रामनाथी (गोवा) के सनातन के आश्रम में ‘शूलिनी पराक्रम यंत्र’ का पूजन !

‘श्री भृगु महर्षिजी की आज्ञा से परात्पर गुुरु डॉ. आठवलेजी को स्वास्थ्यपूर्ण दीर्घायु प्राप्त हो, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना में उत्पन्न अनिष्ट शक्तियों की बाधाएं दूर हों, साथ ही साधकों के कष्ट दूर हों, इसके लिए यहां के सनातन आश्रम में ७ नवंबर को शूलिनी पराक्रम यंत्र की स्थापना और पूजन कर उसके पश्‍चात हवन किया गया ।

नामजप के साथ मुद्रा करने का महत्त्व

पंचतत्त्वों का असंतुलन दूर करने के लिए नामजप के समान ही मुद्रा भी उपयुक्त है । मुद्राआें का ही न्यास किया जाता है । नामजप के साथ मुद्रा तथा न्यास करने पर उपचारों का लाभ अधिक होता है ।

लोहडी

लोहडी का त्यौहार पंजाबियों तथा हरियाणवी लोगों का प्रमुख त्यौहार माना जाता है । यह लोहडी का त्यौहार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू काश्मीर और हिमाचल में धूम धाम तथा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं । यह त्यौहार पौष मास की अंतिम रात्रि और मकर संक्राति की पूर्वसंध्या को हर वर्ष मनाया जाता हैं ।

अहं के घटने पर आध्यात्मिक उन्नति के लक्षण एवं कुछ प्रेरणादायी अनुभूतियां

जो कुछ कियो सो तुम कियो, मैं कुछ कियो नाहीं । कहीं कहो जो मैं कियो, तुम ही थे मुझ माहीं ।। अहं के पूर्णतः अंत होनेपर ऐसा अनुभव होता है

‘कोची इंटरनैशनल बुक फेयर’ में सनातन के ग्रंथप्रदर्शनी का जिज्ञासुआें द्वारा उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर !

‘कोची इंटरनैशनल बुक फेयर’ में सनातन संस्था द्वारा प्रकाशित धर्म, अध्यात्म, आयुर्वेद, बालसंस्कार, स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन आदि विषयोंपर आधारित ग्रंथो की प्रदर्शनी लगाई गई ।

अहं को दूर करने के उपाय

जिस ईश्वर के कारण हम श्वास ले पाते हैं, उनके प्रति केवल शाब्दिक कृतज्ञता व्यक्त करने से पूर्ण लाभ नहीं होता । ईश्वर के प्रति कृतज्ञता हमारे आचरण में दिखाई देनी चाहिए । ईश्वर का नाम सदैव मुख में रहे, ईश्वर के बच्चों का अर्थात समस्त जनों का उद्धार हो, अर्थात ईश्वरप्राप्ति हेतु उन्हें अध्यात्मज्ञान अविरत देने से यह ईश्वर के प्रति सच्ची कृतज्ञता होगी ।

अहं को घटाने हेतु साधना के महत्त्वपूर्ण घटक क्या हैं ?

दैनिक जीवन के सर्व कामकाज को सेवा के रूप में ही करने का प्रयत्न करें, उदाहरणार्थ‘ अपने कपडे इस्त्री करना भी गुरु सेवा ही है’, ऐसा भाव रहेगा तो सेवावृत्ति बढाने में सहायता मिलेगी । ‘मैं सेवक हूं’, यह भाव जितना अधिक होगा, उतनी मात्रा में अहं भी शीघ्र घटेगा ।

अहं के कारण क्या हानि होती है और इसे नष्ट करना महत्त्वपूर्ण क्यों है ?

अहं जितना अधिक होगा, व्यक्ति उतना ही दुःखी होगा । मानसिक रोगियों का अहं सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक होता है; इसलिए वे अधिक दुःखी होते हैं ।

अहं के प्रकार एवं निर्मिति

धन एवं लोकैषणा के कारण अर्थात संपत्ति, पद, अधिकार, राज्य इत्यादि की प्राप्ति से अहं बढता है, उदाहरणार्थ हिरण्यकश्यप एवं रावण, राज्यप्राप्ति के उपरांत मदोन्मत्त हो गए । फल की अपेक्षा रखने से अहं आता है ।

अहं किसे कहते हैं एवं अहं-निर्मूलन का क्या महत्त्व है ?

अहं, खेत में उगनेवाली घास समान है । जब तक उसे जड सहित उखाड न दिया जाए, तबतक खेत की उपज अच्छी नहीं हो पाती । घास को निरंतर काटते रहना आवश्यक है । उसी प्रकार, अहं को पूर्णतः नष्ट किए बिना उत्तम उपज अर्थात परमेश्वरीय कृपा संभव नहीं ।