खडगपुर : स्वस्तिक, जिसे भारतीय शांति और निरंतरता का प्रतीक मानते हैं । भारत के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के शोधार्थियों का कहना है कि, स्वस्तिक आर्यन्स या सिंधु घाटी सभ्यता से लगभग ११ हजार वर्ष प्राचीन है । और इसका प्रभाव पश्चिमी और मध्य-एशियाई सभ्यताओं में भी देखने मिलता है ।
इस संशोधन का अभ्यास करनेवाले प्रमुख जॉय सेन ने कहा, हमें हडप्पा संस्कृती के पूर्वकाल में भी मुद्राओंका स्वरूप होनेवाले सुस्पष्ट भौगोलिक स्वस्तिक का अस्तित्व मिला है । इसी काल में वेदो में भी स्वस्तिक का उल्लेख दिखता है ।
स्वस्तिक पर शोध के दौरान शोधार्थियों ने एक और खोज की है । उनका कहना है कि, ऋग्वेद को आर्यों की सभ्यता से जोडा जाता है, जबकि यह हडप्पा सभ्यता से भी पहले का है । उस समय यह श्रुतियों के रूप में था, जिसे मौखिक रूप से सिंधु घाटी सभ्यता के हवाले कर दिया गया ।
स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

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