परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का कक्ष तथा उससे संबंधित वस्तुओं में आए बुद्धिअगम्य परिवर्तन !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी समष्टि गुरु एवं जगद्गुरु होने के कारण उनका अवतारकार्य संपूर्ण ब्रह्मांड में चालू रहता है । इस कार्य को पूर्णत्व की ओर ले जाने हेतु उनके कक्ष में कार्यरत पंचतत्त्व अन्य स्थानों की अपेक्षा अधिक संवेदनशील होती हैं ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का कक्ष तथा परिसर में स्थित वृक्षोंपर हुए अनिष्ट शक्तियों के आक्रमण

वर्ष १९८९ से लेकर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के जीवन में कई बार महामृत्युयोग आए । वर्ष २००९ में आया हुआ परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का महामृत्युयोग तो बहुत कठिन था ।

शनैश्चर देवता का माहात्म्य !

महाराष्ट्र के शनिशिंगणापुर में शनिदेव काली बडी शिला के रूप में है और वहां शनिदेव की शक्ति कार्यरत है । इसलिए शनिशिंगणापुर शनि का कार्यक्षेत्र है ।

२२.६.२०१९ को मंगल ग्रह का कर्क राशि में प्रवेश तथा उस अवधि में होनेवाले परिणाम

‘शनिवार २२.६.२०१९ (ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष पंचमी) को रात ११ बजकर २३ मिनट को मंगल ग्रह कर्क राशि में प्रवेश करेगा ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ७७वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में बेंगलुरू (कर्नाटक) में हिन्दू एकता फेरी !

सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी के ७७वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में हाल ही में बेंगलुरु में भावपूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में हिन्दू एकता फेरी निकाल गई ।

दिनचर्या

आज की इस भागदौडभरे जीवन में लोगों की जीवनशैली बहुत बिगड चुकी है । लोग सुबह देरतक सोए रहते हैं और देररात सोते हैं ।

समर्थ रामदास स्वामी

माघ कृष्ण पक्ष नवमी को ‘रामदासनवमी’ पडती है ! रामदासस्वामी ने अपने जीवनकाल में अनेक अवसरों पर उपदेश किया था । वे केवल उपदेश नहीं करते थे, जीवों का उद्धार भी करते थे । रामदासनवमी के उपलक्ष्य में ऐसी ही एक घटना के विषय में आज हम जाननेवाले हैं ।

भारतियों का अत्यंत प्रगत प्राचीन जलव्यवस्थापन तथा पाश्चात्त्यों के अंधानुकरण के कारण निर्माण हुआ जल का दुर्भिक्ष्य !

‘जल का महत्त्व, उसका शोध तथा उसका नियोजन, इसका संपूर्ण विकसित तंत्रज्ञान हमारे देश में था । कुछ सहस्त्र वर्ष पूर्व हम वह प्रभावी पद्धति से उपयोग कर रहे थे तथा उसके कारण हमारा देश वास्तव में ‘सुजलाम् सुफलाम्’…