भगवान श्रीकृष्ण संबंधी आलोचनाएं अथवा अनुचित विचार एवं उनका खंडन
ईश्वरके कर्म भावातीत होनेसे वे शुद्धस्वरूप होते हैं; इसलिए उन्हें ‘लीला’ कहते हैं ।
ईश्वरके कर्म भावातीत होनेसे वे शुद्धस्वरूप होते हैं; इसलिए उन्हें ‘लीला’ कहते हैं ।
२८ जुलाई को यहां के शिरोली के मसोबा मंदिर में ‘हिन्दू संस्कृति का महत्त्व एवं लव जिहाद का बढता संकट’ विषयपर सनातन संस्था की आधुनिक वैद्या (श्रीमती) शिल्पा कोठावळे ने मार्गदर्शन किया ।
शिवबाड़ी बीकानेर के श्रीलालेश्वर महादेव मंदिर में १४ से १६ जुलाई कालावधि में श्रीगुरु-व्यास गुरुपूर्णिमा महोत्सव एवं संवित साधक सम्मलेन आयोजित किया गया था ।
सावता माळी ‘कर्म करते रहना ही वास्तविक ईश्वरसेवा है’, इस प्रवृत्तिमार्गी सीख देनेवाले संत हैं ।
गुरुदेव डॉ. नारायणानंदनाथ काटेस्वामीजी उत्तरप्रदेश के महान संत धर्मसम्राट करपात्री स्वामीजी के शिष्य है ! गुरुदेव ने पुणे विद्यापीठ में ‘डॉक्टरेट’ की पदवी प्राप्त की थी । उन्होंने जीवन का अधिक समय हिमालय में व्यतीत किया ।
पुणे के महान संत प.पू . आबा उपाध्येजी द्वारा व्याधि निवारण हेतु बताए गए कुछ उपाय
मां के गर्भ में पल रहे लगभग ६ से ८ मास के शिशु में प्राणों का प्रवेश होता है, ऐसा नहीं है, अपितु जिस क्षण गर्भाशय में शुक्राणु एवं स्त्रीबीज का संयोग होता है, उसी क्षण उसमें जीवात्मा प्रवेश करता है । गर्भ की वृद्धि होने के लिए भी चैतन्य ही कारणभूत होता है ।
हिन्दू इस त्योहार के प्रति लोगों में जागृति लाकर आज इस त्योहार को जो विकृत स्वरूप प्राप्त हुआ है, उसे रोकने हेतु प्रयास करें । हिन्दुओं को इस माध्यम से हमारे त्योहार और संस्कृति का सम्मान करने हेतु संगठित होना चाहिए ।
आषाढ मास में दीपयज्ञ करने की परंपरा है ।