गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करने से कोरोना संक्रमण की संभावना न्यून होती है ! – ब्रिटेन में किए गए शोध से प्राप्त निष्कर्ष

भारतीय संस्कृति में जो प्राचीन काल से बताया गया है, उसपर अब पाश्चात्य वैज्ञानिक शोध कर उसकी पुष्टि कर रहे हैं ।

गुरुचरणों में प्रतिक्षण कृतज्ञता व्यक्त करना ही खरी गुरुदक्षिणा है !

गुरु ही हमारे हृदय में वास कर हमारा प्रतिपालन करते हैं, हमारा हाथ पकडकर हमें साधनापथ पर आगे-आगे ले जाते हैं और हमारे कल्याण के लिए सर्व करते हैं । तो हमें किस बात का अभिमान है ?

सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से उद्योजकों के लिए ऑनलाईन कार्यक्रम

सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से मुंबई, ठाणे, रायगड और गुजरात के उद्योगपतियों के लिए २१ मई को ऑनलाईन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था ।

गुरुसेवा कैसे करनी चाहिए ?

गुरु द्वारा कोई सेवा बताई जाने पर वह करना, यह मात्र चाकर (नौकर) अथवा दूत समान हुआ; परंतु गुरु को जो अभिप्रेत है (अर्थात ‘श्री’ गुरु की इच्छा जानकर), वह करना सद्शिष्य का लक्षण है ।

संकटकाल के घेरे में

कोरोना का संकट आनेपर संकटकालीन स्थिति उत्पन्न होने की चर्चा आरंभ हो गई । एक सूक्ष्म विषाणु ने देखते ही देखते संपूर्ण विश्व का परिवहन (यातायात) ठप्प कर दिया ।

सनातन संस्था के ध्वनीचित्रीकरण विभाग का विस्तारित स्वरूप और उसके अंतर्गत होनेवाले विविध विषय

दृश्य-श्रव्यचक्रिकाओं के माध्यम से घर-घर धर्मज्ञान का दीप जलाने का समष्टि ध्येय के साथ-साथ अंतःकरण भक्तिभाव से प्रकाशमय करना, यह ध्वनिचित्रीकरण सेवा के साधकों का व्यष्टि ध्येय है !

विदेश में प्राचीन हिन्दू संस्कृति के संकेतचिह्न

‘इंडोनेशिया एक द्वीपसमूह और मुसलमानबहुल राष्ट्र है, तब भी यहां पर महान हिन्दू संस्कृति की जडें गहरी पाईं गईं हैं ।

भाव का महत्त्व

भगवान का अस्तित्व प्रत्येक कृति करते समय तथा प्रत्येक क्षण अनुभव करना, प्रत्येक कृति करते समय भगवान के अस्तित्व की अनुभूति लेना, अथवा ईश्‍वर के अस्तित्व का भान होना, यही है भाव !

राममंदिर का निर्माणकार्य आरंभ हो गया है ! – महंत नृत्य गोपाल दासजी की घोषणा

‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थस्थान न्यास’के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने २८ वर्ष पश्चात रामलला के दर्शन करने के पश्चात रामजन्मभूमिपर राम मंदिर का निर्माणकार्य आरंभ होने की घोषणा की ।

आरती कैसे करें ?

भक्तिभाव वृद्धिंगत करनेवाला प्रभावी माध्यम-आरती । आरती, इस कलियुग में ईश्वर के दर्शन करने का सरल उपाय है; कारण यह कि कलियुग में ‘क्या भगवान..