‘खडकवासला जलाशय रक्षा’ अभियान में सनातन संस्था का सक्रिय सहभाग
इस वर्ष भी सुबह ९ बजे से सायंकाल ७ बजेतक जलाशय के इर्द-गिर्द मानवीय शृंखला बनाई गई और रंगों में रंगे हुए युवक-युवतियों का उद्बोधन कर उन्हें जलाशय के पानी में उतरने से रोका गया ।
इस वर्ष भी सुबह ९ बजे से सायंकाल ७ बजेतक जलाशय के इर्द-गिर्द मानवीय शृंखला बनाई गई और रंगों में रंगे हुए युवक-युवतियों का उद्बोधन कर उन्हें जलाशय के पानी में उतरने से रोका गया ।
सत्संग, सत्सेवा, त्याग, प्रेमभाव इस चरणबद्ध प्रक्रिया से साधना करने से हम अपने जीवन में आनंद का अनुभव कर सकते हैं । सनातन संस्था की श्रीमती धनश्री केळशीकर ने यह मार्गदर्शन किया ।
सुसंस्कृत समाज बनाने हेतु एकत्रित परिवारपद्धति आवश्यक है, यह उद्बोधन सनातन संस्था की साधिका तथा संस्कृत शिक्षिका श्रीमती संपदा अमित पाटणकर ने किया ।
मंगलुरू में सनातन संस्था की ओर से युवा साधकों के लिए ३ से ५ जनवरी की अवधि में २ दिवसीय शिविर लिया गया ।
कलियुग में स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया अपनाए बिना आनंदमय जीवन व्यतीत करना संभव ही नहीं है ।
मनुष्य जीवन के प्रत्येक चरणपर बाधाएं आती हैं । इनमें से अनेक बाधाएं हमारे स्वभावदोषों के कारण भी आती हैं । अतः हमने हमारे दोष दूर किए, तो इन समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा ।
सनातन संस्था की ओर से अभ्युदयनगर के एस्.एस्.एम्. शिवाजी विद्यालय में ७ दिसंबर को दोपहर ४.३० से सायंकाल ७ बजे की अवधि में साधना एवं स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया शिविर लिया गया ।
सनातन संस्था की ओर से भांडुप (पूर्व) के अवी क्लासेस एवं मुलुंड के रिचमंड इंटरनैशनल प्रीस्कूल में १ दिसंबर को साधना एवं स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया शिविर लिया गया ।
केवल अध्यात्मशास्त्र ही हमें आनंद की अनुभूति दे सकता है । उसके लिए सभी को साधना करना आवश्यक है । – ऐसें सनातन संस्था के सद्गुरु नंदकुमार जाधवजी ने यावल (जनपद जळगांव, महाराष्ट्र) में मार्गदर्शन में बताया ।
बेलगांव में बाढपीडितों के लिए रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया । इस शिविर में सनातन संस्था की ओर से बाढपीडितों को निःशुल्क डेंग्यु और चिकुनगुनिया प्रतिबंधक होमियोपैथिक औषधियां दी गईं ।