श्री रामजन्मभूमि पर हिन्दुआें को पूजा करने का अधिकार मिले ! – हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन

वर्तमान में केंद्र और राज्य दोनों स्थानों पर भाजपा की बहुमतवाली सरकारे हैं । इस कारण अब तो यहां हिन्दुआें को पूजा करने का अधिकार मिले, इस हेतु सनातन संस्था आदि हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के कार्यकर्ताआें ने राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन किया ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीके कार्यको ईश्‍वरद्वारा प्राप्त आध्यात्मिक प्रमाणपत्र !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीकी देह, नख और केश में दैवी परिवर्तन हो रहे हैं । परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीके समान ही शरीरमें दैवी परिवर्तनकी अनुभूति सनातनके कुछ सन्तों और साधकों को भी हुई है ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीको अपने जीवनकार्यके विषयमें लगनेवाली कृतार्थता !

मैं ४३ वर्षकी अवस्थामें (वर्ष १९८५ में) साधनाकी ओर मुडा । ४५ वें वर्ष (वर्ष १९८७) में मुझे परम पूज्य भक्तराज महाराज (बाबा) गुरुरूपमें मिले । वर्ष १९९० में मुझे परम पूज्य बाबाने कहा, देश-विदेशमें सर्वत्र धर्मका प्रसार कीजिए ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के विषय में जगद्गुरुपद के सन्तों के गौरवोद्गार !

प.पू. डॉ. आठवलेजी सत्त्वशील, त्यागी और महान पुरुष है । उनका कार्य आदि शंकराचार्यजी के कार्य समान है ! – पूर्वाम्नाय श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्‍चलानंदसरस्वती

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के कार्य के लिए गुरु, संत एवं ऋषियों के आशीर्वाद !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने किए महान कार्य का कारण है उनकी लगन, भक्ति और उन्हें प्राप्त हुए गुरु, संत एवं महर्षियाें के आशीर्वाद ।

आगामी भीषण आपातकालकी दृष्टिसे कार्य

परात्पर गुरु डॉक्टरजीका ग्रन्थलेखनका मुख्य उद्देश्य था समाजको अध्यात्म और साधना सिखाना । ऐसेमें उन्होंने इतने पहलेसे विविध उपचार-पद्धतियोंसे सम्बन्धित कतरनें क्यों संग्रहित की थीं ? इस रहस्यका मुझे वर्ष २०१३ में कारण ज्ञात हुआ

अध्यात्म विश्‍वविद्यालयकी स्थापना

संसारमें भौतिक शिक्षा देनेवाले अनेक विश्‍वविद्यालय हैं; परन्तु अध्यात्मशास्त्रका परिपूर्ण तथा ईश्‍वरप्राप्तिकी शिक्षा देनेवाला एक भी विश्‍वविद्यालय नहीं है । इसलिए २२.३.२०१४ को परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीने गोवामें महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय नामक न्यास स्थापित किया ।

प्राचीन हिन्दू आरोग्यशास्त्र आयुर्वेदका प्रसार और उसके माध्यमसे हिन्दू संस्कृतिका संवर्धन करना !

आयुर्वेदको पुनर्वैभव प्राप्त करानेके लिए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी कार्यरत हैं । उनकी प्रेरणासे सनातनने आयुर्वेदसम्बन्धी ग्रन्थमाला प्रकाशित की है ।

गुरुकृपायोगानुसार जीवों से कलियुग में साधना करवानेवाले गुरुदेवजी !

हिन्दू राष्ट्र की (सनातन धर्म राज्य की) स्थापना करने हेतु कुछ चुने हुए जीवों को प.पू. डॉक्टरजी अपने साथ लेकर आए हैं । उन्होंने अनेक सार्वजनिक सभाओं में हिन्दू राष्ट्र स्थापित करने के विचार अनेक जीवों के अंतःकरण में बोए हैं ।

गुरु के विविध प्रकारानुसार परम पूज्य डॉक्टरजी में दिखे विविध रूप !

प.पू. डॉक्टरजी द्वारा लिखित गुरुकृपायोगानुसार साधना, इस ग्रंथ में गुरु के विविध प्रकार प्रतिपादित किए हैं । भाव रखकर पढनेका प्रयत्न करने पर ध्यान में आता है कि, ग्रंथ में वर्णित गुरु के सर्व रूप प.पू. डॉक्टरजी में समाहित हैं । आगे दिए अनुसार यह विषय शब्दबद्ध करने का प्रयत्न इस लेख में किया है ।