सोलापुर (महाराष्ट्र) की सनातन संस्था की ६६वीं संत पू. नंदिनी मंगळवेढेकरजी (आयु ७८ वर्ष) की साधनायात्रा !

विविधतापूर्ण सेवाएं करनेवाली तथा परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के निरंतर साथ होने की अनुभूति करनेवाली सनातन की संत पू. नंदिनी मंगळवेढेकर की साधनायात्रा को उन्हीं के शब्दों में जान लेते हैं ।

गुजरात के सारंगपुर के कष्टभंजन मंदिर, वेरावल का भालका तीर्थ एवं सोमनाथ के ज्योतिर्लिंग के करें दर्शन !

गुजरात के स्वामीनारायण संप्रदाय के गुरु स्वामी गोपालानंद सारंगपुर जब गांव में आए थे, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि उस क्षेत्र में अनेक वर्षों से वर्षा होने से यह क्षेत्र वीरान हो गया है । तब उन्होंने हनुमानजी से प्रार्थना की और उनकी प्रेरणा से वहां हनुमानजी की स्थापना की । हनुमानजी के कारण संकट दूर होने से उस मंदिर को कष्टभंजन हनुमान मंदिर नाम पडा ।

आनंद, चैतन्य एवं निर्गुणतत्त्वकी अनुभूति करानेवाला रामनाथीके सनातन आश्रममें संपन्न अद्वितीय संतसम्मान समारोह !

वैशाख कृष्ण नवमी अर्थात १३ मई २०१९ को सनातनके इतिहासमें सुवर्णाक्षरोंसे लिखी जानी चाहिए, ऐसी अद्वितीय घटना यहांके सनातनके रामनाथी आश्रममें घटित हुई ।

सर्वस्व त्याग कर साधना का आनंद अनुभव करनेवाले साधकों को आश्रय देनेवाली और उन्हें उच्च लोकों की अनुभूति करानेवाली पवित्र वास्तु का नाम है, सनातन आश्रम !

समाज के लोग सनातन के आश्रम में रहनेवाले साधकों को पागल समझते हैं । क्योंकि, आश्रम के छोटे से बडे तक किसी भी साधक को सांसारिक जीवन में रुचि नहीं रहती । इसी प्रकार, वे सब सांसारिक सुखों का, ऐश्‍वर्य का, तन, मन और धन का त्याग कर, आश्रम में साधना करते हैं । साधना करनेवाले व्यक्ति को सुखभोग, ऐश्‍वर्य आदि का महत्त्व शून्य लगता है ।

भादरा, हनुमानगढ (राजस्थान)के प.पू. डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य महाराज द्वारा देवद (पनवेल)के सनातन आश्रमका अवलोकन !

श्री. शिवाजी वटकरने प.पू. गुणप्रकाश चैतन्य महाराजको आश्रममें चल रहे कार्यके विषयमें अवगत कराया ।

श्रीकृष्णजी का क्षेत्र गुजरात के प्राचीन गणपति मंदिर की विशेषता एवं महत्त्व !

१९.३.२०१९ को पू. (डॉ.) उलगनाथन्जी ने बताया, ‘‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य में उत्पन्न बाधाएं दूर होने हेतु सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी गुजरात राज्य की राजधानी के पास जो गणेशजी का प्राचीन मंदिर है, उस मंदिर में जाकर वहां बैठकर ५ मिनटतक नामजप करें तथा इस मंदिर की जानकारी लें ।’’

केवल साधक ही नहीं, ,अपितु प्राणी, पशु और पक्षियोंपर भी प्रेमकी वर्षा कर उन्हें अपनानेवाले प.पू. गुरुदेवजी !

सनातन संस्थाके अनेक साधक, बालसाधक एवं युवासाधक पूर्णकालीन साधना हेतु आश्रममें रहने आते हैं, वह केवल परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा उनपर किए जानेवाले निरपेक्ष प्रेमभावके कारण ही !

रामनाथी, गोवा के सनातन के आश्रममें लक्षकुमकुमार्चन विधिके अंतर्गत श्री ललितात्रिपुरसुंदरी देवीका पूजन संपन्न !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीके ७७वें जन्मोत्सवके उपलक्ष्यमें रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में ५ मईसे धार्मिक विधियोंका प्रारंभ हो चुका है ।

साधनाकी तीव्रतासे तडप तथा प्रतिकूल स्थितिमें भी अपनी श्रद्धाको ढलने न देनेवाली सोलापुरकी श्रीमती इंदिरा नगरकरदादी संतपदपर विराजमान !

सोलापुरकी इंदिरा चंदुलाल नगरकरमें विद्यमान सिखनेकी तडप बहुत ही प्रशंसनीय है । उन्होंने आयुके ७३वें वर्षमें पढना और लिखना सीख लिया । दैनिक सनातन प्रभात, साथ ही सनातनके ग्रंथ पढना संभव हो; इस तडपके कारण उन्होंने अक्षरोंसे परिचय करवा लिया ।