विश्वविख्यात भविष्यवेत्ता नॉस्ट्रॅडॉमस तथा संताे के द्वारा बताया गया भविष्य

भारत देवभूमि है । ऋषियों की भूमि है । यहां अनेक तपस्वियों ने सूचित किया था कि आनेवाला काल अत्यंत भीषण आपत्तिकाल काल है । परंतु हम संकीर्ण और स्वार्थी हो गए । ‘‘अपना घर तो सुरक्षित है’’, इस विचार से हमने संतों की वाणी को अनदेखा किया । आज कोरोना की आंच हमारे घर तक नही आती, तो हम अब भी इसी भ्रम में रहते कि ‘‘हम सुरक्षित हैं ।’’, इसी भ्रम में रहते । संभवतः आज भी अनेक लोग इस भ्रम में हैं कि है कि ‘मुझे कुछ नहीं होगा ।’  परंतु अब भी समय है । विदेशों में जो भयावह स्थिति आज है, उससे भी कठिन परिस्थिति आगे आनेवाले समय में देखने मिलेगी । हम तो नहीं बता सकते कि क्या होगा, परंतु संतों की वाणी बहुत पहले ही हमें इस विषय में सूचित कर चुकी है । इसे गंभीरता से लेना होगा ।

कुछ चुनिंदा संतों की वाणी आपके समक्ष रखूंगा ।

यह भी भविष्य बताया गया है कि, पूरे विश्व में
हिंसा तथा प्राकृतिक आपत्तियों के कारण हाहाकार मचेगा !

इस से पूर्व भी भारत के अनेक संतों ने यह भविष्य बताया है । अन्य राष्ट्रों के शासनकर्ता इस भविष्य का उपयोग उनके राष्ट्र के संभाव्य मानवी तथा वित्त हानी टालने के लिए करते हैं, तो ‘निधर्मी’ भारत में इस प्रकार का भविष्य बतानेवाले संतों को ही झूठा सिद्ध करने की तथा उनके कथन की ओर अनदेखा करने की स्पर्धा होती है ! इस से राष्ट्र का हित होगा या हानि होगी ?

फ्रान्स के सोलहवे शतक के (वर्ष १५०३-१५६६) महान भविष्यवेत्ता नॉस्ट्रॅडॉमस द्वारा किए गए अनेक भविष्यं आज शास्त्रज्ञों के लिए रहस्य हुए हैं । नॉस्ट्रॅडॉमस ने आगामी २० शतकों में क्या क्या घटनेवाला है, इसका भविष्य ४०० वर्ष पूर्व ही बताया है । नॉस्ट्रॅडॉमस द्वारा कविता की सहायता से बताएं गए अनेक भविष्य सत्य सिद्ध हुए हैं । उन्होंने वर्ष २०१८ का भी भविष्य बताया है । उस भविष्य के अनुसार वर्ष २०१८ मे तिसरा महायुद्ध होगा ।

अणुस्फोट का संग्रहित छायाचित्र

 

१. वर्ष २०१८ में होनेवाले तिसरे महायुद्ध के संदर्भ में बताया गया भविष्य

अ. युगद्रष्टा नॉस्ट्राडेमस

आज से चार सौ वर्ष पहले नॉस्ट्राडेमस नामक प्रसिद्ध युगद्रष्टा का जन्म फ्रांस में हुआ था । उसने अनेक भविष्यवाणियां की थीं, जो पूर्णतः सत्य सिद्ध हुई हैं । उसने पहले और दूसरे महायुद्धके विषयमें जो कुछ कहा था, सब सच निकला । उसने तीसरे महायुद्धके विषयमें कहा है, ‘यह तीसरा महायुद्ध इतना भयानक होगा कि पहले के दो महायुद्ध बच्चोेंं का खेल लगेंगे !’ इसके आगे वह कहता है, ‘तेल उत्पादक राष्ट्र कांपेंगे, ज्वालामुखी सक्रिय होंगे, अनेक विमान गिरेंगे, तापमान इतना बढ जाएगा कि पृथ्वीके दोनों ध्रुवोंकी बर्फ पिघल जाएगी । इससे पानीका स्तर बढेगा, भूमि पानीमें डूब जाएगी । पानी पर इतने शव तैरेंगे कि समुद्र का पानी लाल कीचड जैसा दिखाई देगा ।’

१. मृत आत्माएं कबर से बाहर निकल कर हिंसा का आयोजन करेंगे !

