दत्त जयंती के निमित्त मध्यप्रदेश में सनातन संस्था की ओर से प्रदर्शनी और ग्रंथ विक्रयकेंद्र का आयोजन !

दत्तजयंती के निमित्त बांगर के श्री दत्त पादुका मंदिर; वैशालीनगर, इंदौर के केशवानंद आश्रम ट्रस्ट के दत्त मंदिर और भोपाल के दत्तमंदिर में सनातन संस्था द्वारा प्रकाशित विविध विषयों के अनमोल ग्रंथों और सात्त्विक पूजासामग्री का वितरण कक्ष लगाकर अध्यात्मप्रचार किया गया ।

उज्जैन में सनातन संस्था की ओर से ‘साधना शिविर’ संपन्न !

विविध समस्याओ के कारण व्यक्ति तनावग्रस्त जीवन व्यतीत करता है । ऐसे में कालानुसार उचित साधना कर व्यक्ति आनंदप्राप्ति कर सकता है ।

सनातन संस्था की ओर से चेन्नई के भारत हिन्दू मुन्नानी के कार्यालय में विशेष सत्संग

सनातन की ओर से श्रीमती सुगंधी जयकुमार ने महिला जिज्ञासुओं का ‘साधना का महत्त्व, नामजप, आचारधर्म तथा समष्टि सेवा का महत्त्व’ विषयपर मार्गदर्शन किया ।

स्वभावदोषरूपी शत्रुओं से संघर्ष हेेतु स्वसूचना सत्र करना आवश्यक ! – श्रीमती सविता लेले, सनातन संस्था

आज के इस कलियुग में अपने स्वयं के अंतर्गत तथा बाहर के स्वभावदोषरूपी शत्रुओं से संघर्ष करना है और इसके लिए स्वभावदोष एवं अहंनिर्मूलन प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है ।

आजरा (जनपद कोल्हापुर, महाराष्ट्र) की ग्रामबैठक में युवक और महिलाआें का उत्स्फर्त सहभाग

देवताआें का अनादर, संतों के विरुद्ध झूठे आरोप लगाकर उन्हें कारागृह में डाल देना, बलपूर्वक धर्मांतरण ऐसी घटनाआें को रोकने के लिए हिन्दुआें का संगठन तथा धर्मशिक्षा की आवश्यकता है ।

‘कोची इंटरनैशनल बुक फेयर’ में सनातन के ग्रंथप्रदर्शनी का जिज्ञासुआें द्वारा उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर !

‘कोची इंटरनैशनल बुक फेयर’ में सनातन संस्था द्वारा प्रकाशित धर्म, अध्यात्म, आयुर्वेद, बालसंस्कार, स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन आदि विषयोंपर आधारित ग्रंथो की प्रदर्शनी लगाई गई ।

नवरात्रि निमित्त ग्रंथप्रदर्शनियों का आयोजन

वाराणसी के शिवपुर स्थित अष्टभुजी माता मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर ग्रंथ तथा धर्म शिक्षा देनेवाली फ्लेक्स प्रदर्शनी लगाई गई । जिससे अनेक जिज्ञासु लाभान्वित हुए ।

धनबाद (झारखंड) के शक्ति मंदिर में सनातन संस्था की प्रदर्शनी !

समाज के सभी को धर्मशिक्षा मिले इस महत उद्देश्य को लेकर सनातन संस्था द्वारा देशभर के कई स्थानों में सनातन संस्था द्वारा प्रकाशित ग्रंथ एवं सात्विक उत्पादनों की प्रदर्शनी लगायी जाती है !

साधना समझ लेकर उसके अनुसार आचरण करना ही धर्माचरण है ! – श्रीमती सुनीता पाटिल, सनातन संस्था

हिन्दुआें के लिए ऋषिमुनियों द्वारा किए गए व्यापक अध्ययन का, साथ ही ग्रंथलेखन का कोई महत्त्व नहीं है ।