दुर्गम क्षेत्रों के दो पाठशालाओं को सनातन संस्था के ग्रंथ, सात्त्विक वहियां तथा क्रांतिकारकों के सचित्र फलकों के संच भेंटस्वरूप

सनातन संस्था के साधक श्री. मनोज महाजन के नेतृत्व में आयोजित किए गए रद्दी संकलन अभियान में दो पाठशालाओं को प्राप्त हुई संस्कारक्षम भेंट ! पुणे, २९ मई – सनातन के ६३ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर के साधक श्री. मनोज महाजन के नेतृत्व में कोथरूड, कर्वेनगर, एरंडवणे तथा सिंहगढ मार्ग परिसर में ६ वर्ष रद्दी संकलन … Read more

परात्पर गुरु श्री श्री जयंत बाळाजी आठवलेजी के अमृतमहोत्सव के उपलक्ष्य में संत एवं मान्यवरोंद्वारा दिए गए संदेश एवं अभिप्राय !

परात्पर गुरु श्री श्री जयंत बाळाजी आठवलेजी के अमृतमहोत्सव के उपलक्ष्य में मैं उनके लिए निरोगी दीर्घायु का चिंतन करता हूं, साथ ही सनातन संस्था को भी शुभकामनाएं देता हूं। समाज को धर्मशिक्षा देने का सनातन संस्था का कार्य प्रशंसनीय है।

परात्पर गुरु श्री श्री जयंत बाळाजी आठवलेजी को दीर्घायु प्राप्त होने हेतु श्रीराम सेना की ओर से धारवाड (कर्नाटक) में ‘महामृत्युंजय याग’ !

परात्पर गुरु श्री श्री जयंत बाळाजी आठवलेजी को दीर्घायु प्राप्त हो; इसके लिए उनके अमृतमहोत्सव के उपलक्ष्य में श्रीराम सेना की ओर से १८ मई को ‘महामृत्युंजय याग’ एवं ‘श्रीराम तारक होम’ किए गए।

एलोपैथी की औषधियां लेकर भी ठीक न होनेवाले पेट के विकार आयुर्वेदिक उपचारों से कुछ ही दिनों में पूर्णत: ठीक होना

६ माह एलोपैथी की औषधियां लेकर भी अपचन दूर न होना पिछले १ वर्ष से मुझे अपचन की समस्या है । इस कारण पेट में वायु (गैस) होना, बहुत भूख लगना, अनावश्यक खाना, इस प्रकार के कष्ट होने लगे ।

अध्यात्म में सर्वाेच्च पद पर विराजमान होते हुए भी अखंड शिष्यावस्था में रहनेवाली महान विभूति !

प.पू. डॉक्टरजी परात्पर गुरु के सर्वाेच्चपद पर विराजमान हैं । इतनी उच्च स्थिति में होते हुए भी प.पू. डॉक्टरजी ने अपना शिष्यत्व बनाए रखा है । उनके अनेक कृत्यों से यह सीखने को मिलता है । इनमें से कुछ उदाहरण आगे दे रहे हैं ।   १. भेंट लेने आए संतों के सामने भी शिष्यभाव … Read more

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का अद्वितीय ग्रंथकार्य (परिचय एवं विशेषताएं)

‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के गुरु सन्त भक्तराज महाराजजी ने उनसे एक बार कहा था, ‘‘मेरे गुरु ने मुझे आशीर्वाद दिया था कि तू किताबों पर किताबें लिखेगा ।’ किन्तु मैं भजन का एक ही ग्रन्थ लिख पाया । वह आशीर्वाद मैं आपको देता हूं ।

सनातन संस्था के आश्‍चर्यजनक कार्य के साथ है, सूक्ष्म के जानकार संतों व ऋषियों का आशीर्वाद !

बडे-बडे संतों की संस्थाआें की तुलना में सनातन संस्था को अत्यल्प लोग जानते हैं । यह है सनातन संस्था का स्थूल परिचय । सूक्ष्म स्तर पर सनातन की स्थिति यह है…

प.पू. डॉक्टरजी का शिष्यरूप

उच्च विद्याविभूषित प.पू. डॉक्टरजी ने उनके गुरू की , परात्पर गुरु प.पू. भक्तराज महाराजजी की तन-मन-धन अर्पण कर परिपूर्ण सेवा की ।

साधकों को कभी विनोद की भाषा में, तो कभी गंभीरता से अध्यात्म सिखानेवाले परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी !

प.पू. डॉक्टरजी साधकों को विनोद की भाषा में सिखाते हैं । संत और गुरु का वाक्य ब्रह्मवाक्य होता है और वह समष्टि को कुछ सिखाता है ।

सनातन के अल्प अवधि में ही व्यापक होने के पीछे का रहस्य !

सनातन संस्था के अल्प अवधि में ही विश्‍वव्यापी होने के पीछे कुछ विशेषताएं हैं; परंतु ये विशेषताएं आध्यात्मिक स्तर की हैं ।