नॉस्ट्रॅडॉमस द्वारा वर्ष २०१८ के लिए बताए गए भविष्यों में अत्यंत भयानक घटनाओं का उल्लेख पाया गया है । उन्होंने लिखा है कि, वर्ष २०१८ में मृत आत्माएं कबर से बाहर निकलकर पूरे विश्व में प्रचंड मात्रा में हिंसा करेंगे । साथ ही प्रंचड मात्रा में प्राकृतिक आपत्ती उद्भवने की भी संभावना है ।

२. विश्व के पूर्व तथा पश्चिम क्षेत्रों के राष्ट्रों में युद्धजन्य परिस्तिथी होगी !

नॉस्ट्रॅडॉमस ने उनके ‘द प्रोफेसीज’ इस पुस्तक में तिसरे महायुद्ध का भविष्य बताया है । इस समय वैश्विक स्तर पर महान परिवर्तन घटने की संभावना है । नॉस्ट्रॅडॉमस के मतानुसार तिसरा महायुद्ध २ अथवा २ देशों में नहीं, तो २ दिशाओं में अर्थात् पूरब तथा पश्चिम की ओर होनेवाले राष्ट्रों के बीच होगा ।

वर्तमान में पूरब तथा पश्चिम की ओर होनेवाले देशों में महान परिवर्तन हो रहा है तथा अनेक स्थानों पर तनाव की परिस्थिति है ।

३. मानवी वंश का ऱ्हास होगा !

तिसरे महायुद्ध के पश्चात् मानवी वंश का ऱ्हास होगा । युद्ध के पश्चात् का आनंद उपभोगने अत्यंत न्यूनतम संख्या में लोग ही शेष रहेंगे । आकाश से अग्नी के गोले धरती पर हाहाःकार मचा देंगे । लोग असहायता से इधर-उधर भागेंगे ।

वर्तमान में उत्तर कोरिया तथा अमरिका में तनावपूर्ण परिस्थिति है । उत्तर कोरिया का हुकूमशाह किम जोेंग ऊन निरतंर अण्वस्त्रों की जांच कर रहा है । अतः तिसरे महायुद्ध की मात्रा अधिक गहरी होते हुए दिखाई दे रही है ।

४. भूकंप तथा बाढ के कारण विनाश होगा !

नॉस्ट्रॅडॉमस ने वर्ष २०१८ में सहस्त्रों शक्तिशाली एवं विनाशकारी भूकंप होने का भविष्य किया है । इस भविष्य के अनुसार चीन में भूकंप तथा प्राकृतिक आपत्तियां आएंगी तथा उसमें अनेक लोगों की मृत्यु होगी । वर्ष २०१८ में सर्दी के मौसम में प्रशांत महासागर के मध्य में अधिकांश भूकंप होंगे तथा ज्वालामुखी के कारण विध्वंस होगा । बाढ के कारण पूरे विश्व में हाहाकार मचेगा । चीन, जपान तथा ऑस्ट्रेलिया में वादळ के कारण अधिक मात्रा में हानी होगी । बारिश तथा बाढ के कारण रशिया के लोग सर्वाधिक मात्रा में त्रस्त होंगे ।

५. तपमान में वृद्धी होने के कारण अनाज जल जाएगा !

‘द प्रोफेसीज’में यह प्रस्तुत किया है कि, राजा वनों की चोरी करेंगे । आकाश पूरी तरह से उजाड दिखाई देगा । तपमान में वृद्धी होने के कारण असंख्य मात्रा में अनाज जल जाएगा ।

इस भविष्य का अर्थ अनेक शास्त्रज्ञों ने सूर्य के साथ जुडा है । ‘ओझोन’ के स्तर को छिद्र आने से सूर्य पर होनेवाले स्फोट की आग पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश कर विनाश करेगी ।

६. इटली में महाकाय ज्वालामुखी का स्फोट होगा !

