यहां मिला २००० वर्ष प्राचीन शिवलिंग, आता है तुलसी जैसा सुगंध !
शिवलिंग की सबसे बड़ी विशिष्टता यह है कि, इससे ऐसी बहुत सी ऐतिहासिक चीजें जुड़ी हैं जो आज भी इस जमीन में है और हमें हमारी पुरानी सभ्यता और उनसे जुड़े किस्से-कहानियों की याद दिलाती हैं।
शिवलिंग की सबसे बड़ी विशिष्टता यह है कि, इससे ऐसी बहुत सी ऐतिहासिक चीजें जुड़ी हैं जो आज भी इस जमीन में है और हमें हमारी पुरानी सभ्यता और उनसे जुड़े किस्से-कहानियों की याद दिलाती हैं।
त्रैलंग स्वामी जी एक हिन्दू योगी थे । वे गणपति सरस्वती के नाम से भी जाने जाते थे । माना जाता है कि उनकी आयु लगभग ३०० वर्ष रही थी ।
पुरातत्व विभाग के तकनीकी दल ने मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के जावर तहसील के ग्राम वीलपान के समीप बसे देवबड़ला में परमाकालीन दो मंदिर ढूंढ निकाले हैं।
अनेक बार हमें लगने लगता है कि अकस्मात वातावरण में दबाव बढ गया है । अनेक बार हमारे चारों ओर नकारात्मक स्पंदन घूम रहे हैं, इसका बोध होने लगता है, साथ ही श्वास लेने में कुछ रुकावट आ रही है, ऐसा भी लगता है ।
निरोगी शरीर के लिए साबुन न लगाना ही श्रेयस्कर है । साबुन के स्थान पर पिसी हुई चना दाल अथवा मसूर दाल अथवा बमीठे अथवा अच्छे स्थान की छनी मिट्टी का उपयोग करना, अच्छा और सस्ता है ।
२८ और २९ दिसबर को रंगरूट प्रशिक्षण केंद्र ,केन्द्रीय पुलिस बल,सूरतगढ़ राजस्थान में सनातन संस्था के साधक , श्री किरण नोगिया जी ने प्रवचन लिए।
जोधपुर में हुए लिटरेचर फेस्टिवल मे सनातन संस्था की ओर से श्रीमती राखी मोदी जी ने आध्यात्मिक ग्रंथों की प्रदर्शनी लगाई जिसमे ३ पाक्षिक के सदस्य बने ।
श्राद्ध के कारण पूर्वजदोष के (पितृदोषके) कष्ट से रक्षा कैसे होती है ? ‘श्राद्धद्वारा उत्पन्न ऊर्जा मृत की लिंगदेह में समाई हुई त्रिगुणात्मक ऊर्जा से साम्य दर्शाती है; इसलिए अल्पावधि में श्राद्ध से उत्पन्न ऊर्जा के बल पर लिंगदेह मत्र्यलोक पार करती है । (मत्र्यलोक भूलोक एवं भुवर्लोक के मध्य स्थित है ।) एक बार … Read more
वनविभाग, अग्निशमन दल, प्रदूषण नियंत्रण विभाग एवं स्थानीय पुलिस प्रशासन से किसी भी प्रकार की अनुमति न होते हुए भी सनबर्न के आयोजकों ने सनबर्न फेस्टिवल की बिना किसी बाधा से बडी मात्रा में सिद्धता प्रारंभ कर दी है।
शिक्षा भारतीय संस्कृति के अनुसार, गुरुकुल परम्परा के अनुसार होनी चाहिए । शिक्षा भी सत्ता के अधीन नहीं रहनी चाहिये तथा गुरु और शिक्षक कभी भी पेड सर्वेण्ट नहीं होने चाहिये । पूर्व में लोक और समाज द्वारा संधारित गुरुकुल चला करते थे ऐसे ही चलने चाहिए ।
