समय का सुनियोजन कैसे करें ?

मनुष्य जीवन में समय के जितनी अन्य कोई भी बात महत्त्वपूर्ण है । अंग्रेजी में ‘टाईम इज मनी’ एक कहावत है अर्थात ‘समय ही संपत्ति है ।’

दिनचर्या

आज की इस भागदौडभरे जीवन में लोगों की जीवनशैली बहुत बिगड चुकी है । लोग सुबह देरतक सोए रहते हैं और देररात सोते हैं ।

समर्थ रामदास स्वामी

माघ कृष्ण पक्ष नवमी को ‘रामदासनवमी’ पडती है ! रामदासस्वामी ने अपने जीवनकाल में अनेक अवसरों पर उपदेश किया था । वे केवल उपदेश नहीं करते थे, जीवों का उद्धार भी करते थे । रामदासनवमी के उपलक्ष्य में ऐसी ही एक घटना के विषय में आज हम जाननेवाले हैं ।

भारतियों का अत्यंत प्रगत प्राचीन जलव्यवस्थापन तथा पाश्चात्त्यों के अंधानुकरण के कारण निर्माण हुआ जल का दुर्भिक्ष्य !

‘जल का महत्त्व, उसका शोध तथा उसका नियोजन, इसका संपूर्ण विकसित तंत्रज्ञान हमारे देश में था । कुछ सहस्त्र वर्ष पूर्व हम वह प्रभावी पद्धति से उपयोग कर रहे थे तथा उसके कारण हमारा देश वास्तव में ‘सुजलाम् सुफलाम्’…

यमदीपदान करते समय १३ दीपक क्यों अर्पण करते हैं ?

दीपकों की संख्या १३ मानकर, पूजा की जाती है । इस दिन यमदेवता द्वारा प्रक्षेपित लहरें ठीक १३ पल नरक में निवास करती हैं । इसका प्रतीक मानकर यमदेवता को आवाहन करते हुए १३ दीपकों की पूजा कर, उन्हें यमदेवता को अर्पण किया जाता है ।

दुष्प्रवृत्तियों का सामना कैसे करें ?

सरकारी काम और ६ मास की प्रतीक्षा, इसकी प्रचीती प्रत्येक नागरिक को कभी ना कभी होती ही है । पैसे खाने की वृत्ति के कारण आज प्रशासनिक पद्धति आज सुचारू तथा सहज नहीं रही है । इसमें पीसा जाता है, केवल सामान्य नागरिक ! इसी सामान्य नागरिक को अब इन दुष्प्रवृत्तियों के विरुद्ध आवाज उठानी होगी !

पंढरपुर के देवता श्री विठ्ठल

१. व्युत्पत्ति एवं अर्थ अ. व्युत्पत्ति डॉ. रा.गो. भांडारकर कहते हैं कि ‘विष्णु’ शब्द का कन्नड अपभ्रंशित रूप ‘बिट्टि’ होता है तथा इस अपभ्रंश से ‘विठ्ठल’ शब्द बन गया । आ. अर्थ १. ईंट  ठल (स्थल) = विठ्ठल अर्थ : जो ईंटपर खडा होता है, वह विठ्ठल है । २. h 5 > अर्थ : जो अज्ञानी … Read more

शनिस्तोत्र

  कोणस्थ: पिङ्गलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोऽन्तको यमः । सौरिः शनैश्‍चरो मन्दः पिप्पलादेन संस्तुतः ॥ एतानि दश नामानि प्रातरुत्थाय य: पठेत् । शनैश्‍वरकृता पीडा न कदाचित् भविष्यति ॥ पिप्पलाद उवाच । नमस्ते कोणसंस्थाय पिङ्गलाय नमोऽस्तुते । नमस्ते बभ्रुरूपाय कृष्णाय च नमोऽस्तुते ॥ १ ॥ नमस्ते रौद्रदेहाय नमस्ते चान्तकाय च । नमस्ते यमसंज्ञाय नमस्ते सौरये विभो ॥ … Read more

बचपन से ही ईश्‍वर के अनुसंधान में रहनेवाले संभाजीनगर (महाराष्ट्र) के पू. (अधिवक्ता) सुरेश कुलकर्णीजी (आयु ६० वर्ष) !

श्री. कुलकर्णीकाका भले ही दोपहर को मिलें अथवा देररात मिलें, तब भी वे सदैव उत्साहित एवं आनंदित होते हैं ।

दाते पंचागकर्ता मोहन दाते द्वारा रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम का अवलोकन !

सोलापुर (महाराष्ट्र) के दाते पंचागकर्ता श्री. मोहन धुंडीराजशास्त्री ने ८ जून को रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम का अवलोकन किया ।