वर्ष २०१८ में ज्वालामुखी के उद्रेक के कारण पृथ्वी पर आपत्ती आएगी । इस का सर्वाधिक धोखा इटली को पहुंचेगा । इटली के संशोधकों के मतानुसार ‘विसुवियस’ यह एक महाकाय सक्रिय ज्वालामुखी है । यह ज्वालामुखी वर्ष २०१८ के अंत में अथवा वर्ष २०१९ के प्रारंभ में फटने की संभावना है । यह ज्वालामुखी आजतक २ बार फटा है ।

७. वर्ष २०२५ के पश्चात् निर्माण होनेवाली शांति का अनुभव करनेवाले लोग अत्यंत अल्प संख्या में होंगे !

वर्ष २०१८ में हुई इन घटनाओं के कारण पूरा विश्व असमर्थ होगा तथा यह विध्वंस वर्ष २०२५ में समाप्त होगा । तिसरे महायुद्ध के पश्चात् वर्ष २०२५ में पुनः एक बार शांति प्रस्थापित होगी; किन्तु इस शांति का अनुभव करने के लिए पूरे विश्व में अत्यंत अल्प संख्या में लोग शेष रहेंगे ।’

(संदर्भ : ‘दैनिक सामना’ संकेतस्थल, १३.११.२०१७)

आ. संत

प.पू. गगनगिरी महाराजने कहा था, ‘आगे इतना बुरा समय आनेवाला है कि हम संतों को भी लगेगा कि इस संसार से विदा हो गए होते, तो अच्छा हुआ होता !’ अन्य अनेक संतों ने भी इस प्रकार की बात कही है ।

इ. परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले

तीसरा विश्‍वयुद्ध महाभयानक होगा । तीसरे विश्‍वयुद्धके पश्‍चात संपूर्ण पृथ्वी पर बढें रज-तम के कारण उसे फिर से चैतन्यमय बनाने का कार्य करना पडेगा । उसके लिए अनेक संतोंकी आवश्यकता होगी । इसके लिए साधकोंको साधना बढानी चाहिए ।

उ. कर्नाटक में पू. भगवान महाराज के माध्यमसे श्री हालसिद्धनाथजी ने आनेवाले
काल के विषय में  भविष्य २०१२ और २०१९ में बताया था । उसमें से प्रमुख बिंदु पढें ।

१. ‘त्सुनामी आएगी, चक्रवात और भूकंप आएगा । दुनिया (जग) जल जाएगी ।

२. भारतपर भी संकट आएगा । आतंकी बडा घात करेंगे । नरसंहार होगा । दिनमें डाके पडेंगे और लूटपाट होगी । महाराष्ट्र के कृष्णा नदीके किनारे ९ लाख चूडियां फूटेंगी ।

३. नदियां सूख जाएंगी । पानीके कप खरीदने पडेंगे (भावार्थ : पानी महंगा होगा और महंगाई भी बहुत होगी ।)

४. औषधियां नहीं मिलेंगी । रोग-व्याधि बढेगी । डॉक्टर हाथ खडा कर देंगे । चलते-चलते, बोलते-बोलते मनुष्यके प्राण निकलेंगे ।

 

२. साधकों, आपत्काल का सामना करने के लिए साधना वृद्धिंगत कर ईश्वर का निस्सीम भक्त बनें !

