डे’ ज और शुभकामनाएं !
अभिभावकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु क्या विदेशी पृष्ठभूमिवाले डेज की आवश्यकता है ? ऐसे एक दिवसीय प्रेम व्यक्त कर क्या हाथ लगेगा ? कितने बच्चे अपने अभिभावकों को प्रतिदिन झुककर नमस्कार करते हैं ?
अभिभावकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु क्या विदेशी पृष्ठभूमिवाले डेज की आवश्यकता है ? ऐसे एक दिवसीय प्रेम व्यक्त कर क्या हाथ लगेगा ? कितने बच्चे अपने अभिभावकों को प्रतिदिन झुककर नमस्कार करते हैं ?
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के प्रयागराज टाईम्स के संपादक श्री. अनुपम मिश्रा, उनके भाई तथा भारतीय राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण के तांत्रिक व्यवस्थापक श्री. पंकज मिश्रा, उनके माता-पिता तथा मेरठ के बी.एस्.एन्.एल्. के महाप्रबंधक ज्ञानेंद्रकुमार द्विवेदी ने १३ जून को रामनाथी, गोवा के सनातन के आश्रम का अपने परिवारसहित अवलोकन किया ।
सनातन संस्था द्वारा ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष षष्ठी अर्थात २३ जून २०१९ को यहां बगलामुखी याग संपन्न हुआ ।
प्रत्येक युग में देवासुर युद्ध निरंतर होता रहता है । आज के इस कलियुगांतर्गत कलियुग में भी वह चल रहा है । सप्तलोकों में विद्यमान दैवीय अथवा अच्छी और सप्तपातालों में विद्यमान अनिष्ट शक्तियों में चल रहे इस युद्ध का स्थूल से प्रकटीकरण भूतलपर भी विविध रूपों में दिखाई देता है ।
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी समष्टि गुरु एवं जगद्गुरु होने के कारण उनका अवतारकार्य संपूर्ण ब्रह्मांड में चालू रहता है । इस कार्य को पूर्णत्व की ओर ले जाने हेतु उनके कक्ष में कार्यरत पंचतत्त्व अन्य स्थानों की अपेक्षा अधिक संवेदनशील होती हैं ।
वर्ष १९८९ से लेकर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के जीवन में कई बार महामृत्युयोग आए । वर्ष २००९ में आया हुआ परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का महामृत्युयोग तो बहुत कठिन था ।
महाराष्ट्र के शनिशिंगणापुर में शनिदेव काली बडी शिला के रूप में है और वहां शनिदेव की शक्ति कार्यरत है । इसलिए शनिशिंगणापुर शनि का कार्यक्षेत्र है ।
‘शनिवार २२.६.२०१९ (ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष पंचमी) को रात ११ बजकर २३ मिनट को मंगल ग्रह कर्क राशि में प्रवेश करेगा ।
सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी के ७७वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में हाल ही में बेंगलुरु में भावपूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में हिन्दू एकता फेरी निकाल गई ।
आज के अधिकांश युवकों के सामने करियर छोडकर अन्य कोई विशिष्ट लक्ष्य और आदर्श नहीं है ।