‘कोरोना’ की महामारी में स्वयं की प्रतिरोधकक्षमता और आध्यात्मिक बल बढाने के लिए मंत्रजप !

वर्तमान में ‘कोरोना’ की महामारी सर्वत्र फैल रही है । ‘इस विषाणु के संक्रमण से बचने के लिए चिकित्सकीय उपचारों के साथ प्रतिबंधात्मक उपायों स्वरूप तथा स्वयं की प्रतिरोधक क्षमता एवं आध्यात्मिक बल बढे, इस हेतु मंत्र-उपचार भी करें ।

आपातकाल में नमक-राई की कमी होने पर कुदृष्टि् उतारने की पद्धति

‘मैं एक साधक के लिए नामजपादि उपचार कर रहा था । उसका चैतन्य सहन न होने के कारण साधक का कष्ट अधिक बढ गया तथा उसके द्वारा मेरी ओर कष्टदायक शक्ति प्रक्षेपित होने लगी ।

हिन्दू अपने घर में वास्तुशांति करते हैं, मुस्लिम तथा ईसाई अपने घरों में यह विधि नहीं करते । तो क्या उन्हें भी कष्ट होता है ?

सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि घर के सदस्य साधना करें । इसका कारण यह है कि वास्तु पर सबसे अधिक प्रभाव घर में रहनेवाले व्यक्तियों के स्वभाव अथवा आचरण का होता है । साधना से आपकी और वास्तु की भी सुरक्षा होगी ।

वास्तुदेवता की कृपादृष्टि सदैव हमपर बनी रहे इसलिए कैसी प्रार्थनाएं करें

आज हम सीखेंगे कि वास्तुदेवता की कृपादृष्टि सदैव हमपर बनी रहे इसलिए कैसी प्रार्थनाएं करें । प्रार्थना एसे करें कि हम आर्त भाव से ईश्वर को पुकार रहे हैं ।

प्रतिदिन आगे दिए आध्यात्मिक उपाय गंभीरता से करें !

‘वर्तमान में सर्वत्र प्रतिकूल परिस्थिति उत्पन्न हो गई है । साधकों के लिए इस काल में आगे दिए आध्यात्मिक उपाय प्रतिदिन करने अत्यंत आवश्यक हैं ।

सब साधक प्रतिदिन अपने साथ ‘रक्षायंत्र’ रखें ।

‘वर्तमान में आपत्काल की तीव्रता अधिक होने से साधकों पर स्थूल से अथवा सूक्ष्म से आक्रमण होने की संभावना है । इसलिए सर्व साधक प्रतिदिन अपने साथ ‘रक्षायंत्र’ रखें ।

कोरोना विषाणुओं के विरुद्ध स्‍वयं में प्रतिरोध शक्‍ति बढाने के लिए आध्‍यात्मिक बल प्राप्‍त हो, इसके लिए ईश्‍वर द्वारा सुझाया नामजप !

कोरोना विषाणुओं के विरुद्ध स्वयं में प्रतिरोधक शक्ति बढाने के लिए चिकित्सकीय सुझाव और चिकित्सा के साथ ही ईश्वर द्वारा सुझाए गए इन ३ देवतातत्त्वों के अनुपात के अनुसार निम्नांकित नामजप तैयार हुआ ।

वाहनशुद्धि की पद्धतियां

वाहन के अनुचित और कष्टदायक स्पंदन (वाइब्रेशन्स) दूर कर, उसमें अच्छे स्पंदन उत्पन्न करने की क्रिया को शुद्धि करना कहते हैं ।

वास्तु शुद्धि की पद्धतियां

वास्तु (घर) के अनुचित और कष्टदायक स्पंदन (वाइब्रेशन्स) दूर कर, उसमें अच्छे स्पंदन उत्पन्न करने की क्रिया को शुद्धि करना कहते हैं ।

हृदयविकार और अन्य तीव्र शारीरिक कष्टवाले साधक निम्न मंत्रजप करें !

‘जिन साधकों को हृदयविकार अथवा अन्य तीव्र शारीरिक कष्ट हो रहे हैं, वे चेन्नई के भृगु जीवनाडीवाचक श्री. सेल्वम्गुरुजी की आज्ञा के अनुसार १२.२.२०१९ तक प्रतिदिन २१ बार निम्न मंत्रजाप भावपूर्ण पद्धति से कर अधिकाधिक गुरुस्मरण करें ।