प्रार्थना के उदाहरण – भाग १

निम्नलिखित प्रार्थनाएं केवल कुछ उदाहरण हैं । प्रत्येक व्यक्ति अपने भाव के अनुरूप जैसी उन्हें सूझे वैसी प्रार्थना भी कर सकते हैं ।

१. देवताओं की गुण-विशेषताओं के अनुसार उनसे की जानेवाली प्रार्थना

अ. श्री गणपति

हे बुद्धिदाता, मुझे सदा सद्बुद्धि प्रदान कीजिए । हे विघ्नहर्ता, अपने पाश से मेरे सर्व ओर सुरक्षा-कवच निर्मित कीजिए और मेरे जीवन में आनेवाले सर्व संकटों का निवारण कीजिए ।

आ. श्रीराम

हे मर्यादापुरुषोत्तम, मेरा जीवन भी आप ही की भांति आदर्श बने, इस हेतु आप ही मुझ पर कृपा कीजिए ।

इ. श्री हनुमान

हे बजरंग बली, आपकी कृपा से निर्भयता, अखंड सावधानता, दास्यभाव आदि आपके गुण मुझमें भी आने दीजिए ।

ई. भगवान शिव

हे महादेव, आपकी ही भांति मुझमें भी वैराग्यभाव निर्मित होने दीजिए ।

उ. श्री दुर्गादेवी

हे जगदंबे माता, मां की ममता देकर आप मुझे संभालिए । आपकी कृपादृष्टि मुझ पर निरंतर बनी रहे और आप मेरी सदैव रक्षा कीजिए ।

ऊ. दत्त देवता

हे दत्तात्रेय देवता, जिस प्रकार आपने चौबीस गुणगुरु बनाए, उसी प्रकार सभी के अच्छे गुण ग्रहण करने की वृत्ति मुझ में भी उत्पन्न होने दीजिए ।

ए. श्रीकृष्ण

हे भगवन्, आप पूर्णावतार तथा सर्वगुणसंपन्न हैं ।

२. स्थानों से संबंधित देवताओं से की जानेवाली प्रार्थना

अ. वास्तुदेवता

वास्तु में विद्यमान संकट से आप ही मेरी रक्षा कीजिए ।

आ. स्थानदेवता

आपके आधिपत्य में आनेवाले इस स्थान की अनिष्ट शक्तियों से रक्षा होने दीजिए ।

इ. ग्रामदेवता और क्षेत्रपालदेवता

आपके आधिपत्य में आनेवाले इस स्थान की रोग, अनिष्ट शक्ति जैसे संकटों से रक्षा होने दीजिए ।

३. दैनिक पूजा-अर्चना, धार्मिक विधियों के अवसर पर की जानेवाली प्रार्थना

अ. हे प्रभु, इस पूजाविधिद्वारा मेरे अंतःकरण में आपके प्रति भक्तिभाव जागृत होने दीजिए । इस पूजाविधि से प्रक्षेपित चैतन्य मैं अधिकाधिक ग्रहण कर पाऊं, ऐसी कृपा कीजिए ।

आ. अन्य प्रार्थना : हिन्दू धर्म में बताए अनुसार आचरण करने की वृत्ति मुझ में निर्मित होने दीजिए ।

४. दिनचर्या से संबंधित प्रार्थना

अ. स्नानके पूर्व

हे जलदेवता, आपके पवित्र जल से मेरा शरीर शुद्ध होकर अंतर्मन भी निर्मल होेने दीजिए ।

आ. रसोई बनानेके पूूर्व एवं अन्न ग्रहण करने से पूर्व

हे अन्नपूर्णामाता, आपकी कृपा से मेरे द्वारा जो भी रसोई बने, वह सात्विक(सेवन करनेवालों में अच्छी वृत्ति निर्मित करनेवाली) हो । यह अन्न ग्रहण कर परिजनों का स्वास्थ्य अच्छा रहने दीजिए । इस प्रसाद से मुझे एवं परिजनों को शक्ति और चैतन्य मिलने दीजिए ।

इ. सोने से पूर्व

हे उपास्यदेवता तथा निद्रादेवी, आपकी कृपा का सुरक्षाकवच निरंतर मेरे सर्व ओर बना रहने दीजिए और निद्रा में भी मेरा नामजप होने दीजिए ।

ई. यात्रा पर जाने से पूर्व की जानेवाली प्रार्थना

१. हे भगवान, मेरी यात्रा निर्विघ्नरूप से संपन्न होने दीजिए । आपकी कृपा का सुरक्षाकवच संपूर्ण यात्रा के समय मेरे सर्व ओर निरंतर बना रहने दीजिए ।

२. हे वास्तुदेवता और कुलदेवता / उपास्यदेवता, मैं किसी कारण से बाहर जा रहा हूं । यह घर मैं आपके चरणों में सौंपकर जा रहा हूं । कृपा कर इसकी रक्षा कीजिए ।

३. वाहन में बैठने पर : हे वाहनदेवता, आपकी कृपा से मेरी संपूर्ण यात्रा सुरक्षितरूप से संपन्न होने दीजिए ।

उ. वस्तु खरीदते समय

हे प्रभु, मैं सात्विक(अच्छे स्पंदन युक्त) वस्तु चुन पाऊं । उस वस्तु से मुझे सात्विकता (अच्छे स्पंदन) ग्रहण होने दीजिए ।

ऊ. रुग्णावस्था में (बीमारी में) की जानेवाली प्रार्थना

हे ईश्वर, इस जन्म में अथवा पूर्व जन्म में किए अनुचित कर्मों के कारण मुझे यह रोग हुआ है, इसका मुझे बोध है । ये दुःख और भोग धैर्य और शांति से सहने की शक्ति आप ही मुझे प्रदान कीजिए ।

ए. चूक (गलती) हो जाने पर अपराधबोध को घटाने हेतु प्रार्थना

हे प्रभु, मेरे हाथों अपराध हो गया है । इस अपराध के लिए मुझे क्षमा कीजिए और मुझे उचित मार्ग दिखाइए ।

संदर्भ : सनातन निर्मित लघुग्रंथ ‘प्रार्थना‘