परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का कक्ष तथा उससे संबंधित वस्तुओं में आए बुद्धिअगम्य परिवर्तन !
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी समष्टि गुरु एवं जगद्गुरु होने के कारण उनका अवतारकार्य संपूर्ण ब्रह्मांड में चालू रहता है । इस कार्य को पूर्णत्व की ओर ले जाने हेतु उनके कक्ष में कार्यरत पंचतत्त्व अन्य स्थानों की अपेक्षा अधिक संवेदनशील होती हैं ।
