परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी को दीर्घायु प्राप्त हो, साथ ही हिन्दू राष्ट्र स्थापना में उत्पन्न सभी बाधाएं दूर हों; इसके लिए देवताओं से मनौती !

सनातन प्रभात नियतकालिकों के पाठक, धर्मशिक्षावर्ग में आनेवाली महिलाएं, धर्मप्रेमियों ने परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी को दीर्घायु प्राप्त हो और हिन्दू राष्ट्र स्थापना में उत्पन्न सभी बाधाएं दूर हों; इसके लिए मुंबई के विविध स्थानोंसहित नई मुंबई और बोईसर में देवताओं से मनौती मांगी गई ।

सनातन के देवद (पनवेल) के आश्रम में धर्मांधों द्वारा बडी मात्रा में जिहाद करने की धमकी का पत्र

देवद (पनवेल) के सनातन के आश्रम में २४ अप्रैल को धर्मांधों की ओर से डाक के द्वारा ऊर्दूमिश्रित हिन्दी भाषा में धमकी का गुमनाम पत्र मिला है । इस पत्र में धर्मांधों ने बडी मात्रा में जिहाद की धमकी दी है । लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमिपर आचारसंहिता लागू होने के समय ही ऐसा पत्र मिलना बहुत गंभीर बात है ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा हस्तस्पर्श किए गए उनकी पादुकाओं का मंगलुरू सेवाकेंद्र में आगमन एवं प्रतिष्ठापना !

हिन्दू राष्ट्र स्थापना हेतु अखंड चैतन्य की आपूर्ति करनेवाले तथा परात्पर गुर डॉ. आठवलेजी द्वारा भृगु महर्षिजी की आज्ञा से हस्तस्पर्श किए गए पादुकाओं का मंगलुरू के सेवाकेंद्र में चैत्र कृष्ण पक्ष नवमी अर्थात २८ अप्रैल के मंगल दिवसपर दोपहर १२ बजे आगमन हुआ ।

सादगीभरी जीवनशैली और उच्च विचारधारावाले निरासक्त कर्मयोगी बेळगाव (कर्नाटक) के ७१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त पू. (डॉ.) नीलकंठ अमृत दीक्षितजी (आयु ९० वर्ष) !

मेरे विवाह के पश्‍चात मेरे पति ने कर्नाटक राज्य के अनेक गांवों मे चिकित्सीय अधिकारी के रूप में काम किया; परंतु उन्होंने कभी अपने अधिकार का दुरुपयोग किया हो, ऐसा मैने कभी नहीं देखा ।

सनातन आश्रम में कोटा पटिया पर अपनेआप बने ॐ के चारों ओर श्‍वेत वलय निर्मित होना

साधना करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक शक्ति जैसे-जैसे बढती है, वैसे-वैसे उसमें तथा उसके आसपास की वस्तुओं में भी, अनेक सकारात्मक परिवर्तन होने लगते हैं ।

कर्म, ज्ञान एवं भक्ति का सुंदर संगम बने बेळगाव (कर्नाटक) के डॉ. नीलकंठ दीक्षितजी (आयु ९० वर्ष) सनातन के ८७ वें व्यष्टि संतपदपर विराजमान !

पू. दीक्षितदादाजी सदैव निर्विचार अवस्था में तथा अखंड भाव की स्थिति में होते हैं । दादाजी के शरीर में दैवीय परिवर्तन आए हैं तथा उनके अस्तित्व के कारण उनके निवास में भी परिवर्तन आए हैं ।

लखनऊ एवं अयोध्या में सनातन संस्था की ओर से ‘आनंदित जीवन हेतु साधना’ विषयपर प्रवचन

उत्तर प्रदेश के लखनऊ एवं अयोध्या में सनातन संस्था की ओर से ‘आनंदित जीवन हेतु साधना’ विषयपर प्रवचन लिए गए ।

प्रेमभाव एवं परात्पर गुरु डॉक्टरजी के प्रति अनन्य भाव आदि गुणों से युक्त शालिनी माईणकरदादीजी (आयु ९२ वर्ष) !

शालिनी माईणकरजी (आयु ९२ वर्ष) विगत २७ वर्षों से सनातन संस्था के मार्गदर्शन में साधना कर रही हैं । आजकल वे उनकी पुत्री श्रीमती मेधा विलास जोशीसहित नंदनगद्दा, कारवार, कर्नाटक में रहती हैं ।

सात्त्विक, सहनशील वृत्ति, निरपेक्ष प्रेम आदि दैवीय गुणों से युक्त शालिनी माईणकरदादीजी (आयु ९२ वर्ष) संतपदपर विराजमान !

मूलतः सात्त्विक वृत्ति तथा अल्प अहं से युक्त माईणकरदादीजी ने गृहस्थी के प्रत्येक प्रसंग का सहनशीलता के साथ सामना किया । प्रत्येक प्रसंग को उन्होंने ईश्वरेच्छा के रूप में स्वीकार किया और अध्यात्म को प्रत्यक्षरूप से आचरण में कैसे लाना है ?, इसकी सीख सभी को दी ।

ब्रह्मपुर (मध्य प्रदेश) में सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से सामूहिक मंदिर स्वच्छता !

बहुचरामाता मंदिर, राजपुरा में सनातन संस्था के साधक तथा हिन्दू जनजागृति समिति के कार्यकर्ताओं ने मंदिर की सामूहिक स्वच्छता की ।