में विद्यमान चैतन्य ग्रहण हो और वह मेरे संपूर्ण शरीर में फैल जाए ।
ऊ. सायंकाल के समय भगवानके सामने दीप जलाते समय
हे ज्योति, तुम्हारे समान मैं भी अंधकार पर (विकारों पर) विजय प्राप्त कर पाऊं । जिस प्रकार तुम निरंतर जलकर अन्यों को प्रकाश देती हो, उसी प्रकार मैं भी अन्यों की सहायता कर पाऊं ।
ए. रात को सोते समय
हे भगवन्, संपूर्ण दिन में हुई सत्सेवा और नामजप आपके चरणों में अर्पित कर रही हूं । मुझसे निरंतर आपकी अपेक्षा के अनुरूप चूकरहित सेवा करवा लीजिए ।
ऐ. विभिन्न कृत्यों में सहायक सामग्री से (उपकरणों से) की जानेवाली प्रार्थना
१. पेन, पेन्सिल, बही और दैनंदिनी : आपके कारण मेरा साधना संबंधी अभ्यास होता है । आप अपनी देह घिसकर अन्यों को ज्ञान प्रदान करती हो, उसी प्रकार मैं भी अपनी देह गुरुसेवा हेतु घिसकर अन्यों को सहायता कर पाऊं ।
२. गणकयंत्र (कैल्क्यूलेटर) : आप जिस प्रकार मेरा समयरूप धन बचाते हो, उस प्रकार मुझसे भी सेवा का उचित नियोजन हो और साधना हेतु अधिकाधिक समय देने के प्रयास हो पाए ।
३. दूरभाष और दूरमुद्रक( फैक्स) यंत्र : आपकी सेवा के कारण गुरुसेवक एक-दूसरे से संवाद साध पाते हैं और इस माध्यम से एक-दूसरे का मार्गदर्शन प्राप्त होने से उनकी साधना बढती है । आपके समान मुझसे भी निरंतर गुरुसेवा हो पाए ।
४. वाहन : आपके कारण मेरे अमूल्य समय और ऊर्जा की जो बचत होती है, उसका उपयोग मुझसे साधना बढाने के लिए हो, ऐसी बुद्धि दें ।
नामजप गुणात्मक होने हेतु की जानेवाली प्रार्थना
अ. हे प्रभु, आपकी कृपा से मेरा नामजप भावपूर्वक और निरंतर होने दीजिए ।
आ. हे प्रभु, आपकी कृपा से मुझे नामजप से शक्ति और चैतन्य ग्रहण होने दीजिए ।
ईश्वर से प्रार्थना करनेके विविध उदाहरण !
प्रार्थना के उदाहरण – भाग १
आधुनिक वैज्ञानिक युग में प्रार्थना का महत्त्व
गुरु रामकृष्ण परमहंसजी ने एेसे किया स्वामी विवेकानंद के अंतरंग में प्रार्थना का बीज अंकुरित...
ईश्वर की कृपा संपादन करने का सुलभ मार्ग है ‘प्रार्थना’ !