श्रीरामनवमी
श्रीराम के जन्म के उपलक्ष्य में श्रीरामनवमी मनाई जाती है । इस दिन जब पुष्य नक्षत्रपर, माध्यान्हके समय, कर्क लग्न में सूर्यादि पांच ग्रह थे, तब अयोध्या में प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ ।
श्रीराम के जन्म के उपलक्ष्य में श्रीरामनवमी मनाई जाती है । इस दिन जब पुष्य नक्षत्रपर, माध्यान्हके समय, कर्क लग्न में सूर्यादि पांच ग्रह थे, तब अयोध्या में प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ ।
राष्ट्ररक्षा के लिए उस समय के राजा देवताओं की उपासना कर अपने सेना को तंत्र-मंत्र द्वारा आध्यात्मिक कवच प्रदान करते थे । वे राजा सेना और राष्ट्र की आध्यात्मिकदृष्टि से ध्यान रखते थे, यही इससे दिखाई देता है ।
प्राचीन काल में जिसे मलय द्वीप कहते थे, वह है आज का मलेशिया देश ! मलेशिया, अनेक द्वीपों का समूह है । मलय भाषा में अनेक संस्कृत शब्दों का उपयोग किया जाता है । मलय साहित्य में रामायण और महाभारत का संबंध दिखाई देता है ।
ब्रह्मदेव ने नदियों के पाप धोने के लिए उन्हें एकत्रित कुंभकोणम के तालाब में स्नान करने के लिए कहा । तब से इस महोत्सव का आरंभ हुआ ।
जिन्होंने अत्यंत प्रतिकूल परिस्थिति में बडा किया, बडे होने अथवा विवाह होने पर हम उनका द्वेष, तिरस्कार करते हैं, कभी भूल भी जाते हैं; परंतु उस समय हम यह भूलते हैं कि, ‘हम भी कभी बूढे अथवा वृद्ध होनेवाले हैं ।
भारत के दक्षिण-पूर्व किनारे पर महत्त्वपूर्ण तीर्थक्षेत्र है रामेश्वरम् ! रामेश्वर के दर्शन के लिए हिन्दू धर्मपरंपरा में विशेष महत्त्व है ।
विभक्त परिवार पद्धति, व्यक्ति के दोष, आर्थिक समस्याएं आदि विचारधाराओं के कारण वृद्धाश्रम चिंता का विषय बन गया है । इस आयु में ज्येष्ठ नागरिकों को प्रेम, ममता और अपनेपन की आवश्यकता होती है ।
‘अगुंग पर्वत’ अर्थात धधकता और निरंतर जागृत ज्वालामुखी ! यहां प्रत्येक ५-१० मिनटों में राख का विस्फोट होता है । ३ सहस्र १०५ मीटर ऊंचे पर्वत पर यह ज्वालामुखी गत वर्षभर से जागृत है । इसलिए अनेक बार बाली द्वीप पर आपातकालीन स्थिति निर्माण हुई है । बाली में हिन्दू इस पर्वत को पवित्र मानते हैं ।
काल की साक्ष्य में मंदिरों की रचना करने से आज अनेक शताब्दियां बीत जाने पर भी ये सर्व मंदिर शान से खडे हैं । उनके सौंदर्य का दर्शन करते हुए आंखें फटी रह जाती हैं और उनके वर्णन के लिए शब्द कम पड जाते हैं ।
संतों और साधना करनेवाले साधकों द्वारा सात्त्विक वाणी में चैतन्यदायी ऑडिओ सभी को उपलब्ध हों, इस हेतु सनातन संस्था द्वारा ‘सनातन चैतन्यवाणी’ ऑडिओ एप उपलब्ध किया है ।