भृगुसंहिता और शिवसंहिता के सनातन आश्रम में शुभागमन पर साधकों ने अनुभव किए चैतन्यमय क्षण !

सनातन के संत पूज्य डॉ. मुकुल गाडगीळ और सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ ने मंगलवाद्यों की धुन तथा वेदोच्चारसे पवित्र हुए वातावरण में भृगुसंहिता और शिवसंहिता का आश्रम में स्वागत और पूजन किया ।

हिन्दुआेंका पवित्र धर्मग्रंथ ‘भगवद्गीता’ से मैनेजमेंट सीखेंगे राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र !

हिन्दूआेंका पवित्र धर्मग्रंथ भगवद्गीता और रामायण अब राजस्थान विश्वविद्यालय से संबंधित कॉलेजों के कॉमर्स और मैनेजमेंट के पोस्ट ग्रैजुएट (स्नातकोत्तर) कोर्सेज के छात्रों के पाठ्यक्रम में शामिल होंगे। इन धार्मिक ग्रंथों की मदद से छात्रों को मैनेजमेंट की नीति सिखाई जाएंगी।

धर्म को ग्लानि आने पर गुरु-शिष्य परंपरा ही धर्म प्रस्थापित करती है ! – श्री. अभय वर्तक, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था

आज विश्व में अधर्म का अंधःकार बढ रहा है एवं इस अंधकार में भारत भी घसीटा जा रहा है । ‘हिन्दू राष्ट्र’ अर्थात ‘सनातन धर्म राज्य’ स्थापित करने हेतु हर व्यक्ति को अन्याय के विरोध में कृति करनी चाहिए । जिस प्रकार गुरु-शिष्य परंपरा समाज को साधना की ओर ले जाती है ।

सनातन संस्था, हिन्दू जनजागृति समिति और अन्य समविचारी संगठनों के संयुक्त तत्त्वावधान में भावपूर्ण गुरुपूर्णिमा महोत्सव संपन्न !

अपार कृतज्ञता के इन भावाश्रुआें की सुमनांजली श्रीगुरु के चरणकमलों पर अर्पित करते हुए साधकजन, हिन्दू धर्माभिमानी और सनातन के हितैषियों ने गुरुपूर्णिमा महोत्सव मनाया ।

वर्षाकाल में ये सावधानी बरतें !

वर्षाकाल का प्रमुख लक्षण है, भूख मंद होना । भूख मंद होने पर भी पहले जैसा ही आहार लेने से वह अनेक रोगों को आमंत्रित करता है; क्योंकि मंद हुई भूख अथवा पाचनशक्ति अधिकतर विकारों का मूल कारण है ।

हिन्दू धर्म पर आनेवाली आपत्तियों के संदर्भ में; सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति की, वारकरी संप्रदाय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर की गई लडाई !

हिन्दू धर्म, संत, एवं राष्ट्रपुरुषों पर विविध माध्यमोंद्वारा जो आपत्तियां उठाई जा रही है, उन आपत्तियों के विरोध में सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति ने वारकरियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लडाई की है ! उनमें से कुछ चुने हुए उदाहरण यहां प्रस्तुत कर रहे हैं . . .

गुरुकृपायोगानुसार करने योग्य साधना का नियम

कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग आदि किसी भी मार्ग से साधना करने पर भी बिना गुरुकृपा के व्यक्ति को ईश्‍वरप्राप्ति होना असंभव है । इसीलिए कहा जाता है, गुरुकृपा हि केवलं शिष्यपरममङ्गलम् ।,

११ हजार वर्ष प्राचीन है ‘स्वस्तिक’ चिन्ह – शोधकर्ताओंका निष्कर्ष

भारत के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के शोधार्थियों का कहना है कि, स्वस्तिक आर्यन्स या सिंधु घाटी सभ्यता से लगभग ११ हजार वर्ष प्राचीन है ।

ईश्वर की कृपा संपादन करने का सुलभ मार्ग है ‘प्रार्थना’ !

‘भगवान अथवा गुरु की शरण जाकर याचना करके मनोवांछित फल मांगना, अर्थात प्रार्थना । मन से की गई प्रार्थना के कारण भगवान एवं गुरु का कृपाशीर्वाद निरंतर मिलता है ।

जादूटोना विरोधी कानून सम्मत कराने के दबाव से डॉ. दाभोलकर की हत्या हुई होगी

पुणे : डॉ. नरेंद्र दाभोलकर का हत्या प्रकरण अब एक निराले मोड पर जाने की संभावना है !

४ जुलाई को इंदापुर (जिला पुणे) के श्री. श्रीपाद धर्माजी खरातद्वारा न्यायालय में एक आवेदन प्रविष्ट किया गया है, जिसमें ऐसी संभावना व्यक्त की गई है कि, जादूटोना विरोधी कानून सम्मत कराने के दबाव से डॉ. दाभोलकर की हत्या हुई है।