स्व-भाषारक्षाके कार्य और उसके अलौकिक पहलुआेंके विषयमें शोध !
मराठी और हिन्दी भाषाआेंमें घुसे हुए अंग्रेजी, उर्दू, फारसी आदि विदेशी भाषाके शब्दोंका प्रयोग न कर, स्वभाषाके संस्कृतनिष्ठ पर्यायी शब्दोंका उपयोग किया जाए, इसके लिए परात्पर गुरु डॉक्टरजीने वीर सावरकरके पश्चात खण्डित हुआ भाषाशुद्धि अभियान पुनः आरम्भ किया ।
