१२ ज्योतिर्लिंगों में प्रथम मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंश सनातन संस्था को अर्पित !

४ मई २०२६ के पवित्र दिन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के ४ दिव्य अंशों का रामनाथी (गोवा) स्थित सनातन संस्था के आश्रम में आगमन हुआ । श्रीचित्शक्ति श्रीमती अंजली मुकुल गाडगीळजी द्वारा लाए गए ४ शिवलिंगों का साधकों ने भोलेनाथ के जयघोष एवं वेदमंत्रोच्चार के साथ भावपूर्ण स्वागत किया ।

झारखंड एवं पूर्वोत्तर भारत में ‘रामराज्य निर्माण अभियान’ के अंतर्गत विविध उपक्रम संपन्न !

मंदिरों की पवित्रता एवं चैतन्य बनाए रखने हेतु मंदिर स्वच्छता अभियान भी चलाया गया । इसमें धनबाद के शिव मंदिर, बेकार बांध, राम मंदिर, कुसुम विहार, लक्ष्मीनारायण मंदिर, धनसार, कोलकाता के हातियारा एवं वासुदेव पाडा में मंदिर स्वच्छता के उपक्रम में धर्मप्रेमियों ने उत्साह से सहभाग लिया ।

सनातन संस्था का कार्य अदभुत एवं हिन्दुत्व के लिए संजीवनी है ! – पंडित गौरांग गौरीजी, कथावाचक, वृंदावन

यहां चल रहे लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के आध्यात्मिक आयोजन में वृंदावन से आई पंडित गौरांग गौरीजी से सनातन संस्था के साधक श्री. रणजीत सिंह मिले, तथा उन्हें संस्था के उद्देश्यों से परिचित कराया ।

सनातन संस्था द्वारा मथुरा के बृज लक्ष्मी धाम में सनातन संस्कार प्रशिक्षण वर्ग का 5 दिवसीय आयोजन

सनातन संस्था की ओर से बच्चों में अच्छे संस्कार हो इस दृष्टि से ५ दिन का सनातन संस्कार प्रशिक्षण वर्ग भारत भर में आयोजित किया जा रहा है । इस वर्ग में बच्चों को भगवान का नामजप करना, नमस्कार करने की उचित पद्धति, गुण बढाने हेतु क्या प्रयास करे यह सिखाया । अपने राष्ट्र पुरुष, महान संत और ऋषि मुनियों की जानकारी भी दी गई ।

रामराज्य की स्थापना हेतु सामूहिक प्रार्थना का आयोजन

मथुरा, 16 मई 2026 को श्री जी गार्डन 1 सोसाइटी में मंदिर में सुंदरकांड पाठ के बाद रामराज्य स्थापना के लिए सामूहिक प्रार्थना और प्रतिज्ञा ली गई । सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले जी के जन्मोत्सव के अवसर पर यह प्रतिज्ञा ली गई ।

अमरावती के भाजपा राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे की रामनाथी (गोवा) स्थित सनातन आश्रम में सदिच्छा भेंट !

देशभर के युवक-युवतियों को उचित मार्ग दिखाने का कार्य सनातन संस्था करती है, ऐसे गौरवपूर्ण उद्गार अमरावती के भाजपा राज्यसभा सांसद एवं महाराष्ट्र के पूर्व कृषि मंत्री डॉ. अनिल बोंडे ने रामनाथी (फोंडा, गोवा) स्थित सनातन आश्रम की सदिच्छा भेंट के अवसर पर व्यक्त किए ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी सच्चिदानंद परब्रह्म (डॉ.) आठवले जी “धर्म अलंकार पुरस्कार” एवं “माँ पटन देवी सम्मान” से सम्मानित

पटना (बिहार) में ४ से ६ अप्रैल तक आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष, वास्तु और तंत्र सम्मेलन’ में सच्चिदानंद परब्रह्म (डॉ.) आठवले को धर्म और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए ‘‘धर्म अलंकार पुरस्कार’’ और “माँ पटन देवी सम्मान” से सम्मानित किया गया ।

ग्रंथवाचन एवं ग्रंथों के लिए चिन्हित कतरनों से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी का ध्यान में आया ईश्वरत्व !

अनेक लोगों को उनके द्वारा पढे गए लेखन से महत्त्वपूर्ण सूत्रों को अलग निकालकर रखने की तथा कतरनों को संदर्भ के रूप में संजोकर रखने की आदत होती है । उससे उनके गुण भी प्रकट होते हैं; परंतु इससे केवल ईश्वर ही अन्यों को अनुभूति दे सकते हैं । इस सेवा के माध्यम से अन्यों में गुणवृद्धि करनेवाले तथा उन्हें चैतन्य प्रदान करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमात्र हैं ।

मनुष्य जीवन की संकीर्णता से व्यापकता की ओर होनेवाली प्राकृतिक यात्रा दर्शानेवाले जन्मकुंडली के १२ स्थान !

जन्मकुंडली के १२ स्थान मनुष्य की प्राकृतिक जीवनयात्रा दर्शाते हैं । यह यात्रा संकीर्णता से व्यापकता की ओर, स्थूल से सूक्ष्म की ओर, तामसिकता से सात्त्विकता की ओर एवं अज्ञान से ज्ञान की ओर है । प्रस्तुत लेख से हम जन्मकुंडली के १२ स्थानों का रहस्य समझ लेते हैं ।

अधिक मास

अधिक मास को ‘मलमास’ कहते हैं । अधिक मास में मंगल कार्य की अपेक्षा विशेष व्रत और पुण्‍यकारी कृत्‍य किए जाते हैं ।