‘दोनों हथेलियों की एकत्रित मुद्रा’ कर शरीर पर से कष्टदायक शक्ति का आवरण निकालने की पद्धति !

गुरुकृपा से ही शरीर पर से आवरण निकालने की इन पद्धतियों को ढूंढ पाए । इसके लिए हम साधक श्री गुरु के श्रीचरणों में कृतज्ञता व्यक्त करते हैं ।

डॉ. दाभोलकर हत्या प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने पर भी सनातन संस्था को दोषी ठहरानेवाले अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अविवेकी पदाधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई करेंगे !

डॉ. दाभोलकर की हत्या प्रकरण का निर्णय न्यायालय द्वारा न दिए जाने पर भी सनातन संस्था को दोषी ठहरानेवाले अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अविवेकी पदाधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई करेंगे !

‘मीनार (टॉवर) मुद्रा’ द्वारा शरीर पर आया आवरण निकालने की पद्धति

सहस्रारचक्र पर पकडी हुई ‘मीनार’ मुद्रा (‘टॉवर’ की मुद्रा), साथ ही ‘पर्वतमुद्रा’ के कारण अनिष्ट शक्तियों का कष्ट शीघ्र दूर होने में सहायता मिलना

श्रीकृष्ण की उपासना

भग‍वान श्रीकृष्ण की पूजा कैसे करें ?, भग‍वान श्रीकृष्ण को कौन सा फूल चढाते हैं ?, उसकी कितनी परिक्रमा करें ? इस संदर्भ में अधिक जान लें ।

सनातन संस्था द्वारा फरीदाबाद में वृक्षारोपण उपक्रम किया गया !

दिनांक 17.7.2023 को सनातन संस्था की और से फरीदाबाद, सेक्टर 29 के सरकारी प्राथमिक पाठशाला (गव्हरमेंट प्रायमरी स्कूल) में वृक्षारोपण का विशेष उपक्रम किया गया ।

मद्यपान का व्यसन लगे एक व्यक्ति के नामजप एवं आध्यात्मिक उपाय आरंभ करने पर केवल १ माह में उसका व्यसन छूटना, यह सनातन संस्था द्वारा बताई साधना की श्रेष्ठता है !

पू. अण्णा के आध्यात्मिक मार्गदर्शन एव प्रेमभाव, इसके साथ ही नामजप एवं आध्यात्मिक उपायों के कारण इस व्यावसायी के मद्यपान का व्यसन छूट गया ।

प्राणशक्तिवहन उपायपद्धतिनुसार आध्यात्मिक उपचार ढूंढने से पूर्व एवं आध्यात्मिक उपचार करने से पूर्व अनिष्ट शक्तियों द्वारा लाया गया कष्टदायक आवरण निकालने के विषय में अध्ययन के अंत में ध्यान में आए सूत्र !

अनिष्ट शक्तियां ऊपरी-ऊपर कष्टदायक आवरण ला रही हैं। आध्यात्मिक उपचार करके वह कम करें।आवरण आध्यात्मिक उपचार द्वारा कैसे निकाले यह अवश्य पढें।

ॐ का नामजप एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ॐ का महत्त्व !

ॐ मंत्र के विषय में अनेक सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं । ॐ एक वैश्विक ध्वनि (कॉस्मिक साउंड) होने से उससे विश्व की निर्मिति हुई है, यह उसमें से सर्वाधिक प्रचलित सिद्धांत है; परंतु भारतीय (हिन्दू) संस्कृति में ॐ का नियमित जप करने के पीछे केवल वही एकमेव कारण नहीं,

सनातन संस्था जो स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया सिखाती है, उसके अनुसार आचरण करें ! – अधिवक्ता कृष्णमूर्ती पी., ‍विश्व हिन्दू परिषद, कोडागू, कर्नाटक

कुछ दिन पूर्व जब उन पर आक्रमण हुआ, उस समय उन्होंने ‘परमपूज्य गुरुदेवजी ने मेरी रक्षा की है । मुझे अभी बहुत कार्य करना है’, ऐसा बताया । अब उन्होंने कर्नाटक राज्य के अधिवक्ताओं का संगठन करने का दायित्व स्वीकार किया है ।

अभिव्यक्तिस्वतंत्रता की दिशा भारतविरोधी शक्तियों ने निर्धारित की है ! – चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था

 हिन्दू धर्म दुराचार को अधर्म मानता है । विश्वकल्याण की भावना से काम करना भी धर्म है । योग्य कृति को ही धर्म कहा गया है । अभिव्यक्ति स्वतंत्रता के नाम पर अन्यों को पीडा देना, अधर्म है । अभिव्यक्ति स्वातंत्रता की मुख्य अडचन यह है कि अभिव्यक्ति स्वतंत्रता अथवा स्वैराचार ?