सनातन के गुजराती जालस्थल (वेबसाइट) का उद्घाटन
वापी (गुजरात) यहां के संत पू. इंद्रवदन शुक्ल के करकमलों से २४ सितंबर को सनातन संस्था के गुजराती जालस्थल का उद्घाटन हुआ ।
वापी (गुजरात) यहां के संत पू. इंद्रवदन शुक्ल के करकमलों से २४ सितंबर को सनातन संस्था के गुजराती जालस्थल का उद्घाटन हुआ ।
वर्तमान में प्रत्येक क्षेत्र में, पश्चिमी संस्कृति ने अपना स्थान बना लिया है । वेशभूषा, आहार अथवा शिक्षा, सभी पर पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव दिखाई दे रहा है ।
भक्तियोग किसे कहते हैं, भक्तियोग इस साधना मार्ग की उत्पत्ति, उसकी विशेषताएं आदि के विषय में जाने एवं भक्त बनने के लिए क्या करना चाहिए ?
यहां की अधिवक्ता श्रीमती वैशाली गावंडे के निवासस्थान पर ब्रह्मलीन प.पू. स्वामी चिन्मयानंदजी की शिष्या तथा आचार्या चिन्मय मिशन, अकोला की प.पू. स्वामिनी मंगलानंदा के श्रीमत्भगवद्गीता सप्ताह का आयोजन किया गया था ।
सनातन संस्था के मिरज आश्रम में युवा साधक प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ हुआ । उस समय अनावरण के समय सनातन संस्था की सद्गुरु (कु.) स्वाती खाडये ने शिविर का उद्देश्य बताया ।
कर्करोग और हृदयरोग रोकनेवाले एन्टी-ऑक्सिडेन्ट नामक पदार्थ केवल बिना दूध की चाय में है । दूध चीनी मिलाकर उबली चाय आयुर्वेद शास्त्रानुसार अग्निमंद करनेवाली (भूख अल्प करने में सहायक) है ।
एल्युमिनियम अथवा हिंडालियम के बरतन शरीर के लिए हानिकारक है । भोजन बनाने के लिए मिट्टी के बरतनों का उपयोग करने से शरीर के लिए आवश्यक खनिज भोजन के माध्यम से मिलते हैं ।
यहां १८ से २१ अक्तूबर इस कालावधी में आयोजित किया गया युवा साधक प्रशिक्षण शिविर उत्साही वातावरण में संपन्न हुआ ।
सनातन आश्रम में प्रवेश करते ही हंसकर स्वागत होता है । बिना बताए ही सामान कक्ष में रखने हेतु सहायता की जाती है । साधक यह सर्व इतने प्रेम, सहजता और शीघ्र गति से करते हैं, कि आनेवाला देखते ही रह जाता है । कुछ पूछना नहीं पडता न ही कुछ मांगना पडता है ।
तथाकथितों में अध्यात्म के अभ्यास का अभाव रहता है तथा उनमें सीखने की वृत्ति भी नहीं होती; इसलिए उनका ज्ञान अत्यंत न्यून रहता है । अतः उनके मार्गदर्शन के समय लिखने जैसा कोई भी न होने के कारण उनके भक्त भी कुछ भी नहीं लिखते ।