ठाणे में साधना शिविर का आयोजन !

मेकॅले की शिक्षाप्रणाली के कारण आज हिन्दू धर्मीय पाश्चात्त्य संस्कृति का आचरण कर रहे हैं । उससे उन्हें अपनी हिन्दू संस्कृति का विस्मरण हो रहा है । हिन्दुआें के लिए ऋषिमुनियों द्वारा किए गए व्यापक अध्ययन का, साथ ही ग्रंथलेखन का कोई महत्त्व नहीं है । साधना समझ लेकर उसके अनुसार आचरण करना ही धर्माचरण है ! ४ वर्णों के अनुसार आचरण करने से ही हम वास्तविक धर्मजीवन व्यतीत कर सकते हैं । सनातन संस्था की श्रीमती सुनीता पाटिल ने ब्राह्मण विद्यालय, चरई में २८ अक्टूबर को आयोजित साधना शिविर में यह मार्गदर्शन किया ।
इस अवसरपर सनातन संस्था की श्रीमती सविता लेले ने भी स्वभावदोष निर्मूलन विषयपर मार्गदर्शन किया । इस शिविर में नमक के पानी के आध्यात्मिक उपाय के संदर्भ में ध्वनिचित्रचक्रिका भी दिखाई गई ।
सहयोग : इस शिविर के लिए श्री. केदार जोशी ने ब्राह्मण विद्यालय का सभागार उपलब्ध कराया और विद्यालय में कार्यरत श्री. वैद्य को भी शिविर से संबंधित सेवा के लिए भेज दिया ।
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