१.१.२०२०से ३१.३.२०२० तक समष्टि के लिए नामजप करनेवालों द्वारा और समष्टि स्तर पर कष्ट दूर होने हेतु साधकों द्वारा किया जानेवाला नामजप आदि उपचार

वर्तमान में आपातकाल की तीव्रता बढती जा रही है । कालमहिमा अनुसार वर्तमान में साधकों को होनेवाले कष्टों में से ७० प्रतिशत कष्ट समष्टिस्तर पर और ३० प्रतिशत कष्ट व्यष्टिस्तर पर हैं ।

वाहनशुद्धि की पद्धतियां

वाहन के अनुचित और कष्टदायक स्पंदन (वाइब्रेशन्स) दूर कर, उसमें अच्छे स्पंदन उत्पन्न करने की क्रिया को शुद्धि करना कहते हैं ।

वास्तु शुद्धि की पद्धतियां

वास्तु (घर) के अनुचित और कष्टदायक स्पंदन (वाइब्रेशन्स) दूर कर, उसमें अच्छे स्पंदन उत्पन्न करने की क्रिया को शुद्धि करना कहते हैं ।

हृदयविकार और अन्य तीव्र शारीरिक कष्टवाले साधक निम्न मंत्रजप करें !

‘जिन साधकों को हृदयविकार अथवा अन्य तीव्र शारीरिक कष्ट हो रहे हैं, वे चेन्नई के भृगु जीवनाडीवाचक श्री. सेल्वम्गुरुजी की आज्ञा के अनुसार १२.२.२०१९ तक प्रतिदिन २१ बार निम्न मंत्रजाप भावपूर्ण पद्धति से कर अधिकाधिक गुरुस्मरण करें ।

कुदृष्टि उतारने की पद्धति का अध्यात्मशास्त्रीय आधार एवं अनुभूतियां

प्रार्थना के कारण देवता के आशीर्वाद से कुदृष्टिग्रस्त व्यक्ति की देह के भीतर और बाहर के कष्टदायक स्पंदन अल्पावधि में कार्यरत होकर कुदृष्टि उतारने हेतु उपयुक्त घटकों में घनीभूत होकर, तदुपरांत अग्नि की सहायता से अल्पावधि में नष्ट किए जाते हैं ।

नारियल से कुदृष्टि उतारने की पद्धति

कुदृष्टि उतारने की नारियल की क्षमता अन्य घटकों की अपेक्षा अधिक होने के कारण व्यक्ति की सूक्ष्म देह पर आया काली शक्ति का आवरण खींचने में नारियल अग्रणी माना जाता है ।

कुदृष्टि उतारने के लिए नमक और लाल मिर्च एक साथ प्रयोग करने की पद्धति

मिर्च की रज-तमात्मक तरंगें आकर्षित करने की गति राई की तुलना में अधिक होने के कारण स्थूलदेह और मनोदेह की कुदृष्टि उतारने में प्रायः मिर्च का उपयोग किया जाता है ।

कुदृष्टि उतारने के लिए नींबू प्रयोग करने की पद्धति

नींबू से कुदृष्टि उतारते समय उसके सूक्ष्म रजोगुणी वायु सदृश स्पंदनों को गति प्राप्त होने से, ये स्पंदन व्यक्ति पर आए रज-तमात्मक आवरण को अपनी ओर आकर्षित कर उन्हें घनीभूत करके रखते हैं ।

कुदृष्टि उतारने की पद्धति

कुदृष्टि यथासंभव सायं समय उतारें । कष्ट दूर करने के लिए वह समय अधिक अच्छा रहता है; क्योंकि उस समय अनिष्ट शक्ति का सहजता से प्रकटीकरण होता है तथा वह पीडा कुदृष्टि उतारने हेतु उपयोग किए जानेवाले घटक में खींची जा सकती है ।