गुरुपूर्णिमा के अवसर पर दान कीजिए !

 

सत्पात्र को दान करने के लाभ

संत एवं गुरु निर्गुण ईश्‍वर का सगुण (देहधारी) रूप हैं । भावुकता (इमोशनल) वृत्ति के कारण भिखारी, विद्यालय इ. को दान देने से पुण्य प्राप्त होता है, जबकि संतों के कार्य हेतु योगदान से संचितकर्म न्यून होकर प्रारब्धभोग भोगने की क्षमता बढती है तथा पाप-पुण्य के परे जाना संभव होता है ।

संत व गुरु का खरा कार्य है, धर्मरक्षा व धर्मसंस्थापना ! संत तथा राष्ट्र व धर्म की रक्षा हेतु कार्य करनेवाली संस्था को दान करना, धर्मकार्य में अपना सहयोग देना है । ऐसा करने से ईश्‍वर की कृपा दृष्टि शीघ्र होने में सहायता मिलती है ।

धनरूप में अर्पण करने हेतु संपर्क

श्रीमती भाग्यश्री सावंत  –  ७०५८८८५६१०

मेल – [email protected]