हिन्दू संगठन हेतु स्वयं में विद्यमान स्वभावदोष तथा अहं का निर्मूलन आवश्यक ! – सद्गुुरु नंदकुमार जाधवजी, सनातन संस्था
हिन्दू संगठन का कार्य करते समय हिन्दुत्वनिष्ठों को आचारसंहिता का पालन करना आवश्यक है ।
हिन्दू संगठन का कार्य करते समय हिन्दुत्वनिष्ठों को आचारसंहिता का पालन करना आवश्यक है ।
त्रेतायुग में श्रीरामजी ने रावणवध हेतु श्रीलंका जाकर युद्ध किया द्वापरयुग में दो परिवारों में युद्ध हुआ और इस कलियुग में हमारा संघर्ष हममें विद्यमान स्वभावदोषों से चल रहा है ।
आजकल हिन्दुत्व का कार्य करनेवाले कार्यकर्ताआें को हिन्दू धर्म में विद्यमान अध्यात्म का कोई ज्ञान नहीं होता ।
केरल के त्रिचूर जिले में सनातन की ओर से जिज्ञासुआें के लिए व्याख्यान लिया गया ।
राजराजेश्वरी नगर में ३० सितंबर को ‘प्रथम कन्नड साहित्य सम्मेलन’ आयोजित किया गया था । इस सम्मेलन में सनातन संस्था की ओर से ग्रंथप्रदर्शनी लगाई गई ।
गणेशोत्सव के समय में सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से अनेक स्थानोंपर हस्तपत्रिकाएं, भितीपत्र, फ्लेक्स-ग्रंथ प्रदर्शनी, प्रवचन जैसे विविध माध्यमों से अध्यात्मप्रसार किया गया ।
अधिवक्ता तथा समाज के लोगों ने कहा कि प्रदर्शनी से साधना व देवताओं के बारे में ज्ञान मिला । यह ज्ञानवर्धक व धर्म जागृति करनेवाली प्रदर्शनी है ।
जन्माष्टमी निमित्त देहली के अलकनंदा स्थित संतोषी माता मंदिर एवं मालवीय नगर के शिवमंदिर में सनातन संस्था की आेर से प्रवचन आयोजित किया गया ।
सनातन संस्था की श्रीमती छाया टवलारे ने ‘आनंदमय जीवन के लिए अध्यात्म’ विषयपर प्रवचन किया ।
‘श्री गणेश पूजा एवं आरती’ इस ‘एंड्रॉईड एॅप’ का उद्घाटन यहां सनातन के आश्रम में परात्पर गुरु पांडे महाराजजी के शुभहस्तों १२ अगस्त को हुआ ।