‘आज की निधर्मी (अधर्मी) राज्यप्रणाली के कारण वर्तमान का समाज धर्माचरण से दूर गया है । अतः राष्ट्र एवं धर्म पर आनेवाली अनेक आपत्तियों का सामना करना पडता है । पूरे विश्व में अनाचार तथा अनैतिकता की मात्रा में वृद्धी हुई है । साथ ही पृथक प्राकृतिक आपत्तियां, युद्धसमान परिस्थिति में भी वृद्धि हो रही है । मध्य-पूर्व में (सिरीया, इराक इत्यादि स्थानों पर) बढनेवाली आय.एस्.आय.एस्. की महानता, पूरे विश्व में होनेवाले जिहादी आतंकवादी आक्रमणं, यह सभी उदाहरण आपत्काल समीप आने के लक्षण हैं । संत- महात्मा, ज्योतिषी इत्यादि के मतानुसार आपत्काल प्रारंभ हुआ है तथा उसकी तीव्रता आगे के ३ से ४ वर्ष बढती ही जाएगी ।

 

३. आपत्काल प्रारंभ होने के पीछे होनेवाले कारण

अतिवृष्टिः अनावृष्टिः शलभा मूषकाः शुकाः ।

स्वचक्रं परचक्रं च सप्तैता ईतयः स्मृताः ?

– कौशिकपद्धति

अर्थ : (यदि प्रजा धर्म का पालन न करें, तो ) अतिवृष्टी, अनावृष्टी (अकाल), टोळधाड, मूषकों का उपद्रव, तोताओं का उपद्रव, आपस में लढाई तथा शत्रु का आक्रमण ऐसी सात प्रकार की आपत्तियां (राष्ट्र पर) आती हैं ।

सारांश में प्रजा एवं राजा, दोनों भी धर्मपालक तथा साधना करनेवाले होने चाहिए ।

 

४. साधना न करनेवाले राजनेताएं जनता की
रक्षा करने में असमर्थ रहेंगे, इसलिए ईश्वर के ‘भक्त’ बनें !

अंग्लैंड, प्रशंसा इत्यादि प्रगत देशों पर होनेवाले आतंकवादी आक्रमणं ; चेन्नई में हुई अतिवृष्टि इत्यादि घटनाओं में मृतों की संख्या तथा उस आपत्तियों के समय सहस्त्रों नागरिकों को जीवन-मृत्यु के साथ जो लडा देना बाध्य हुआ, वह देखते हुए इस बात का अनुभव हुआ है कि, राजनेताएं साधनसामग्री के संदर्भ में कितने भी बलशाली हो; किन्तु वे जनता की रक्षा करने में असमर्थ सिद्ध हुए हैं है । इसके विपरित किसी भी आपत्काल में ईश्वर भक्त की पुकार सुनकर दौडकर आता है । यह इतिहास (उदा. द्रौपदी के लिए भगवान श्रीकृष्ण, भक्त प्रल्हाद के लिए नृसिंह) है । अतः इस आपत्काल का सामन करने के लिए साधकों ने साधना वृद्धिंगत कर ईश्वर का भक्त बनने की आवश्यकता है । उसके लिए साधकों ने समष्टी साधना तथा व्यष्टी साधना बढाकर ईश्वर के अधिकाधिक अनुसंधान में रहने के प्रयास करने चाहिए ।’

– (परात्पर गुरु) डॉ. आठवलेजी

 

५. नॉस्ट्रॅडॉमस द्वारा बताए गए भविष्यों मेंसे सत्य सिद्ध हुए कुछ भविष्यं !

  • ‘अंग्लैंड की राजकुमारी प्रिन्सेस डायना की मृत्यु
  • अ‍ॅडॉल्फ हिटलर की हुकुमशाही
  • दूसरा महायुद्ध
  • अणुबॉम्ब का आक्रमण
  • अमेरिका में हुआ ९/११ का आक्रमण
  • अमेरिका के राष्ट्राध्यक्ष के रूप में डोनाल्ड ट्रम्प का चुनना
  • नॉस्ट्रॅडॉमस ने अपने स्वयं के मृत्यु के संदर्भ में इस प्रकार के संकेत दिए थे कि, उनका मृत्यु एक पटल के समीप तथा सोने के स्थान पर होगा । मृत्यु की एक रात्रि पूर्व उन्होंने यह भविष्य बताया था कि, मैं कल रात्रि तक जीवित नहीं रहूंगा । दूसरे दिन प्रातः नॉस्ट्रॅडॉमस उनके शयनकक्ष में पटल के समीप मृतावस्था में पाए गए थे ।’

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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